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डीजल-ATF पर सरकार का बड़ा वार: एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, लेकिन देश में कीमतें रहेंगी काबू में
बिजनेस न्यूज
डीजल और जेट फ्यूल पर बढ़ी एक्सपोर्ट ड्यूटी: सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू कीमतें रहेंगी स्थिर
केंद्र सरकार ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार डीजल पर निर्यात शुल्क ₹34 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹55.5 कर दिया गया है, जबकि जेट फ्यूल पर यह ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से लिया गया है। वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिलहाल शून्य ही रखी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
घरेलू सप्लाई बढ़ाने पर जोर
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों के मुताबिक, जब वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां निर्यात से अधिक लाभ कमाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार कंपनियों को घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव और बाद में युद्धविराम की स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस अस्थिरता को देखते हुए भारत ने एहतियातन यह कदम उठाया है।
अन्य टैक्स में भी बदलाव
रिपोर्ट्स के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाकर ₹24 प्रति लीटर किया गया है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेस ₹36 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यह बदलाव सरकारी राजस्व बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
15 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी
इससे पहले 26 मार्च 2026 को भी सरकार ने डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में संशोधन किया था। महज 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे साफ है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विंडफॉल टैक्स क्या है
विंडफॉल टैक्स वह कर होता है जो उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें असामान्य परिस्थितियों में अचानक अधिक मुनाफा होता है। तेल कंपनियों के मामले में इसे एक्सपोर्ट ड्यूटी के रूप में लागू किया जाता है ताकि घरेलू बाजार प्रभावित न हो।
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डीजल-ATF पर सरकार का बड़ा वार: एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, लेकिन देश में कीमतें रहेंगी काबू में
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केंद्र सरकार ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार डीजल पर निर्यात शुल्क ₹34 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹55.5 कर दिया गया है, जबकि जेट फ्यूल पर यह ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से लिया गया है। वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिलहाल शून्य ही रखी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
घरेलू सप्लाई बढ़ाने पर जोर
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों के मुताबिक, जब वैश्विक कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां निर्यात से अधिक लाभ कमाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार कंपनियों को घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव और बाद में युद्धविराम की स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इस अस्थिरता को देखते हुए भारत ने एहतियातन यह कदम उठाया है।
अन्य टैक्स में भी बदलाव
रिपोर्ट्स के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाकर ₹24 प्रति लीटर किया गया है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेस ₹36 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। यह बदलाव सरकारी राजस्व बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
15 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी
इससे पहले 26 मार्च 2026 को भी सरकार ने डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में संशोधन किया था। महज 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे साफ है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विंडफॉल टैक्स क्या है
विंडफॉल टैक्स वह कर होता है जो उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें असामान्य परिस्थितियों में अचानक अधिक मुनाफा होता है। तेल कंपनियों के मामले में इसे एक्सपोर्ट ड्यूटी के रूप में लागू किया जाता है ताकि घरेलू बाजार प्रभावित न हो।
