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हेल्थ इंश्योरेंस के नए नियम: इलाज के लिए 1 घंटे में प्री-ऑथराइजेशन, 3 घंटे में फाइनल क्लेम
बिजनेस न्यूज
IRDAI ने कैशलेस क्लेम के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ तय किया, मरीजों को अब लंबे इंतजार से राहत
हेल्थ इंश्योरेंसधारक अब अस्पताल में इलाज या छुट्टी के लिए लंबा इंतजार नहीं करेंगे। बीमा नियामक IRDAI ने नए नियम बनाए हैं। इसके तहत अस्पतालों को कैशलेस क्लेम की प्री-ऑथराइजेशन मंजूरी एक घंटे में और फाइनल मंजूरी तीन घंटे में देनी होगी।
फाइनेंस मंत्रालय का कहना है कि इसका मकसद मरीजों को समय पर इलाज मिलना सुनिश्चित करना और अस्पताल में होने वाली देरी को खत्म करना है। इसे हेल्थ सेक्टर में “गोल्डन ऑवर नियम” कहा जा रहा है।
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर की स्थिति
वित्त वर्ष 2024-25 में हेल्थ इंश्योरेंस में लगभग 9% की वृद्धि हुई।
कुल प्रीमियम अब 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
मांग बढ़ने के पीछे मुख्य कारण हैं: स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, बेहतर फाइनेंसिंग और महंगे इलाज से सुरक्षा की जरूरत।
क्लेम और शिकायतें
IRDAI के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025 में हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी कुल 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं।
इनमें से 93% का समाधान उसी वर्ष में किया गया।
हालांकि, कुछ क्लेम अभी भी रिजेक्ट होते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं पॉलिसी की शर्तें जैसे को-पेमेंट, सब-लिमिट्स, रूम रेंट कैप और नॉन-मेडिकल खर्च।
प्रीमियम बढ़ने के कारण
पॉलिसीधारक की उम्र बढ़ने के कारण रिस्क अधिक।
गंभीर बीमारियों के लिए अधिक इंश्योरेंस राशि।
नई पॉलिसियों में ओपीडी और वेलनेस फीचर्स शामिल।
खास बातें
अस्पताल में भर्ती होने पर प्री-ऑथराइजेशन 1 घंटे में
डिस्चार्ज के समय फाइनल मंजूरी 3 घंटे में
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर लगातार बढ़ रहा है
पॉलिसी लेने से पहले शर्तें ध्यान से पढ़ें
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हेल्थ इंश्योरेंस के नए नियम: इलाज के लिए 1 घंटे में प्री-ऑथराइजेशन, 3 घंटे में फाइनल क्लेम
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हेल्थ इंश्योरेंसधारक अब अस्पताल में इलाज या छुट्टी के लिए लंबा इंतजार नहीं करेंगे। बीमा नियामक IRDAI ने नए नियम बनाए हैं। इसके तहत अस्पतालों को कैशलेस क्लेम की प्री-ऑथराइजेशन मंजूरी एक घंटे में और फाइनल मंजूरी तीन घंटे में देनी होगी।
फाइनेंस मंत्रालय का कहना है कि इसका मकसद मरीजों को समय पर इलाज मिलना सुनिश्चित करना और अस्पताल में होने वाली देरी को खत्म करना है। इसे हेल्थ सेक्टर में “गोल्डन ऑवर नियम” कहा जा रहा है।
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर की स्थिति
वित्त वर्ष 2024-25 में हेल्थ इंश्योरेंस में लगभग 9% की वृद्धि हुई।
कुल प्रीमियम अब 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
मांग बढ़ने के पीछे मुख्य कारण हैं: स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, बेहतर फाइनेंसिंग और महंगे इलाज से सुरक्षा की जरूरत।
क्लेम और शिकायतें
IRDAI के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025 में हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी कुल 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं।
इनमें से 93% का समाधान उसी वर्ष में किया गया।
हालांकि, कुछ क्लेम अभी भी रिजेक्ट होते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं पॉलिसी की शर्तें जैसे को-पेमेंट, सब-लिमिट्स, रूम रेंट कैप और नॉन-मेडिकल खर्च।
प्रीमियम बढ़ने के कारण
पॉलिसीधारक की उम्र बढ़ने के कारण रिस्क अधिक।
गंभीर बीमारियों के लिए अधिक इंश्योरेंस राशि।
नई पॉलिसियों में ओपीडी और वेलनेस फीचर्स शामिल।
खास बातें
अस्पताल में भर्ती होने पर प्री-ऑथराइजेशन 1 घंटे में
डिस्चार्ज के समय फाइनल मंजूरी 3 घंटे में
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर लगातार बढ़ रहा है
पॉलिसी लेने से पहले शर्तें ध्यान से पढ़ें
