टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया

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फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी, तीसरे कार्यकाल पर बोर्ड में सहमति नहीं बनी; टाटा ट्रस्ट्स से मतभेद के बीच नेतृत्व बदलाव की तैयारी

टाटा समूह में बुधवार को नेतृत्व को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 के बाद पद पर बने रहने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दे दी है और मौजूदा कार्यकाल पूरा करने की बात कही है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना है। यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से कुछ दिन पहले आया है, इसलिए कॉरपोरेट जगत में इसे काफी अहम माना जा रहा है। चंद्रशेखरन ने अपने बयान में बताया कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश टाटा ट्रस्ट्स के दो प्रमुख ट्रस्टों ने सर्वसम्मति से की थी। टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। हालांकि 24 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी। इसके बाद मामला कई महीनों तक अटका रहा। चंद्रशेखरन ने कहा कि छह महीने गुजरने के बाद भी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने फरवरी 2027 के बाद नए कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

चंद्रशेखरन ने अपने संदेश में नेतृत्व को लेकर समय रहते स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक टाटा संस के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट इस समय अहम दौर से गुजर रहे हैं और ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और दूसरे हितधारकों के लिए यह साफ होना जरूरी है कि फरवरी 2027 के बाद समूह की कमान कौन संभालेगा। उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को भी कहा है, ताकि बदलाव अचानक न हो और जिम्मेदारी सौंपने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे और तब से समूह के कारोबार को संभाल रहे हैं। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, डिजिटल कारोबार और एयर इंडिया जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। हालांकि इन नए कारोबारों में भारी पूंजी लगाने और कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर समूह के भीतर सवाल भी उठते रहे हैं। खासकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की ओर से कुछ कारोबारों के घाटे और पूंजी आवंटन को लेकर चिंताएं सामने आने की रिपोर्टें पहले भी आई थीं। Reuters के मुताबिक चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच टाटा संस की संभावित लिस्टिंग, एयर इंडिया के प्रदर्शन और कुछ रणनीतिक मामलों को लेकर मतभेद भी चर्चा में रहे।

तीसरे कार्यकाल को लेकर विवाद की शुरुआत फरवरी की बोर्ड बैठक के बाद ही साफ तौर पर सामने आई थी। उस समय चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया गया था। रिपोर्टों में कहा गया था कि नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठाए थे। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए ट्रस्ट्स की राय कंपनी के नेतृत्व को लेकर काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल पर सहमति नहीं बनना समूह के लिए सामान्य बोर्ड प्रक्रिया से बड़ा मामला बन गया। हालांकि चंद्रशेखरन के ताजा बयान में किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने सिर्फ यह बताया कि उनके विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड में सर्वसम्मति से आगे नहीं बढ़ सका और छह महीने तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।

चंद्रशेखरन के फैसले का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। बुधवार को टाटा समूह की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। TCS करीब 5 प्रतिशत तक नीचे गया, जबकि टाटा मोटर्स में करीब 3 प्रतिशत और टाटा स्टील समेत कुछ अन्य प्रमुख शेयरों में भी गिरावट देखी गई। बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया को निवेशकों की नेतृत्व को लेकर चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है। टाटा संस के चेयरमैन पद में बदलाव का असर केवल होल्डिंग कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि टाटा संस समूह की कई बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।

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TCS, Tata Steel, Tata Motors और Tata Consumer जैसी कंपनियों के बोर्ड में भी चंद्रशेखरन की भूमिका रही है। टाटा संस की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि समूह एक साथ कई बड़े कारोबारों में निवेश कर रहा है। एयर इंडिया के विस्तार से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में टाटा समूह की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। ऐसे समय में नए चेयरमैन के चयन पर बोर्ड और ट्रस्ट्स की प्रक्रिया पर बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा पद पर बने रहेंगे और इस दौरान टाटा संस को अगले चेयरमैन के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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www.dainikjagranmpcg.com
12 Aug 2026 By Priyanka

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया

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टाटा समूह में बुधवार को नेतृत्व को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 के बाद पद पर बने रहने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दे दी है और मौजूदा कार्यकाल पूरा करने की बात कही है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना है। यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से कुछ दिन पहले आया है, इसलिए कॉरपोरेट जगत में इसे काफी अहम माना जा रहा है। चंद्रशेखरन ने अपने बयान में बताया कि उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश टाटा ट्रस्ट्स के दो प्रमुख ट्रस्टों ने सर्वसम्मति से की थी। टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। हालांकि 24 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी। इसके बाद मामला कई महीनों तक अटका रहा। चंद्रशेखरन ने कहा कि छह महीने गुजरने के बाद भी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने फरवरी 2027 के बाद नए कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

चंद्रशेखरन ने अपने संदेश में नेतृत्व को लेकर समय रहते स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक टाटा संस के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट इस समय अहम दौर से गुजर रहे हैं और ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और दूसरे हितधारकों के लिए यह साफ होना जरूरी है कि फरवरी 2027 के बाद समूह की कमान कौन संभालेगा। उन्होंने बोर्ड से उत्तराधिकारी की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को भी कहा है, ताकि बदलाव अचानक न हो और जिम्मेदारी सौंपने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे और तब से समूह के कारोबार को संभाल रहे हैं। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, डिजिटल कारोबार और एयर इंडिया जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। हालांकि इन नए कारोबारों में भारी पूंजी लगाने और कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर समूह के भीतर सवाल भी उठते रहे हैं। खासकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की ओर से कुछ कारोबारों के घाटे और पूंजी आवंटन को लेकर चिंताएं सामने आने की रिपोर्टें पहले भी आई थीं। Reuters के मुताबिक चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच टाटा संस की संभावित लिस्टिंग, एयर इंडिया के प्रदर्शन और कुछ रणनीतिक मामलों को लेकर मतभेद भी चर्चा में रहे।

तीसरे कार्यकाल को लेकर विवाद की शुरुआत फरवरी की बोर्ड बैठक के बाद ही साफ तौर पर सामने आई थी। उस समय चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया गया था। रिपोर्टों में कहा गया था कि नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठाए थे। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए ट्रस्ट्स की राय कंपनी के नेतृत्व को लेकर काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल पर सहमति नहीं बनना समूह के लिए सामान्य बोर्ड प्रक्रिया से बड़ा मामला बन गया। हालांकि चंद्रशेखरन के ताजा बयान में किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने सिर्फ यह बताया कि उनके विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड में सर्वसम्मति से आगे नहीं बढ़ सका और छह महीने तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।

चंद्रशेखरन के फैसले का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। बुधवार को टाटा समूह की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। TCS करीब 5 प्रतिशत तक नीचे गया, जबकि टाटा मोटर्स में करीब 3 प्रतिशत और टाटा स्टील समेत कुछ अन्य प्रमुख शेयरों में भी गिरावट देखी गई। बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया को निवेशकों की नेतृत्व को लेकर चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है। टाटा संस के चेयरमैन पद में बदलाव का असर केवल होल्डिंग कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि टाटा संस समूह की कई बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।

TCS, Tata Steel, Tata Motors और Tata Consumer जैसी कंपनियों के बोर्ड में भी चंद्रशेखरन की भूमिका रही है। टाटा संस की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि समूह एक साथ कई बड़े कारोबारों में निवेश कर रहा है। एयर इंडिया के विस्तार से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में टाटा समूह की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं। ऐसे समय में नए चेयरमैन के चयन पर बोर्ड और ट्रस्ट्स की प्रक्रिया पर बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा पद पर बने रहेंगे और इस दौरान टाटा संस को अगले चेयरमैन के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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