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सुबह चेहरे की सूजन कम करने में मदद कर सकता है लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज
लाइफ स्टाइल
आइस रोलिंग और गुआ शा से चेहरे की पफीनेस में मिल सकती है अस्थायी राहत, लेकिन तेज दबाव और गलत तकनीक से बचना जरूरी
सुबह उठते ही अगर चेहरा थोड़ा फूला हुआ या आंखों के नीचे सूजन नजर आती है तो इसे हमेशा वजन बढ़ने या त्वचा की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। रातभर एक ही स्थिति में सोने, नींद पूरी न होने या शरीर में थोड़े समय के लिए अतिरिक्त तरल जमा होने से भी चेहरे पर पफीनेस दिखाई दे सकती है। ऐसे में इन दिनों लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज, आइस रोलिंग और गुआ शा जैसे तरीके सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं। इनका इस्तेमाल चेहरे पर हल्के हाथ से किया जाए तो कुछ लोगों में अस्थायी तौर पर सूजन और भारीपन कम नजर आ सकता है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक चेहरे की लिंफैटिक सेल्फ-मसाज का मकसद त्वचा के पास मौजूद लिंफ फ्लूइड को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने में मदद करना है।
लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज कोई नया ब्यूटी ट्रेंड भर नहीं है। मेडिकल सेटिंग में इसका इस्तेमाल खास तौर पर लिंफेडेमा जैसी स्थितियों में सूजन कम करने के लिए किया जाता है। चेहरे पर इसका कॉस्मेटिक इस्तेमाल भी किया जाता है, जहां हल्की मसाज से पफीनेस कम दिखाई दे सकती है। Cleveland Clinic के अनुसार, चेहरे की सेल्फ-मसाज करते समय बहुत हल्का दबाव रखना जरूरी है, क्योंकि लिंफ वेसल्स त्वचा की सतह के काफी करीब होती हैं। यानी चेहरे को जोर से दबाने या रगड़ने की जरूरत नहीं है। सुबह नहाने के बाद कुछ मिनट की हल्की मसाज की जा सकती है। शुरुआत गर्दन और कॉलरबोन के आसपास से करके चेहरे की तरफ बढ़ना और आखिर में दोबारा गर्दन के हिस्से पर लौटना एक सामान्य तरीका बताया गया है।
अगर आंखों के नीचे सुबह-सुबह पफीनेस ज्यादा रहती है तो उंगलियों से बेहद हल्की मूवमेंट की जा सकती है। पहले गर्दन के दोनों तरफ हल्के हाथ से नीचे की ओर स्ट्रोक करें। इसके बाद कानों के नीचे से गर्दन की तरफ धीरे-धीरे हाथ ले जाएं। माथे और गालों पर भी हल्के गोलाकार मूवमेंट किए जा सकते हैं। आंखों के आसपास त्वचा काफी नाजुक होती है, इसलिए वहां दबाव और भी कम रखना चाहिए। इस तरह की मसाज का उद्देश्य त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों पर हल्का काम करना है, मांसपेशियों को दबाना नहीं। अगर मसाज करते समय दर्द हो रहा है या त्वचा पर ज्यादा लाल निशान पड़ रहे हैं तो दबाव कम करना चाहिए।
आइस रोलिंग भी सुबह चेहरे की पफीनेस कम दिखाने का एक आसान तरीका माना जाता है। ठंडी सतह त्वचा को कुछ समय के लिए ठंडक देती है और सूजन तथा आंखों के नीचे की पफीनेस को कम दिखाने में मदद कर सकती है। फेस रोलर को फ्रिज में ठंडा करके इस्तेमाल किया जा सकता है। रोलर को चेहरे के बीच से बाहर की ओर चलाना बेहतर माना जाता है। इसे एक ही जगह पर लगातार दबाकर रखने या बहुत तेज रफ्तार से आगे-पीछे चलाने की जरूरत नहीं है। फेस रोलिंग से मिलने वाला कॉस्मेटिक असर आमतौर पर स्थायी नहीं होता और कुछ घंटों में कम हो सकता है।
सीधे बर्फ के टुकड़े को लंबे समय तक चेहरे पर रगड़ना भी जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति आइसिंग करना चाहता है तो ठंडे रोलर या कपड़े में लपेटकर ठंडी चीज का इस्तेमाल ज्यादा नियंत्रित तरीका हो सकता है। Facial icing से चेहरे की सूजन और आंखों के नीचे की पफीनेस अस्थायी रूप से कम हो सकती है। लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर चेहरे पर बार-बार या लंबे समय तक सूजन बनी रहती है तो उसके पीछे एलर्जी, संक्रमण, चोट, दवाओं का असर या दूसरी मेडिकल वजह हो सकती है।
गुआ शा को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं। पारंपरिक चीनी चिकित्सा से जुड़ी इस तकनीक में चिकने किनारे वाले टूल से त्वचा पर हल्के स्ट्रोक किए जाते हैं। चेहरे पर इसे बहुत हल्के दबाव के साथ इस्तेमाल किया जाता है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक इससे माइक्रोसर्कुलेशन बढ़ सकता है और चेहरे की पफीनेस कुछ समय के लिए कम नजर आ सकती है। हालांकि, चेहरे की पफीनेस कम करने के इस खास फायदे को साबित करने वाले मजबूत वैज्ञानिक सबूत अभी सीमित हैं। इसलिए गुआ शा को किसी चमत्कारी उपचार की तरह देखना सही नहीं होगा।
गुआ शा करते समय सबसे जरूरी बात तकनीक है। चेहरे पर मॉइस्चराइजर या ऐसा स्किनकेयर प्रोडक्ट लगाया जा सकता है जिससे टूल आसानी से फिसले। इसके बाद चेहरे के बीच से बाहर की दिशा में एक तरफ स्ट्रोक करना चाहिए। बार-बार आगे-पीछे रगड़ने से त्वचा पर अनावश्यक खिंचाव हो सकता है। आंखों के आसपास खास सावधानी जरूरी है। अगर त्वचा पर रैश, घाव, सनबर्न या पहले से जलन है तो उस हिस्से पर गुआ शा नहीं करना चाहिए। बहुत ज्यादा दबाव देने पर चोट, लाल निशान या त्वचा के नीचे छोटे रक्तस्राव जैसे निशान भी हो सकते हैं।
सुबह की पफीनेस के लिए इन तरीकों को अपनाने से पहले एक बात समझना जरूरी है कि हर चेहरे की सूजन लिंफ फ्लूइड की वजह से नहीं होती। कभी-कभार हल्की सूजन कुछ घंटों में अपने आप ठीक हो जाती है और चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर सूजन लगातार बनी रहती है, बढ़ रही है, दर्द के साथ है या अचानक बहुत ज्यादा हो गई है तो सिर्फ मसाज या आइस रोलिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। चेहरे की सूजन एलर्जी या संक्रमण जैसी स्थितियों का संकेत भी हो सकती है।
लिंफैटिक मसाज भी हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती। खून के थक्के या डीप वेन थ्रोम्बोसिस, सेल्युलाइटिस, बुखार, कुछ हृदय और किडनी संबंधी समस्याओं जैसी स्थितियों में लिंफैटिक ड्रेनेज से बचने की सलाह दी जाती है। सक्रिय संक्रमण के दौरान भी इसे खुद से शुरू नहीं करना चाहिए। लिंफेडेमा जैसी बीमारी वाले लोगों को भी पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित विशेषज्ञ से सही तकनीक समझनी चाहिए।
सुबह चेहरे की सूजन कम करने में मदद कर सकता है लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज
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सुबह उठते ही अगर चेहरा थोड़ा फूला हुआ या आंखों के नीचे सूजन नजर आती है तो इसे हमेशा वजन बढ़ने या त्वचा की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। रातभर एक ही स्थिति में सोने, नींद पूरी न होने या शरीर में थोड़े समय के लिए अतिरिक्त तरल जमा होने से भी चेहरे पर पफीनेस दिखाई दे सकती है। ऐसे में इन दिनों लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज, आइस रोलिंग और गुआ शा जैसे तरीके सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं। इनका इस्तेमाल चेहरे पर हल्के हाथ से किया जाए तो कुछ लोगों में अस्थायी तौर पर सूजन और भारीपन कम नजर आ सकता है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक चेहरे की लिंफैटिक सेल्फ-मसाज का मकसद त्वचा के पास मौजूद लिंफ फ्लूइड को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने में मदद करना है।
लिंफैटिक ड्रेनेज मसाज कोई नया ब्यूटी ट्रेंड भर नहीं है। मेडिकल सेटिंग में इसका इस्तेमाल खास तौर पर लिंफेडेमा जैसी स्थितियों में सूजन कम करने के लिए किया जाता है। चेहरे पर इसका कॉस्मेटिक इस्तेमाल भी किया जाता है, जहां हल्की मसाज से पफीनेस कम दिखाई दे सकती है। Cleveland Clinic के अनुसार, चेहरे की सेल्फ-मसाज करते समय बहुत हल्का दबाव रखना जरूरी है, क्योंकि लिंफ वेसल्स त्वचा की सतह के काफी करीब होती हैं। यानी चेहरे को जोर से दबाने या रगड़ने की जरूरत नहीं है। सुबह नहाने के बाद कुछ मिनट की हल्की मसाज की जा सकती है। शुरुआत गर्दन और कॉलरबोन के आसपास से करके चेहरे की तरफ बढ़ना और आखिर में दोबारा गर्दन के हिस्से पर लौटना एक सामान्य तरीका बताया गया है।
अगर आंखों के नीचे सुबह-सुबह पफीनेस ज्यादा रहती है तो उंगलियों से बेहद हल्की मूवमेंट की जा सकती है। पहले गर्दन के दोनों तरफ हल्के हाथ से नीचे की ओर स्ट्रोक करें। इसके बाद कानों के नीचे से गर्दन की तरफ धीरे-धीरे हाथ ले जाएं। माथे और गालों पर भी हल्के गोलाकार मूवमेंट किए जा सकते हैं। आंखों के आसपास त्वचा काफी नाजुक होती है, इसलिए वहां दबाव और भी कम रखना चाहिए। इस तरह की मसाज का उद्देश्य त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों पर हल्का काम करना है, मांसपेशियों को दबाना नहीं। अगर मसाज करते समय दर्द हो रहा है या त्वचा पर ज्यादा लाल निशान पड़ रहे हैं तो दबाव कम करना चाहिए।
आइस रोलिंग भी सुबह चेहरे की पफीनेस कम दिखाने का एक आसान तरीका माना जाता है। ठंडी सतह त्वचा को कुछ समय के लिए ठंडक देती है और सूजन तथा आंखों के नीचे की पफीनेस को कम दिखाने में मदद कर सकती है। फेस रोलर को फ्रिज में ठंडा करके इस्तेमाल किया जा सकता है। रोलर को चेहरे के बीच से बाहर की ओर चलाना बेहतर माना जाता है। इसे एक ही जगह पर लगातार दबाकर रखने या बहुत तेज रफ्तार से आगे-पीछे चलाने की जरूरत नहीं है। फेस रोलिंग से मिलने वाला कॉस्मेटिक असर आमतौर पर स्थायी नहीं होता और कुछ घंटों में कम हो सकता है।
सीधे बर्फ के टुकड़े को लंबे समय तक चेहरे पर रगड़ना भी जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति आइसिंग करना चाहता है तो ठंडे रोलर या कपड़े में लपेटकर ठंडी चीज का इस्तेमाल ज्यादा नियंत्रित तरीका हो सकता है। Facial icing से चेहरे की सूजन और आंखों के नीचे की पफीनेस अस्थायी रूप से कम हो सकती है। लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर चेहरे पर बार-बार या लंबे समय तक सूजन बनी रहती है तो उसके पीछे एलर्जी, संक्रमण, चोट, दवाओं का असर या दूसरी मेडिकल वजह हो सकती है।
गुआ शा को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं। पारंपरिक चीनी चिकित्सा से जुड़ी इस तकनीक में चिकने किनारे वाले टूल से त्वचा पर हल्के स्ट्रोक किए जाते हैं। चेहरे पर इसे बहुत हल्के दबाव के साथ इस्तेमाल किया जाता है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक इससे माइक्रोसर्कुलेशन बढ़ सकता है और चेहरे की पफीनेस कुछ समय के लिए कम नजर आ सकती है। हालांकि, चेहरे की पफीनेस कम करने के इस खास फायदे को साबित करने वाले मजबूत वैज्ञानिक सबूत अभी सीमित हैं। इसलिए गुआ शा को किसी चमत्कारी उपचार की तरह देखना सही नहीं होगा।
गुआ शा करते समय सबसे जरूरी बात तकनीक है। चेहरे पर मॉइस्चराइजर या ऐसा स्किनकेयर प्रोडक्ट लगाया जा सकता है जिससे टूल आसानी से फिसले। इसके बाद चेहरे के बीच से बाहर की दिशा में एक तरफ स्ट्रोक करना चाहिए। बार-बार आगे-पीछे रगड़ने से त्वचा पर अनावश्यक खिंचाव हो सकता है। आंखों के आसपास खास सावधानी जरूरी है। अगर त्वचा पर रैश, घाव, सनबर्न या पहले से जलन है तो उस हिस्से पर गुआ शा नहीं करना चाहिए। बहुत ज्यादा दबाव देने पर चोट, लाल निशान या त्वचा के नीचे छोटे रक्तस्राव जैसे निशान भी हो सकते हैं।
सुबह की पफीनेस के लिए इन तरीकों को अपनाने से पहले एक बात समझना जरूरी है कि हर चेहरे की सूजन लिंफ फ्लूइड की वजह से नहीं होती। कभी-कभार हल्की सूजन कुछ घंटों में अपने आप ठीक हो जाती है और चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर सूजन लगातार बनी रहती है, बढ़ रही है, दर्द के साथ है या अचानक बहुत ज्यादा हो गई है तो सिर्फ मसाज या आइस रोलिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। चेहरे की सूजन एलर्जी या संक्रमण जैसी स्थितियों का संकेत भी हो सकती है।
लिंफैटिक मसाज भी हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती। खून के थक्के या डीप वेन थ्रोम्बोसिस, सेल्युलाइटिस, बुखार, कुछ हृदय और किडनी संबंधी समस्याओं जैसी स्थितियों में लिंफैटिक ड्रेनेज से बचने की सलाह दी जाती है। सक्रिय संक्रमण के दौरान भी इसे खुद से शुरू नहीं करना चाहिए। लिंफेडेमा जैसी बीमारी वाले लोगों को भी पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित विशेषज्ञ से सही तकनीक समझनी चाहिए।
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