पेट्रोल-डीजल पर 10-10 एक्साइज ड्यूटी कटौती, कीमतों में बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक

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कच्चे तेल की तेजी के बीच सरकार का बड़ा फैसला, तेल कंपनियों को राहत और उपभोक्ताओं को आंशिक सुरक्षा

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए प्रति लीटर की बड़ी कटौती की है। इस फैसले के तहत पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर लगने वाली ₹10 की एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और घरेलू स्तर पर ईंधन महंगा होने की आशंका बनी हुई थी।

सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करना और उपभोक्ताओं को अचानक कीमतों में बढ़ोतरी से बचाना है। पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कटौती सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने के बजाय एक ‘बफर’ का काम करेगी। यानी, कीमतों में तुरंत कमी देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन संभावित बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। तेल कंपनियां इस राहत का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए कर सकती हैं।

वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर भारी नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में यदि यह कटौती नहीं होती, तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती थीं। निजी कंपनियों ने पहले ही दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं, जिससे बाजार पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

इस फैसले का असर सरकार के राजस्व पर भी पड़ेगा। एक्साइज ड्यूटी कम होने से केंद्र की आय घटेगी, लेकिन सरकार ने यह कदम आम जनता को महंगाई के असर से बचाने के लिए उठाया है।

अब नजर राज्य सरकारों पर है। यदि राज्य अपने स्तर पर वैट (VAT) में भी कटौती करते हैं, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर वास्तविक राहत मिल सकती है। फिलहाल, यह निर्णय बाजार को स्थिर करने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में ईंधन की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह पूरी तरह कच्चे तेल के दाम और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा। अगर तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है।

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27 Mar 2026 By ANKITA

पेट्रोल-डीजल पर 10-10 एक्साइज ड्यूटी कटौती, कीमतों में बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक

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केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए प्रति लीटर की बड़ी कटौती की है। इस फैसले के तहत पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर लगने वाली ₹10 की एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और घरेलू स्तर पर ईंधन महंगा होने की आशंका बनी हुई थी।

सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करना और उपभोक्ताओं को अचानक कीमतों में बढ़ोतरी से बचाना है। पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कटौती सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने के बजाय एक ‘बफर’ का काम करेगी। यानी, कीमतों में तुरंत कमी देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन संभावित बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। तेल कंपनियां इस राहत का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए कर सकती हैं।

वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर भारी नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में यदि यह कटौती नहीं होती, तो कंपनियां कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती थीं। निजी कंपनियों ने पहले ही दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं, जिससे बाजार पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

इस फैसले का असर सरकार के राजस्व पर भी पड़ेगा। एक्साइज ड्यूटी कम होने से केंद्र की आय घटेगी, लेकिन सरकार ने यह कदम आम जनता को महंगाई के असर से बचाने के लिए उठाया है।

अब नजर राज्य सरकारों पर है। यदि राज्य अपने स्तर पर वैट (VAT) में भी कटौती करते हैं, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर वास्तविक राहत मिल सकती है। फिलहाल, यह निर्णय बाजार को स्थिर करने और महंगाई पर नियंत्रण रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में ईंधन की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह पूरी तरह कच्चे तेल के दाम और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा। अगर तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतों पर फिर दबाव बन सकता है।

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