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दिल्ली में महसूस हुए भूंकप के झटके, डर से घर के बाहर निकले लोग, जानिए क्यों आते हैं भूकंप
Digital Desk
Delhi-NCR Earthquake Update: हरियाणा के रेवाड़ी में 2.8 तीव्रता का भूकंप, सुबह 7:01 बजे महसूस हुए झटके। जानिए भूकंप का कारण और भारत के भूकंप जोन।
राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र हरियाणा के रेवाड़ी में बताया गया है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 दर्ज की गई। भूकंप की गहराई जमीन से करीब 5 किलोमीटर बताई जा रही है।
हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में लोगों ने हल्के झटके महसूस किए। सुबह के समय अधिकांश लोग घरों में थे, जिससे कुछ लोगों में हल्की घबराहट भी देखी गई।
Delhi-NCR Earthquake: क्यों महसूस होते हैं झटके?
भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आता है, जिसे उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। इस वजह से यहां समय-समय पर हल्के भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।
भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि होती है। पृथ्वी की सतह कई बड़ी प्लेट्स में बंटी हुई है, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या दबाव बनता है, तो ऊर्जा निकलती है और धरती में कंपन होता है, जिसे भूकंप कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में भूकंप का खतरा इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिसके कारण हिमालय क्षेत्र और उसके आसपास के इलाके ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं।
भारत में भूकंप के जोन
भूगर्भ वैज्ञानिकों ने भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर चार जोन में बांटा है। इनमें शामिल हैं:
- जोन-2: कम जोखिम वाला क्षेत्र
- जोन-3: मध्यम जोखिम वाला क्षेत्र
- जोन-4: उच्च जोखिम वाला क्षेत्र
- जोन-5: सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र
भारत के करीब 59 प्रतिशत भूभाग को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत और गुजरात का कच्छ इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।
रिक्टर स्केल क्या बताता है?
भूकंप की ताकत को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग तीव्रता के भूकंप का असर भी अलग होता है:
- 4.0–4.9: घरों में रखा सामान हिल सकता है या गिर सकता है
- 5.0–5.9: भारी फर्नीचर भी हिल सकता है
- 6.0–6.9: इमारतों में दरारें आ सकती हैं
- 7.0–7.9: इमारतें गिरने का खतरा
- 8.0 से ऊपर: बड़े पैमाने पर तबाही और सुनामी का खतरा
आज रेवाड़ी में आया 2.8 तीव्रता का भूकंप काफी हल्का था, इसलिए किसी नुकसान की खबर नहीं है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
हाल के महीनों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं देखने को मिली हैं। ऐसे में वैज्ञानिक लगातार भूगर्भीय गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूकंप के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञ भूकंप-रोधी निर्माण और जागरूकता पर जोर दे रहे हैं।
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