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Global Energy Crisis: जंग के बीच कच्चा तेल 146 डॉलर पहुंचा, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होने के संकेत
बिजनेस न्यूज
ईरान हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, भारत में ईंधन कीमतों पर बढ़ा दबाव
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो घरेलू स्तर पर ईंधन 10 से 15 रुपये तक महंगा हो सकता है।
क्या हुआ और क्यों बढ़े दाम
ईरान के ताजा ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान एलएनजी प्लांट को नुकसान पहुंचा है, जो वैश्विक गैस आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। इसके बंद होने से सप्लाई बाधित हुई है। साथ ही, फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ भी असुरक्षित हो गया है, जिससे तेल परिवहन पर असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% पेट्रोलियम सप्लाई के लिए अहम माना जाता है।
वैश्विक बाजार पर असर
हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और अन्य प्रमुख बेंचमार्क की कीमतों में तेजी आई है। यूरोप में डच TTF गैस बेंचमार्क करीब 30% तक उछल गया, जबकि ब्रिटेन में थोक गैस कीमतें 140% तक बढ़ चुकी हैं। ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा दरों पर ईंधन बेचना मुश्किल हो जाएगा। इससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
कच्चा तेल सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक, उर्वरक, दवाइयों और कई औद्योगिक उत्पादों का आधार है। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
सरकार और बाजार की प्रतिक्रिया
पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिलहाल देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बताया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों तक हालात सामान्य नहीं हुए, तो कीमतों में बढ़ोतरी से बचना मुश्किल होगा। बाजार विशेषज्ञ इसे अल्पकालिक झटका मान रहे हैं, लेकिन लंबी अवधि में इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं।
अब वैश्विक बाजार की नजर खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और आपूर्ति बहाल होने पर टिकी है। यदि तनाव कम होता है, तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है, अन्यथा ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
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Global Energy Crisis: जंग के बीच कच्चा तेल 146 डॉलर पहुंचा, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होने के संकेत
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खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो घरेलू स्तर पर ईंधन 10 से 15 रुपये तक महंगा हो सकता है।
क्या हुआ और क्यों बढ़े दाम
ईरान के ताजा ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान एलएनजी प्लांट को नुकसान पहुंचा है, जो वैश्विक गैस आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। इसके बंद होने से सप्लाई बाधित हुई है। साथ ही, फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ भी असुरक्षित हो गया है, जिससे तेल परिवहन पर असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% पेट्रोलियम सप्लाई के लिए अहम माना जाता है।
वैश्विक बाजार पर असर
हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और अन्य प्रमुख बेंचमार्क की कीमतों में तेजी आई है। यूरोप में डच TTF गैस बेंचमार्क करीब 30% तक उछल गया, जबकि ब्रिटेन में थोक गैस कीमतें 140% तक बढ़ चुकी हैं। ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा दरों पर ईंधन बेचना मुश्किल हो जाएगा। इससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
कच्चा तेल सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक, उर्वरक, दवाइयों और कई औद्योगिक उत्पादों का आधार है। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
सरकार और बाजार की प्रतिक्रिया
पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिलहाल देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बताया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों तक हालात सामान्य नहीं हुए, तो कीमतों में बढ़ोतरी से बचना मुश्किल होगा। बाजार विशेषज्ञ इसे अल्पकालिक झटका मान रहे हैं, लेकिन लंबी अवधि में इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं।
अब वैश्विक बाजार की नजर खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और आपूर्ति बहाल होने पर टिकी है। यदि तनाव कम होता है, तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है, अन्यथा ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
