होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे, नए रास्तों से तेल आयात बढ़ाया

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तेल सप्लाई पर सरकार का बड़ा फैसला, नए रूट से आयात बढ़ा; कीमतें स्थिर रहेंगी

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कच्चे तेल के आयात के वैकल्पिक मार्गों को मजबूत किया गया है।

सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपने आयात स्रोतों और मार्गों में बदलाव किया है, जिससे सप्लाई चेन पर संभावित असर को कम किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग में बाधा आने के बाद भारत ने अन्य समुद्री रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की है। पहले देश अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत कच्चा तेल ऐसे मार्गों से मंगाता था जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते थे, अब इसे बढ़ाकर लगभग 70 प्रतिशत कर दिया गया है।

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो 40 से अधिक देशों से आता है। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आयात स्रोतों का यह विविधीकरण किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के समय सप्लाई को बनाए रखने में मदद करता है।

वर्तमान स्थिति की पृष्ठभूमि में ईरान द्वारा होर्मुज मार्ग को ब्लॉक करने की खबरें सामने आई हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। भारत भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता रहा है।

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, हालिया समीक्षा बैठकों में यह पाया गया है कि देश में ऊर्जा भंडार की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर है। तेल और गैस के स्टॉक में सुधार से सरकार का भरोसा बढ़ा है कि मौजूदा संकट का असर घरेलू बाजार पर सीमित रहेगा।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत एक सप्ताह में करीब 27 प्रतिशत बढ़कर लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष, विशेष रूप से ईरान और इजराइल के बीच तनाव, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है।

सरकारी सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने पर होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सकती है। इसके अलावा कई अन्य देशों ने भी भारत को तेल और एलएनजी की सप्लाई बढ़ाने में रुचि दिखाई है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आयात मार्गों और स्रोतों में विविधता लाने की नीति लंबे समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है। फिलहाल सरकार का दावा है कि देश में ईंधन की सप्लाई पर्याप्त है और उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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