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टाटा संस के नए चेयरमैन की रेस में TV नरेंद्रन का नाम सबसे आगे
Digital Desk
चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक पद पर रहेंगे, उत्तराधिकारी चुनने के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू; टाटा स्टील MD नरेंद्रन मजबूत दावेदारों में
टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने साफ किया है कि वे मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है, यानी वे तत्काल पद नहीं छोड़ रहे हैं। इसी बीच नए चेयरमैन की तलाश को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है। 13 अगस्त को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने उत्तराधिकारी की सिफारिश करने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी गठित करने का प्रस्ताव मंजूर किया। अब इस कमेटी के गठन और आगे उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा का रास्ता खुल गया है। इस पूरी कवायद में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टी.वी. नरेंद्रन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
नरेंद्रन लंबे समय से टाटा समूह का हिस्सा हैं और टाटा स्टील में उनका पूरा प्रोफेशनल करियर बीता है। वह 1988 में टाटा स्टील से जुड़े थे और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए कंपनी के शीर्ष प्रबंधन तक पहुंचे। मौजूदा समय में वह टाटा स्टील के MD और CEO हैं। कंपनी से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड में भी नरेंद्रन को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर दर्ज किया गया है। टाटा संस की कमान किसे मिलेगी, यह फैसला अभी हुआ नहीं है और नरेंद्रन का नाम फिलहाल संभावित दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है। लेकिन समूह के अंदर लंबे अनुभव और बड़े औद्योगिक कारोबार को संभालने की वजह से उनका नाम गंभीरता से लिया जा रहा है। कारोबारी रिपोर्टों में भी उनके नाम को उत्तराधिकार की चर्चा में प्रमुखता मिली है।
नरेंद्रन के पक्ष में सबसे बड़ी बात उनका टाटा स्टील में लंबा अनुभव माना जा रहा है। उन्होंने ऐसे समय में कंपनी का नेतृत्व किया जब स्टील कारोबार को वैश्विक बाजार की अनिश्चितता, कर्ज और यूरोपीय कारोबार से जुड़ी मुश्किल परिस्थितियों से जूझना पड़ा। टाटा स्टील के यूरोप कारोबार में लंबे समय से पुनर्गठन और लागत घटाने जैसे फैसले होते रहे हैं। भारत में कंपनी की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ विदेशी कारोबार को लेकर कठिन फैसलों में भी नरेंद्रन की भूमिका रही है। यही अनुभव टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस भूमिका में सिर्फ एक कंपनी का संचालन नहीं बल्कि पूरे समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच रणनीतिक तालमेल देखना होता है।
टाटा समूह में TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। नरेंद्रन का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने करीब चार दशक टाटा समूह के भीतर बिताए हैं। टाटा संस के अगले प्रमुख के सामने बड़े निवेश, नई तकनीक, वैश्विक विस्तार और समूह की अलग-अलग कंपनियों की रणनीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। उत्तराधिकारी चयन की प्रक्रिया हालांकि पूरी तरह सीधी नहीं है। टाटा संस में चेयरमैन के चयन में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी भूमिका है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट टाटा संस के प्रमुख शेयरधारकों में हैं और टाटा ट्रस्ट्स की कुल हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी बताई जाती है। नए चेयरमैन के लिए चयन समिति में ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड की भागीदारी होगी। इसी बीच ट्रस्ट्स से जुड़े कुछ प्रशासनिक और कानूनी मुद्दे भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से जुड़े निर्देशों के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठकों को लेकर पहले भी अड़चन सामने आई थी। जून में प्रकाशित दस्तावेजों में भी ट्रस्ट्स की बैठकों पर कानूनी प्रक्रिया के असर का उल्लेख हुआ था।
इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नोएल टाटा अंतरिम चेयरमैन की भूमिका निभा सकते हैं। 2016 में साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद रतन टाटा ने कुछ समय के लिए अंतरिम चेयरमैन का पद संभाला था और बाद में चंद्रशेखरन को स्थायी जिम्मेदारी दी गई थी। इस बार स्थिति अलग है। टाटा संस के नियमों में 2022 में किए गए बदलाव के बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के चेयरमैन के पद एक साथ संभालने को लेकर रोक है। इसलिए नोएल टाटा को लेकर अंतरिम व्यवस्था की चर्चा पहले जैसी नहीं है। नोएल टाटा फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट नॉमिनी डायरेक्टर हैं। ऐसे में नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
दूसरी तरफ चंद्रशेखरन के पास अभी कई महीने हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएं महत्वपूर्ण चरण में हैं और फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनका कार्यकाल पूरा होने तक उत्तराधिकारी की पहचान और जिम्मेदारी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश होगी। इस बीच टाटा समूह के भीतर संभावित नामों पर चर्चा जारी है। नरेंद्रन के साथ दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं, लेकिन अभी चयन समिति की ओर से किसी व्यक्ति को अगला चेयरमैन घोषित नहीं किया गया है। अगले कुछ महीनों में ट्रस्ट्स, बोर्ड और चयन समिति की बैठकों के साथ इस प्रक्रिया में और तस्वीर साफ होने की संभावना है।
टाटा संस के नए चेयरमैन की रेस में TV नरेंद्रन का नाम सबसे आगे
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टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने साफ किया है कि वे मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है, यानी वे तत्काल पद नहीं छोड़ रहे हैं। इसी बीच नए चेयरमैन की तलाश को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है। 13 अगस्त को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने उत्तराधिकारी की सिफारिश करने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी गठित करने का प्रस्ताव मंजूर किया। अब इस कमेटी के गठन और आगे उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा का रास्ता खुल गया है। इस पूरी कवायद में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टी.वी. नरेंद्रन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
नरेंद्रन लंबे समय से टाटा समूह का हिस्सा हैं और टाटा स्टील में उनका पूरा प्रोफेशनल करियर बीता है। वह 1988 में टाटा स्टील से जुड़े थे और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए कंपनी के शीर्ष प्रबंधन तक पहुंचे। मौजूदा समय में वह टाटा स्टील के MD और CEO हैं। कंपनी से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड में भी नरेंद्रन को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर दर्ज किया गया है। टाटा संस की कमान किसे मिलेगी, यह फैसला अभी हुआ नहीं है और नरेंद्रन का नाम फिलहाल संभावित दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है। लेकिन समूह के अंदर लंबे अनुभव और बड़े औद्योगिक कारोबार को संभालने की वजह से उनका नाम गंभीरता से लिया जा रहा है। कारोबारी रिपोर्टों में भी उनके नाम को उत्तराधिकार की चर्चा में प्रमुखता मिली है।
नरेंद्रन के पक्ष में सबसे बड़ी बात उनका टाटा स्टील में लंबा अनुभव माना जा रहा है। उन्होंने ऐसे समय में कंपनी का नेतृत्व किया जब स्टील कारोबार को वैश्विक बाजार की अनिश्चितता, कर्ज और यूरोपीय कारोबार से जुड़ी मुश्किल परिस्थितियों से जूझना पड़ा। टाटा स्टील के यूरोप कारोबार में लंबे समय से पुनर्गठन और लागत घटाने जैसे फैसले होते रहे हैं। भारत में कंपनी की स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ विदेशी कारोबार को लेकर कठिन फैसलों में भी नरेंद्रन की भूमिका रही है। यही अनुभव टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस भूमिका में सिर्फ एक कंपनी का संचालन नहीं बल्कि पूरे समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच रणनीतिक तालमेल देखना होता है।
टाटा समूह में TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। नरेंद्रन का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने करीब चार दशक टाटा समूह के भीतर बिताए हैं। टाटा संस के अगले प्रमुख के सामने बड़े निवेश, नई तकनीक, वैश्विक विस्तार और समूह की अलग-अलग कंपनियों की रणनीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। उत्तराधिकारी चयन की प्रक्रिया हालांकि पूरी तरह सीधी नहीं है। टाटा संस में चेयरमैन के चयन में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी भूमिका है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट टाटा संस के प्रमुख शेयरधारकों में हैं और टाटा ट्रस्ट्स की कुल हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी बताई जाती है। नए चेयरमैन के लिए चयन समिति में ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड की भागीदारी होगी। इसी बीच ट्रस्ट्स से जुड़े कुछ प्रशासनिक और कानूनी मुद्दे भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से जुड़े निर्देशों के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठकों को लेकर पहले भी अड़चन सामने आई थी। जून में प्रकाशित दस्तावेजों में भी ट्रस्ट्स की बैठकों पर कानूनी प्रक्रिया के असर का उल्लेख हुआ था।
इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नोएल टाटा अंतरिम चेयरमैन की भूमिका निभा सकते हैं। 2016 में साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद रतन टाटा ने कुछ समय के लिए अंतरिम चेयरमैन का पद संभाला था और बाद में चंद्रशेखरन को स्थायी जिम्मेदारी दी गई थी। इस बार स्थिति अलग है। टाटा संस के नियमों में 2022 में किए गए बदलाव के बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के चेयरमैन के पद एक साथ संभालने को लेकर रोक है। इसलिए नोएल टाटा को लेकर अंतरिम व्यवस्था की चर्चा पहले जैसी नहीं है। नोएल टाटा फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट नॉमिनी डायरेक्टर हैं। ऐसे में नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
दूसरी तरफ चंद्रशेखरन के पास अभी कई महीने हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएं महत्वपूर्ण चरण में हैं और फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनका कार्यकाल पूरा होने तक उत्तराधिकारी की पहचान और जिम्मेदारी हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश होगी। इस बीच टाटा समूह के भीतर संभावित नामों पर चर्चा जारी है। नरेंद्रन के साथ दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं, लेकिन अभी चयन समिति की ओर से किसी व्यक्ति को अगला चेयरमैन घोषित नहीं किया गया है। अगले कुछ महीनों में ट्रस्ट्स, बोर्ड और चयन समिति की बैठकों के साथ इस प्रक्रिया में और तस्वीर साफ होने की संभावना है।
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