NEET पेपर लीक जांच में नया खुलासा, CBI ने पुणे के शिक्षक की भूमिका पर उठाए सवाल

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तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा परीक्षा के प्रारूप पर स्पष्ट किया रुख

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से जुड़े पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच के दौरान एक अहम खुलासा करते हुए कहा है कि पुणे स्थित एक मेडिकल कोचिंग संस्थान से जुड़े एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एजेंसी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र की अवैध पहुंच उपलब्ध कराने में इस शिक्षक की सक्रिय भागीदारी रही।

जांच एजेंसी ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में बताया कि पुणे के एक मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान में फिजिक्स पढ़ाने वाले शिक्षक ने कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र को एक अन्य आरोपी तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन से जो दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले, वे जांच को नई दिशा दे रहे हैं।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें आगामी 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी केवल सीमित स्तर पर शामिल नहीं थे, बल्कि वे कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे जो परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था।

CBI ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में गिरफ्तार एक चिकित्सक की भूमिका आर्थिक लेन-देन से जुड़ी हुई है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन के ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के एवज में मोटी रकम का आदान-प्रदान हुआ। अधिकारियों ने अदालत को यह भी बताया कि संदिग्ध रकम की बरामदगी जांच को और मजबूत बना रही है।

पूरे घटनाक्रम ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर पहले से ही बनी संवेदनशीलता के बीच पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की साख को भी प्रभावित करती हैं।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट में NEET पुनर्परीक्षा के स्वरूप को लेकर सुनवाई भी हुई। अदालत ने पुनर्परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने की मांग को स्वीकार नहीं किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनर्परीक्षा उसी पारंपरिक पेन-पेपर प्रणाली में आयोजित की जाएगी, जिसमें मूल परीक्षा आयोजित की गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित हो सकती है और इससे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम होगी। हालांकि अदालत ने इस मांग पर सहमति नहीं जताई और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में अचानक बड़ा बदलाव करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।

न्यायालय की पीठ ने परीक्षा संचालन एजेंसियों की तैयारियों और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह रुख अपनाया। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करना आवश्यक होगा।

NEET परीक्षा देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही हैं।

जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, कॉल डिटेल्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

शिक्षा जगत में इस पूरे प्रकरण को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन में तकनीकी निगरानी, एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसमिशन और मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है।

छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। कई संगठनों का कहना है कि परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक नीति बनाना अब जरूरी हो गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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01 Jun 2026 By priyanka

NEET पेपर लीक जांच में नया खुलासा, CBI ने पुणे के शिक्षक की भूमिका पर उठाए सवाल

भारत

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से जुड़े पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच के दौरान एक अहम खुलासा करते हुए कहा है कि पुणे स्थित एक मेडिकल कोचिंग संस्थान से जुड़े एक शिक्षक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एजेंसी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र की अवैध पहुंच उपलब्ध कराने में इस शिक्षक की सक्रिय भागीदारी रही।

जांच एजेंसी ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में बताया कि पुणे के एक मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान में फिजिक्स पढ़ाने वाले शिक्षक ने कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र को एक अन्य आरोपी तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन से जो दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले, वे जांच को नई दिशा दे रहे हैं।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें आगामी 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी केवल सीमित स्तर पर शामिल नहीं थे, बल्कि वे कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे जो परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था।

CBI ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में गिरफ्तार एक चिकित्सक की भूमिका आर्थिक लेन-देन से जुड़ी हुई है। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन के ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के एवज में मोटी रकम का आदान-प्रदान हुआ। अधिकारियों ने अदालत को यह भी बताया कि संदिग्ध रकम की बरामदगी जांच को और मजबूत बना रही है।

पूरे घटनाक्रम ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर पहले से ही बनी संवेदनशीलता के बीच पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की साख को भी प्रभावित करती हैं।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट में NEET पुनर्परीक्षा के स्वरूप को लेकर सुनवाई भी हुई। अदालत ने पुनर्परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने की मांग को स्वीकार नहीं किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनर्परीक्षा उसी पारंपरिक पेन-पेपर प्रणाली में आयोजित की जाएगी, जिसमें मूल परीक्षा आयोजित की गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित हो सकती है और इससे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम होगी। हालांकि अदालत ने इस मांग पर सहमति नहीं जताई और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में अचानक बड़ा बदलाव करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।

न्यायालय की पीठ ने परीक्षा संचालन एजेंसियों की तैयारियों और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह रुख अपनाया। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करना आवश्यक होगा।

NEET परीक्षा देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही हैं।

जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, कॉल डिटेल्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

शिक्षा जगत में इस पूरे प्रकरण को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन में तकनीकी निगरानी, एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसमिशन और मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है।

छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। कई संगठनों का कहना है कि परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक नीति बनाना अब जरूरी हो गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-revelation-in-neet-paper-leak-investigation-cbi-raised-questions/article-54683

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