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शेयर बाजार में चौथे दिन भी बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा
Digital Desk
सरकारी बैंक और FMCG सेक्टर में भारी कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार पर बढ़ा दबाव
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। घरेलू इक्विटी बाजार में लगातार चौथे सत्र गिरावट का सिलसिला जारी रहा और प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 508 अंक टूटकर 74,267 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 165 अंक फिसलकर 23,382 पर आ गया। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में बिकवाली का माहौल हावी रहा।
कारोबार के शुरुआती घंटों में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव तेज होता गया। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से 1100 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतिम घंटों में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार लाल निशान में ही बंद हुआ।
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंकिंग शेयरों और एफएमसीजी कंपनियों में देखने को मिला। निवेशकों ने इन सेक्टर्स में मुनाफावसूली की, जिससे कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित रणनीति अपनाते हुए कुछ सेक्टर्स में बिकवाली की है।
सरकारी बैंकिंग शेयरों पर दबाव का बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली माना जा रहा है। पिछले एक महीने के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी निकासी की है। इस वजह से बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव बना हुआ है। एफएमसीजी सेक्टर में कमजोरी के पीछे उपभोग आधारित कंपनियों की धीमी ग्रोथ को लेकर चिंताएं बताई जा रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि महंगाई और ग्रामीण मांग में सुस्ती का असर उपभोक्ता कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच एशियाई बाजारों से मिश्रित संकेत मिले। दक्षिण कोरिया के बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली, जहां प्रमुख सूचकांक में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। जापान और हांगकांग के बाजार भी सकारात्मक दायरे में बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इसका खास असर नहीं दिखा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी हरे निशान में बंद हुए थे। आमतौर पर अमेरिकी बाजारों की मजबूती भारतीय बाजार को समर्थन देती है, लेकिन इस बार घरेलू कारकों ने वैश्विक सकारात्मक संकेतों को पीछे छोड़ दिया। भारतीय बाजार इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। विदेशी पूंजी की निकासी, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। पिछले 30 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की है। इससे बाजार में नकदी प्रवाह कमजोर हुआ है और सेंटीमेंट पर असर पड़ा है।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन विदेशी बिकवाली के दबाव के सामने यह समर्थन पर्याप्त साबित नहीं हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स एक हजार अंक से ज्यादा टूट गया था। लगातार चौथे दिन कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए निकट भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल अहम होंगे। यदि बाजार इन स्तरों को बनाए रखने में सफल रहता है तो रिकवरी की संभावना बन सकती है, लेकिन दबाव बढ़ने पर और गिरावट देखने को मिल सकती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी बनी रही, लेकिन व्यापक बाजार धारणा कमजोर रही। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू कॉर्पोरेट अपडेट बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं।
बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब आगामी आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट सेक्टर से आने वाले संकेतों पर टिकी हुई है। ट्रेडिंग सत्र के दौरान अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रह सकता है।
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शेयर बाजार में चौथे दिन भी बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा
Digital Desk
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। घरेलू इक्विटी बाजार में लगातार चौथे सत्र गिरावट का सिलसिला जारी रहा और प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 508 अंक टूटकर 74,267 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 165 अंक फिसलकर 23,382 पर आ गया। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में बिकवाली का माहौल हावी रहा।
कारोबार के शुरुआती घंटों में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव तेज होता गया। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से 1100 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतिम घंटों में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार लाल निशान में ही बंद हुआ।
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंकिंग शेयरों और एफएमसीजी कंपनियों में देखने को मिला। निवेशकों ने इन सेक्टर्स में मुनाफावसूली की, जिससे कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित रणनीति अपनाते हुए कुछ सेक्टर्स में बिकवाली की है।
सरकारी बैंकिंग शेयरों पर दबाव का बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली माना जा रहा है। पिछले एक महीने के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी निकासी की है। इस वजह से बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव बना हुआ है। एफएमसीजी सेक्टर में कमजोरी के पीछे उपभोग आधारित कंपनियों की धीमी ग्रोथ को लेकर चिंताएं बताई जा रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि महंगाई और ग्रामीण मांग में सुस्ती का असर उपभोक्ता कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच एशियाई बाजारों से मिश्रित संकेत मिले। दक्षिण कोरिया के बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली, जहां प्रमुख सूचकांक में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। जापान और हांगकांग के बाजार भी सकारात्मक दायरे में बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इसका खास असर नहीं दिखा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी हरे निशान में बंद हुए थे। आमतौर पर अमेरिकी बाजारों की मजबूती भारतीय बाजार को समर्थन देती है, लेकिन इस बार घरेलू कारकों ने वैश्विक सकारात्मक संकेतों को पीछे छोड़ दिया। भारतीय बाजार इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। विदेशी पूंजी की निकासी, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। पिछले 30 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की है। इससे बाजार में नकदी प्रवाह कमजोर हुआ है और सेंटीमेंट पर असर पड़ा है।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन विदेशी बिकवाली के दबाव के सामने यह समर्थन पर्याप्त साबित नहीं हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स एक हजार अंक से ज्यादा टूट गया था। लगातार चौथे दिन कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए निकट भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल अहम होंगे। यदि बाजार इन स्तरों को बनाए रखने में सफल रहता है तो रिकवरी की संभावना बन सकती है, लेकिन दबाव बढ़ने पर और गिरावट देखने को मिल सकती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी बनी रही, लेकिन व्यापक बाजार धारणा कमजोर रही। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू कॉर्पोरेट अपडेट बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं।
बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब आगामी आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट सेक्टर से आने वाले संकेतों पर टिकी हुई है। ट्रेडिंग सत्र के दौरान अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रह सकता है।
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