गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) ने ‘Crypto-Assets in India: Assessing the Case for Regulation’ रिपोर्ट जारी की

डिजिटल डेस्क

 GNLU–SILF रिपोर्ट में क्रिप्टो एसेट्स के नियमन के लिए विभिन्न मॉडल प्रस्तावित

गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) ने सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF) के सहयोग से मंगलवार को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट “Crypto-Assets in India: Assessing the Case for Regulation” को औपचारिक रूप से जारी किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित द ललित होटल में आयोजित किया गया। रिपोर्ट में भारत में क्रिप्टो एसेट्स को लेकर मौजूदा नीतिगत स्थिति का अध्ययन किया गया है और एक संतुलित नियामक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल एसेट्स के लिए नियम तय करने के मामले में भारत एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। सरकार ने हाल के वर्षों में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर कराधान तथा क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के दायरे में लाने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं है, जिससे बाजार में नीतिगत अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट में क्रिप्टो एसेट्स के नियमन के लिए विभिन्न संभावित मॉडल सुझाए गए हैं। इसके साथ ही यह भी प्रस्तावित किया गया है कि जब तक एक व्यापक नियामक व्यवस्था विकसित नहीं हो जाती, तब तक सरकार की निगरानी में स्व-नियमन (Self Regulation) का मॉडल अपनाया जा सकता है।

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रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम में न्यायपालिका, विधि क्षेत्र, नीति विशेषज्ञों और डिजिटल एसेट उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. आर. शाह, गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि त्रिपाठी, SILF के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन तथा GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार शामिल रहे।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स यह दिखाते हैं कि कई बार तकनीकी नवाचार कानून से तेज गति से आगे बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक क्रिप्टो बाजार 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो चुका है और भारत भी इसमें एक बड़े बाजार के रूप में उभरा है, इसलिए अब मुख्य प्रश्न यह है कि इन तकनीकों को किस प्रकार संतुलित तरीके से विनियमित किया जाए।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ने कहा कि लगभग 12 करोड़ भारतीयों के क्रिप्टो एसेट्स में निवेश के कारण इस क्षेत्र को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों के हित सुरक्षित रहेंगे।

GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार ने कहा कि यह अध्ययन अकादमिक चर्चा से शुरू होकर एक राष्ट्रीय शोध पहल में विकसित हुआ। डेवलपर्स, एक्सचेंजों, नियामकों और विधि विशेषज्ञों के साथ विभिन्न शहरों में हुई चर्चाओं के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में नीति निर्माताओं के लिए पांच संभावित नियामक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं क्रिप्टो एसेट्स के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा विकसित कर चुकी हैं और भारत को भी एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण मजबूत हो और ब्लॉकचेन आधारित नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

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www.dainikjagranmpcg.com
11 Mar 2026 By दैनिक जागरण

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डिजिटल डेस्क

गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) ने सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF) के सहयोग से मंगलवार को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट “Crypto-Assets in India: Assessing the Case for Regulation” को औपचारिक रूप से जारी किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित द ललित होटल में आयोजित किया गया। रिपोर्ट में भारत में क्रिप्टो एसेट्स को लेकर मौजूदा नीतिगत स्थिति का अध्ययन किया गया है और एक संतुलित नियामक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल एसेट्स के लिए नियम तय करने के मामले में भारत एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। सरकार ने हाल के वर्षों में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर कराधान तथा क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के दायरे में लाने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं है, जिससे बाजार में नीतिगत अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट में क्रिप्टो एसेट्स के नियमन के लिए विभिन्न संभावित मॉडल सुझाए गए हैं। इसके साथ ही यह भी प्रस्तावित किया गया है कि जब तक एक व्यापक नियामक व्यवस्था विकसित नहीं हो जाती, तब तक सरकार की निगरानी में स्व-नियमन (Self Regulation) का मॉडल अपनाया जा सकता है।

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रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम में न्यायपालिका, विधि क्षेत्र, नीति विशेषज्ञों और डिजिटल एसेट उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. आर. शाह, गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि त्रिपाठी, SILF के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन तथा GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार शामिल रहे।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स यह दिखाते हैं कि कई बार तकनीकी नवाचार कानून से तेज गति से आगे बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक क्रिप्टो बाजार 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो चुका है और भारत भी इसमें एक बड़े बाजार के रूप में उभरा है, इसलिए अब मुख्य प्रश्न यह है कि इन तकनीकों को किस प्रकार संतुलित तरीके से विनियमित किया जाए।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ने कहा कि लगभग 12 करोड़ भारतीयों के क्रिप्टो एसेट्स में निवेश के कारण इस क्षेत्र को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट नियामक ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों के हित सुरक्षित रहेंगे।

GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार ने कहा कि यह अध्ययन अकादमिक चर्चा से शुरू होकर एक राष्ट्रीय शोध पहल में विकसित हुआ। डेवलपर्स, एक्सचेंजों, नियामकों और विधि विशेषज्ञों के साथ विभिन्न शहरों में हुई चर्चाओं के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में नीति निर्माताओं के लिए पांच संभावित नियामक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं क्रिप्टो एसेट्स के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा विकसित कर चुकी हैं और भारत को भी एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिससे उपभोक्ता संरक्षण मजबूत हो और ब्लॉकचेन आधारित नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

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