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ICMAI ने ‘राइज़ इंडिया लीडरशिप समिट 2026’ का समापन किया, विकसित भारत मिशन के लिए सीएमए की भूमिका पर स्पष्ट रोडमैप
डिजिटल डेस्क
संस्थागत-उद्योग अंतर कम करने, जीसीसी को मजबूत करने और वैल्यू क्रिएशन तेज करने पर जोर
भारत के कॉस्ट अकाउंटेंट्स संस्थान (ICMAI) ने नई दिल्ली में आयोजित ‘राइज़ इंडिया लीडरशिप समिट 2026’ का सफल समापन करते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स (CMA) की भूमिका पर एक स्पष्ट और ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया। समिट में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और वित्त क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारत की आर्थिक प्रगति में रणनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत इस वैधानिक संस्थान ने स्पष्ट किया कि समिट का मुख्य फोकस संस्थानों और उद्योग के बीच मौजूद अंतर को कम करना, वैल्यू क्रिएशन को गति देना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को मजबूत करना रहा, ताकि भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

शांग्री-ला इरोस में आयोजित इस समिट का विषय था – “स्ट्रैटेजिक लीडरशिप फॉर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर – सीएमएज़ ऐज़ आर्किटेक्ट्स ऑफ वैल्यू क्रिएशन एंड कैपेबिलिटी ऑगमेंटेशन”। समिट के दौरान संस्थागत, नियामकीय और संचालन स्तर पर मौजूद चुनौतियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव सामने आए, जो भारत की विकास यात्रा को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
आईसीएमएआई के अध्यक्ष सीएमए टी.सी.ए. श्रीनिवास प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स दक्षता, पारदर्शिता और वैल्यू-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सीएमए नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने में रणनीतिक सक्षमकर्ता के रूप में उभर रहे हैं, विशेष रूप से जीसीसी, डिजिटल फाइनेंस और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
समिट में सांसद बीड़ा मस्तान राव और डी. प्रसादा राव सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के सलाहकार सीएमए आनंद कुमार पाल, सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक सीएमए एल.वी. सुधाकर बाबू, ओएनजीसी के निदेशक (वित्त) विवेक चंद्रकांत टोंगंकर, बीएचईएल के निदेशक (वित्त) सीएमए राजेश कुमार द्विवेदी, एनआईआरसी के चेयरमैन सीएमए राकेश यादव तथा इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के निदेशक (वित्त) सीएमए संजय जिंदल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आईसीएमएआई के नेतृत्व ने भी समिट में सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें उपाध्यक्ष सीएमए नीरज धनंजय जोशी, करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट समिति के चेयरमैन सीएमए विनयरंजन पी, सीएमए बी.बी. नायक, सीएमए मनोज कुमार आनंद, सीएमए राजेंद्र सिंह भाटी, सीएमए नवनीत कुमार जैन, सीएमए चित्रंजन चट्टोपाध्याय, सीएमए अविजीत गोस्वामी सहित काउंसिल सदस्य और सचिव सीएमए डॉ. डी.पी. नंदी शामिल रहे।
समिट में हुई चर्चाओं ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत मिशन को गति देने के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, वित्तीय अनुशासन को सख्ती से लागू करना, लागत प्रतिस्पर्धा में सुधार करना और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना अनिवार्य है। वक्ताओं ने नीति समन्वय को मजबूत करने, कौशल विकास को बढ़ाने और उद्योग-अकादमिक सहयोग को विस्तार देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि कौशल अंतर को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके और भारत का जीसीसी इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर मानक स्थापित कर सके।
यह समिट उच्च-स्तरीय संवाद, सहयोग और ज्ञान साझा करने का एक प्रभावी मंच साबित हुआ, जिसमें सीईओ, सीएफओ, निदेशक, वरिष्ठ कॉर्पोरेट लीडर्स, एचआर प्रोफेशनल्स, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि डेटा-आधारित गवर्नेंस को मजबूत करना, संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना और नियामकीय ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना समय की आवश्यकता है, जिसमें सीएमए की भूमिका निर्णायक है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, एक्सेंचर, एप्पल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड, बीएचईएल, एनएसआईसी, आरईसी लिमिटेड, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, क्रीभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, एचसीएल, सैमसंग, ऑरेंज बिजनेस और टीपीएम कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लचीले और भविष्य के लिए तैयार संगठनों के निर्माण पर अपने विचार रखे।
समिट का समापन इस ठोस सहमति के साथ हुआ कि आईसीएमएआई और अन्य हितधारक मिलकर संस्थागत ढांचे को और मजबूत करेंगे, प्रणालीगत अंतर को दूर करेंगे और भारत की आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करेंगे, जिससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
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भारत के कॉस्ट अकाउंटेंट्स संस्थान (ICMAI) ने नई दिल्ली में आयोजित ‘राइज़ इंडिया लीडरशिप समिट 2026’ का सफल समापन करते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स (CMA) की भूमिका पर एक स्पष्ट और ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया। समिट में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और वित्त क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भाग लिया और भारत की आर्थिक प्रगति में रणनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत इस वैधानिक संस्थान ने स्पष्ट किया कि समिट का मुख्य फोकस संस्थानों और उद्योग के बीच मौजूद अंतर को कम करना, वैल्यू क्रिएशन को गति देना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को मजबूत करना रहा, ताकि भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

शांग्री-ला इरोस में आयोजित इस समिट का विषय था – “स्ट्रैटेजिक लीडरशिप फॉर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर – सीएमएज़ ऐज़ आर्किटेक्ट्स ऑफ वैल्यू क्रिएशन एंड कैपेबिलिटी ऑगमेंटेशन”। समिट के दौरान संस्थागत, नियामकीय और संचालन स्तर पर मौजूद चुनौतियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव सामने आए, जो भारत की विकास यात्रा को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
आईसीएमएआई के अध्यक्ष सीएमए टी.सी.ए. श्रीनिवास प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स दक्षता, पारदर्शिता और वैल्यू-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सीएमए नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने में रणनीतिक सक्षमकर्ता के रूप में उभर रहे हैं, विशेष रूप से जीसीसी, डिजिटल फाइनेंस और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
समिट में सांसद बीड़ा मस्तान राव और डी. प्रसादा राव सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के सलाहकार सीएमए आनंद कुमार पाल, सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक सीएमए एल.वी. सुधाकर बाबू, ओएनजीसी के निदेशक (वित्त) विवेक चंद्रकांत टोंगंकर, बीएचईएल के निदेशक (वित्त) सीएमए राजेश कुमार द्विवेदी, एनआईआरसी के चेयरमैन सीएमए राकेश यादव तथा इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के निदेशक (वित्त) सीएमए संजय जिंदल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आईसीएमएआई के नेतृत्व ने भी समिट में सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें उपाध्यक्ष सीएमए नीरज धनंजय जोशी, करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट समिति के चेयरमैन सीएमए विनयरंजन पी, सीएमए बी.बी. नायक, सीएमए मनोज कुमार आनंद, सीएमए राजेंद्र सिंह भाटी, सीएमए नवनीत कुमार जैन, सीएमए चित्रंजन चट्टोपाध्याय, सीएमए अविजीत गोस्वामी सहित काउंसिल सदस्य और सचिव सीएमए डॉ. डी.पी. नंदी शामिल रहे।
समिट में हुई चर्चाओं ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत मिशन को गति देने के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, वित्तीय अनुशासन को सख्ती से लागू करना, लागत प्रतिस्पर्धा में सुधार करना और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना अनिवार्य है। वक्ताओं ने नीति समन्वय को मजबूत करने, कौशल विकास को बढ़ाने और उद्योग-अकादमिक सहयोग को विस्तार देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि कौशल अंतर को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके और भारत का जीसीसी इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर मानक स्थापित कर सके।
यह समिट उच्च-स्तरीय संवाद, सहयोग और ज्ञान साझा करने का एक प्रभावी मंच साबित हुआ, जिसमें सीईओ, सीएफओ, निदेशक, वरिष्ठ कॉर्पोरेट लीडर्स, एचआर प्रोफेशनल्स, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। चर्चाओं में यह भी रेखांकित किया गया कि डेटा-आधारित गवर्नेंस को मजबूत करना, संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना और नियामकीय ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना समय की आवश्यकता है, जिसमें सीएमए की भूमिका निर्णायक है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, एक्सेंचर, एप्पल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड, बीएचईएल, एनएसआईसी, आरईसी लिमिटेड, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, क्रीभको ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, एचसीएल, सैमसंग, ऑरेंज बिजनेस और टीपीएम कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लचीले और भविष्य के लिए तैयार संगठनों के निर्माण पर अपने विचार रखे।
समिट का समापन इस ठोस सहमति के साथ हुआ कि आईसीएमएआई और अन्य हितधारक मिलकर संस्थागत ढांचे को और मजबूत करेंगे, प्रणालीगत अंतर को दूर करेंगे और भारत की आर्थिक क्षमता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में समन्वित प्रयास करेंगे, जिससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
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