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Iran-US Talks Fail: 21 घंटे चली वार्ता बेनतीजा, अमेरिका बिना समझौते लौटा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर मतभेद, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बोले—ईरान के लिए बुरी खबर
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका बिना किसी डील के लौट रहा है और यह स्थिति ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है।
वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसी भी समझौते के लिए यह जरूरी था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की ठोस गारंटी दे, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान उनकी टीम लगातार डोनाल्ड ट्रम्प के संपर्क में थी।
क्यों फंसी बातचीत
सूत्रों के अनुसार वार्ता पांच प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही—परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट, प्रतिबंध हटाना, युद्ध की भरपाई और क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करना। इनमें सबसे बड़ा विवाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर रहा।
ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण को रणनीतिक ताकत मानता है, जबकि अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार के लिए खुला रखना चाहता है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
ईरान का पक्ष
ईरानी अधिकारियों ने भी माना कि बातचीत बेनतीजा रही। उनका कहना है कि अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं और वे देश के हितों के खिलाफ थीं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका वार्ता के जरिए वह हासिल करना चाहता था, जो वह सैन्य कार्रवाई से नहीं कर पाया।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा
इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। वहीं लेबनान में भी हमले जारी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए माइंस हटाने का अभियान शुरू किया है। आरोप है कि ईरान ने रणनीतिक क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
चीन को चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान को हथियार भेजे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत के विफल होने से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। कूटनीतिक प्रयास जारी रहने की संभावना है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच दूरी कम होती नहीं दिख रही।
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अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका बिना किसी डील के लौट रहा है और यह स्थिति ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है।
वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसी भी समझौते के लिए यह जरूरी था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की ठोस गारंटी दे, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान उनकी टीम लगातार डोनाल्ड ट्रम्प के संपर्क में थी।
क्यों फंसी बातचीत
सूत्रों के अनुसार वार्ता पांच प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही—परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट, प्रतिबंध हटाना, युद्ध की भरपाई और क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करना। इनमें सबसे बड़ा विवाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर रहा।
ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण को रणनीतिक ताकत मानता है, जबकि अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार के लिए खुला रखना चाहता है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
ईरान का पक्ष
ईरानी अधिकारियों ने भी माना कि बातचीत बेनतीजा रही। उनका कहना है कि अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं और वे देश के हितों के खिलाफ थीं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका वार्ता के जरिए वह हासिल करना चाहता था, जो वह सैन्य कार्रवाई से नहीं कर पाया।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा
इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। वहीं लेबनान में भी हमले जारी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए माइंस हटाने का अभियान शुरू किया है। आरोप है कि ईरान ने रणनीतिक क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
चीन को चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान को हथियार भेजे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत के विफल होने से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। कूटनीतिक प्रयास जारी रहने की संभावना है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच दूरी कम होती नहीं दिख रही।
