राजधानी भोपाल में आज आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का विरोध प्रदर्शन उस समय तीखा हो गया, जब नियमितीकरण और अन्य मांगों को लेकर निकाली गई न्याय यात्रा को प्रशासन ने जयप्रकाश अस्पताल परिसर से बाहर निकलने नहीं दिया। बैरिकेडिंग के बीच पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जबकि प्रदर्शन में शामिल एक महिला कर्मचारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी।
मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर से पहुंचे कर्मियों ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक न्याय यात्रा निकालने की कोशिश की। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल परिसर के मुख्य द्वार पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और वाटर कैनन के साथ रास्ते बंद कर दिए। विधानसभा सत्र जारी रहने के कारण रैली की अनुमति नहीं दी गई।
प्रदर्शन के दौरान धार जिले से आई मीना परमार नामक महिला कर्मचारी बेहोश होकर गिर गईं। वह अपने छोटे बच्चे के साथ रैली में शामिल हुई थीं। साथी कर्मचारियों ने उन्हें तत्काल प्राथमिक सहायता दी। घटना के बाद भी प्रदर्शनकारी गेट के समीप धरने पर बैठकर नारेबाजी करते रहे और अधिकारियों से वार्ता की मांग की।
प्रदर्शन में एड्स कंट्रोल एम्पलाइज यूनियन, संयुक्त डेंगू-मलेरिया कर्मचारी संघ, समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ और नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि 2 फरवरी से कर्मचारी लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई।
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों को रिक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में समाहित किया जाए। साथ ही न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा, ग्रेच्युटी और वेतन एरियर भुगतान जैसी नौ सूत्रीय मांगें भी उठाई गईं।
संघ का आरोप है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति व्यवस्था कर्मचारियों के शोषण को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि 12 से 14 घंटे तक सेवाएं देने के बावजूद स्थायित्व और सामाजिक सुरक्षा से वे वंचित हैं। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर स्थायी नीति बनाने की मांग भी दोहराई।
प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और कर्मचारियों से ज्ञापन सौंपकर लौटने का आग्रह किया गया है। सरकार की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगें सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाने पर अड़े हैं।
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