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ओडिशा विधानसभा सत्र में पेश होंगे 5-6 विधेयक, मंत्री ने दी जानकारी
Digital Desk
ओडिशा सरकार 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलने वाले विधानसभा सत्र में पांच से छह विधेयक पेश करेगी। मंत्री मुकेश महालिंग ने इसकी जानकारी दी।
ओडिशा सरकार आगामी विधानसभा सत्र में करीब पांच से छह विधेयक पेश करने की तैयारी में है। संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर सदन के भीतर चर्चा के लिए तैयार है।
17वीं ओडिशा विधानसभा का सातवां सत्र 22 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलेगा। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर भी इन तारीखों के साथ सत्र का कार्यक्रम दर्ज है।
महालिंग के अनुसार, सरकार का विस्तृत विधायी कार्यक्रम बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) के जरिए तय किया जाएगा। समिति सत्र के दौरान सदन में उठाए जाने वाले सरकारी और अन्य कार्यों की रूपरेखा निर्धारित करेगी।
पांच से छह विधेयक होंगे पेश
मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में करीब पांच से छह विधेयक पेश करने की योजना बना रही है।
हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित विधेयकों के नाम या उनके विस्तृत प्रावधानों का खुलासा नहीं किया। विधेयकों को किस दिन और किस क्रम में सदन में लाया जाएगा, यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले और आधिकारिक कार्यसूची पर निर्भर करेगा।
सरकार की इस घोषणा से संकेत मिलता है कि कम अवधि वाले इस विधानसभा सत्र में विधायी कार्यवाही महत्वपूर्ण स्थान रखेगी।
22 सितंबर से शुरू होगा सत्र
ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा।
विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर 17वीं विधानसभा के सातवें सत्र के लिए यही अवधि दर्ज है। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार, सत्र में करीब नौ बैठक दिवस रखे जाने की संभावना है।
कम अवधि के कारण सरकार और विपक्ष दोनों के पास विधेयकों, नीतिगत मुद्दों और जनहित से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए सीमित समय होगा।
ऐसे में सत्र की कार्यसूची और प्रत्येक दिन के लिए निर्धारित सरकारी कामकाज महत्वपूर्ण रहेगा।
21 सितंबर को सर्वदलीय बैठक
विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 21 सितंबर को सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी।
महालिंग के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बैठक में शामिल होंगे।
सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य सदन की कार्यवाही को सुचारु बनाने और आगामी सत्र के दौरान विभिन्न दलों के बीच व्यापक समन्वय स्थापित करना होगा।
इस बैठक में सदन के कामकाज, चर्चा के मुद्दों और कार्यवाही को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विचार-विमर्श की संभावना है।
विपक्ष के मुद्दों पर नजर
मानसून सत्र में ओडिशा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
विपक्षी दल पहले ही Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं। बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने इस विधेयक के ओडिशा पर संभावित प्रभावों पर चर्चा के लिए अलग विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की थी।
राज्य सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया था। महालिंग ने कहा था कि इस विषय पर नियमित मानसून सत्र के दौरान चर्चा की जा सकती है।
सरकार ने बहस का दिया न्योता
महालिंग ने कहा कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष के सदस्यों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का सदन के भीतर जवाब देने के लिए तैयार है।
उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे विधानसभा के बाहर राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय सदन के पटल पर मुद्दों पर चर्चा करें।
उनके बयान के बाद उम्मीद है कि सत्र के दौरान नीतियों, विकास, खनन और राज्य के हितों से जुड़े विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस हो सकती है।
BAC तय करेगी कार्यसूची
विधानसभा की Business Advisory Committee आगामी सत्र की विस्तृत कार्यसूची तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
महालिंग के अनुसार, समिति यह तय करेगी कि सदन में कौन-कौन से सरकारी और अन्य कार्य लिए जाएंगे। इसलिए अभी प्रस्तावित विधेयकों और अन्य मुद्दों के लिए अंतिम क्रम उपलब्ध नहीं है।
सरकार की विधायी प्राथमिकताएं और विधेयकों को पेश करने का विस्तृत कार्यक्रम कार्यसूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद स्पष्ट होगा।
सत्र में बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलने वाला यह विधानसभा सत्र ओडिशा सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधायी अवधि होगी। पांच से छह विधेयकों को पेश करने की योजना और कई संवेदनशील नीतिगत मुद्दों के कारण सदन में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।
सरकार ने विपक्ष के सवालों पर चर्चा के लिए तैयार होने का संकेत दिया है। वहीं विपक्ष राज्य के हितों, खनन, नीतिगत फैसलों और अन्य जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी कर सकता है।
अभी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी द्वारा विस्तृत एजेंडा तय किया जाना बाकी है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि आगामी सत्र में कौन से विधेयक और मुद्दे सबसे अधिक चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
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