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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन निवेश रणनीति बदलेगा, जोखिम घटाने के लिए साझा फंड मॉडल की तैयारी
बिजनेस न्यूज
मासिक निवेश के बजाय वार्षिक निवेश का प्रस्ताव; 2 मार्च की बैठक में अंतिम फैसला संभव
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने निवेश ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य बाजार जोखिम को कम करना और फंड प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रस्तावित योजना के तहत संगठन अपनी विभिन्न योजनाओं के निवेश को अलग-अलग संचालित करने के बजाय एक साझा फंड संरचना के माध्यम से बाजार में लगाएगा। साथ ही, बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को सीमित करने के लिए मासिक निवेश के स्थान पर वार्षिक निवेश चक्र अपनाने का प्रस्ताव है।
इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय 2 मार्च को होने वाली केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में लिया जा सकता है। निवेश समिति पहले ही इन सुझावों को सैद्धांतिक स्वीकृति दे चुकी है। हालांकि आगामी वित्त वर्ष की ब्याज दरों की घोषणा इस बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं बताई गई है, जबकि इसके लिए व्यापक प्रतीक्षा बनी हुई है।
प्रस्तावित बदलाव के अनुसार ईपीएफओ अपनी पांच प्रमुख योजनाओं के फंड को एक साझा निवेश पूल में समाहित करेगा और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के माध्यम से निवेश करेगा। वर्तमान व्यवस्था में प्रत्येक योजना के लिए निवेश अलग-अलग किया जाता रहा है। नई प्रणाली में पूंजी आवंटन का एकीकृत ढांचा अपनाने से प्रबंधन दक्षता और जोखिम संतुलन बेहतर होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार संगठन कुछ दीर्घकालिक निवेशों की समीक्षा कर लाभ बुक करने की रणनीति पर भी विचार कर रहा है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े बॉण्ड्स में निवेश प्रबंधन को लेकर भी विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि साझा निवेश पूल से परिसंपत्ति विविधीकरण मजबूत हो सकता है और बाजार उतार-चढ़ाव का प्रभाव सीमित किया जा सकता है। वार्षिक निवेश चक्र अपनाने से समय-आधारित बाजार जोखिम घटाने और बेहतर मूल्यांकन के आधार पर निवेश निर्णय लेने में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि निवेश का समय निर्धारण और बाजार की स्थिति का आकलन नई रणनीति की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
ईपीएफओ देश के संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति बचत का प्रमुख माध्यम है। संगठन की निवेश नीति में किसी भी बदलाव का प्रभाव बड़ी संख्या में अंशधारकों पर पड़ता है, इसलिए नीति निर्माण में दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
सरकारी अपडेट से जुड़े इस प्रस्ताव को पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह सेवानिवृत्ति बचत प्रबंधन के तरीके को प्रभावित कर सकता है। भारत समाचार अपडेट और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय परिदृश्य में भी इस कदम पर नजर बनी हुई है।
अब बाजार विशेषज्ञों और अंशधारकों की निगाहें 2 मार्च की बैठक पर टिकी हैं, जहां प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। निर्णय के बाद निवेश नीति के कार्यान्वयन की समयसीमा और विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।
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