होली पर छाया राजीव आचार्य का नया गीत: “अवध में होरी, बृज में होरी” ने मचाई धूम

डिजिटल डेस्क

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रंग और भक्ति के संगम ने श्रोताओं को जोड़ा; डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेज़ी से बढ़े व्यूज़

होली के पावन पर्व पर इस बार रंगों के साथ भक्ति और संगीत का भी खास संगम देखने को मिल रहा है। प्रसिद्ध गायक राजीव आचार्य का नया होली गीत “अवध में होरी, बृज में होरी” श्रोताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश की जानी-मानी म्यूज़िक कंपनी टी-सीरीज़ द्वारा रिलीज़ किए गए इस गीत ने रिलीज़ होते ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शानदार शुरुआत की है। कुछ ही समय में इसे 15 लाख से अधिक व्यूज़ मिल चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

यह गीत अपनी अनोखी अवधारणा के कारण विशेष चर्चा में है। आमतौर पर होली गीतों में बृज की परंपरा और राधा-कृष्ण की होली का चित्रण प्रमुखता से किया जाता है, लेकिन “अवध में होरी, बृज में होरी” में भगवान राम की नगरी अयोध्या की होली और बृज की रास-लीला की होली को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। अवध की मर्यादा और भक्ति के रंगों के साथ बृज के प्रेम और उल्लास को मिलाकर गीत में एक नया संगीतात्मक प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं को बेहद आकर्षित कर रहा है।

गीत के बोल सुरभि ने लिखे हैं। उन्होंने पारंपरिक भावनाओं को सरल और मधुर शब्दों में पिरोया है, जिससे यह गीत सीधे श्रोताओं के मन तक पहुंचता है। वहीं संगीतकार आकाश रिज्जा ने लोकधुनों और आधुनिक संगीत के संयोजन से इसे खास रंग दिया है। ढोलक, मंजीरा और पारंपरिक ताल के साथ आधुनिक बीट्स का संतुलन इस गीत को हर आयु वर्ग के लिए सुनने योग्य बना रहा है।

सोशल मीडिया पर भी इस गीत का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यह तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इंस्टाग्राम पर 500 से अधिक रील इस गीत पर बन चुकी हैं। होली समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में यह गीत खास पसंद किया जा रहा है। युवा वर्ग जहां इस पर डांस रील बना रहा है, वहीं बड़े-बुजुर्ग इसे भक्ति और परंपरा के दृष्टिकोण से सराह रहे हैं।

राजीव आचार्य पहले से ही अपने भजनों और आध्यात्मिक गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनके लोकप्रिय भजन “हे मेरे राम” और “धर्म ध्वजा मेरे साथ थाम लो” 20 मिलियन से अधिक बार देखे जा चुके हैं। उनकी गायकी की सादगी और भावनात्मक प्रस्तुति ने उन्हें भक्ति संगीत जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।

“अवध में होरी, बृज में होरी” के माध्यम से राजीव आचार्य ने यह संदेश दिया है कि भारतीय परंपराएं और धार्मिक आस्था आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। होली के इस उत्सव में यह गीत रंगों के साथ श्रद्धा और प्रेम का भी संदेश दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष यह गीत होली के सबसे चर्चित गीतों में शामिल हो सकता है।

https://www.youtube.com/watch?v=0x7O1_hDRMs

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Edited By: ANKITA

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