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ईरान जंग पर प्रधानमंत्री मोदी आज मुख्यमंत्रियों से करेंगे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, राज्यों से सहयोग की अपील
बिजनेस न्यूज
पेट्रोल-डीजल-एलपीजी की कमी की अफवाहों को सरकार ने बताया प्रोपेगैंडा, आने वाला समय कोरोनाकाल जैसी परीक्षा लेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। बैठक का प्रमुख एजेंडा ईरान जंग के बाद बिगड़े हालात और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति होगा। चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा में कहा था कि यदि ईरान और इजराइल के बीच जंग जारी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाला समय कोरोना जैसी परीक्षा वाला होगा और इसके लिए केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।
ईरान जंग को लेकर 22 मार्च को मोदी ने अपने आवास पर हाई-लेवल मीटिंग की थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट किया कि भारत किसी के लिए मध्यस्थ नहीं बनेगा और पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मध्य पूर्व की स्थिति पर दो घंटे की बैठक भी हुई थी।
सरकार ने आज देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज कर दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि भारत के पास 60 दिनों का पेट्रोल और डीजल भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही किल्लत की खबरें प्रोपेगैंडा हैं और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ईरान जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित है। भारत अपनी कच्ची तेल की 50% और LNG की 54% आपूर्ति इसी मार्ग से करता है। ध्यान रहे कि विश्व की कुल पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
इस बीच सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए लॉक-इन पीरियड बढ़ाया है। 6 मार्च को घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड शुरू हुआ था, जिसे बाद में 25 और 45 दिन तक बढ़ा दिया गया। साथ ही, PNG कनेक्शन वालों के लिए सिलेंडर रखना अब गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर किसी भी हमले को मंजूरी नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तनाव खत्म होना चाहिए और बातचीत से ही समस्या का समाधान संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जंग के असर से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर नजर रखी जा रही है और केंद्र-राज्य मिलकर इससे निपटने की तैयारी कर रहे हैं।
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ईरान जंग पर प्रधानमंत्री मोदी आज मुख्यमंत्रियों से करेंगे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, राज्यों से सहयोग की अपील
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। बैठक का प्रमुख एजेंडा ईरान जंग के बाद बिगड़े हालात और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति होगा। चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा में कहा था कि यदि ईरान और इजराइल के बीच जंग जारी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाला समय कोरोना जैसी परीक्षा वाला होगा और इसके लिए केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।
ईरान जंग को लेकर 22 मार्च को मोदी ने अपने आवास पर हाई-लेवल मीटिंग की थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट किया कि भारत किसी के लिए मध्यस्थ नहीं बनेगा और पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मध्य पूर्व की स्थिति पर दो घंटे की बैठक भी हुई थी।
सरकार ने आज देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज कर दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि भारत के पास 60 दिनों का पेट्रोल और डीजल भंडार है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही किल्लत की खबरें प्रोपेगैंडा हैं और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ईरान जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित है। भारत अपनी कच्ची तेल की 50% और LNG की 54% आपूर्ति इसी मार्ग से करता है। ध्यान रहे कि विश्व की कुल पेट्रोलियम सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
इस बीच सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए लॉक-इन पीरियड बढ़ाया है। 6 मार्च को घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड शुरू हुआ था, जिसे बाद में 25 और 45 दिन तक बढ़ा दिया गया। साथ ही, PNG कनेक्शन वालों के लिए सिलेंडर रखना अब गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर किसी भी हमले को मंजूरी नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तनाव खत्म होना चाहिए और बातचीत से ही समस्या का समाधान संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जंग के असर से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर नजर रखी जा रही है और केंद्र-राज्य मिलकर इससे निपटने की तैयारी कर रहे हैं।
