मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। 6 मार्च को कारोबार के अंत में प्रमुख इंडेक्स डाउ जोंस 453 अंक टूटकर 47,501 के स्तर पर बंद हुआ। तेल की कीमतों में तेजी, कमजोर रोजगार आंकड़ों और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।
प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट
कारोबार के दौरान टेक्नोलॉजी शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। टेक आधारित इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 361 अंक यानी करीब 1.59 प्रतिशत गिरकर 22,387 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला S&P 500 इंडेक्स 90 अंक की गिरावट के साथ 6,740 पर आ गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेज उछाल के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। कुछ समय के लिए कीमतें 91 डॉलर से ऊपर भी चली गईं, जो अप्रैल 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है।
तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
रोजगार आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका के श्रम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने रोजगार वृद्धि उम्मीद से कम रही। गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटने और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत तक पहुंचने से आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर श्रम बाजार आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का संकेत दे सकता है।
स्टैगफ्लेशन की आशंका
बाजार में एक और चिंता ‘स्टैगफ्लेशन’ को लेकर है। यह ऐसी स्थिति होती है जब आर्थिक विकास धीमा पड़ जाए लेकिन महंगाई बढ़ती रहे। बढ़ती तेल कीमतें और कमजोर रोजगार आंकड़े इस आशंका को और मजबूत कर रहे हैं।
ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
निवेशकों को पहले उम्मीद थी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस वर्ष कई बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। लेकिन महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण अब दरों में कटौती सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर शेयर बाजार के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
एशियाई बाजारों में अलग रुख
जहां अमेरिकी बाजार दबाव में रहे, वहीं कुछ एशियाई बाजारों में हल्की मजबूती देखी गई। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।
भारतीय बाजार भी दबाव में
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक गिरकर 78,919 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,450 के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव और महंगाई की आशंका बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ जाती है।
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