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बीआरएस विधायकों की हिरासत पर केटीआर का रेवंत रेड्डी पर हमला
Digital Desk
तेलंगाना विधानसभा के बाहर बीआरएस विधायकों की हिरासत के बाद केटीआर ने रेवंत रेड्डी पर हमला बोला। जानें काले टी-शर्ट विवाद, प्रदर्शन और हाई कोर्ट के निर्देश की पूरी जानकारी।
तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के बीच तनाव खुलकर सामने आया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (केटीआर), पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और कई पार्टी विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोकने के बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
बीआरएस नेता काले कपड़े और ऐसे टी-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे, जिन पर कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के शासन और चुनावी वादों को लेकर नारे लिखे थे। पुलिस द्वारा प्रवेश रोके जाने के बाद विधानसभा गेट पर नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस हुई और बाद में पुलिस ने केटीआर, हरीश राव तथा अन्य नेताओं को स्थानीय पुलिस थानों में ले गई।
केटीआर ने लगाया बड़ा आरोप
हिरासत में लिए जाने के बाद केटीआर ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी के पास केवल “विनाश, ध्यान भटकाना और मुद्दा बदलना” है और उन्होंने बीआरएस को विधानसभा में प्रवेश से रोकने के लिए “डायवर्जन ड्रामा” शुरू किया।
केटीआर ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उनका कहना था कि बीआरएस विधायक विधानसभा के भीतर जनता से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया गया।
काले टी-शर्ट पर विवाद
बीआरएस विधायकों ने कांग्रेस सरकार के 1,000 दिन पूरे होने के विरोध में काले टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया था। टी-शर्ट पर कांग्रेस सरकार द्वारा चुनावी वादे पूरे नहीं करने और 1,000 दिनों के शासन को विफल बताने वाले नारे लिखे थे।
बीआरएस नेताओं का कहना था कि यह विरोध विधानसभा सत्र के दौरान सरकार की जवाबदेही तय करने और चुनावी वादों के क्रियान्वयन का मुद्दा उठाने के लिए किया गया था।
पुलिस और विधानसभा सुरक्षा कर्मियों ने इन नेताओं को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
राहुल गांधी का दिया उदाहरण
केटीआर ने अपने विरोध को सही ठहराते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी संसद में टी-शर्ट पहनकर प्रवेश कर सकते हैं, तो राज्य विधानसभा में बीआरएस विधायकों के लिए अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं।
केटीआर ने दावा किया कि राहुल गांधी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर जा चुके हैं। उन्होंने पूछा कि क्या संसद और विधानसभा के लिए अलग-अलग नियम होने चाहिए।
हालांकि, विधानसभा में प्रवेश और पोशाक संबंधी नियमों की व्याख्या विधानसभा के अध्यक्ष और सुरक्षा व्यवस्था के तहत की जाती है। इसलिए केटीआर की टिप्पणी को उनके राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
विधानसभा गेट पर बढ़ा तनाव
बीआरएस नेताओं को रोके जाने के बाद विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। काले कपड़ों में पहुंचे विधायकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस हुई।
पुलिस ने बाद में केटीआर, हरीश राव और अन्य बीआरएस नेताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानीय पुलिस थानों में पहुंचाया। प्रदर्शन के कारण विधानसभा के बाहर करीब 30 से 40 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा।
बीआरएस ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ विधायकों के साथ बल प्रयोग किया गया।
एक हजार दिन के शासन पर हमला
विधानसभा पहुंचने से पहले केटीआर, हरीश राव और अन्य बीआरएस नेताओं ने गन पार्क में प्रदर्शन किया था। बीआरएस ने कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के शासन को निशाना बनाते हुए उसके चुनावी वादों के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।
बीआरएस नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कई वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के करीब 1,000 दिन बाद भी उनमें से कई वादे पूरे नहीं हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की टी-शर्ट पर भी कांग्रेस सरकार के कथित विफल शासन और वादे पूरे न करने से जुड़े नारे लिखे थे।
बीआरएस ने विधानसभा सत्र में किसानों, सिंगरेनी कर्मचारियों, ऑटो चालकों, सरकारी कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कही है।
हाई कोर्ट ने दिया निर्देश
बीआरएस विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोके जाने का मामला तेलंगाना हाई कोर्ट तक भी पहुंचा। अदालत ने 7 सितंबर को राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि बीआरएस विधायकों को विधानसभा में प्रवेश करने से न रोका जाए।
हाई कोर्ट ने विधानसभा के चल रहे आठवें सत्र के दौरान निर्वाचित प्रतिनिधियों के कथित तौर पर रोके जाने को गंभीरता से लिया और उनके विधायी कर्तव्यों को निभाने में बाधा नहीं डालने का निर्देश दिया।
इस आदेश के बाद विधानसभा परिसर में सुरक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है।
कांग्रेस और बीआरएस में टकराव
बीआरएस और कांग्रेस के बीच टकराव केवल विधानसभा के प्रवेश विवाद तक सीमित नहीं है। बीआरएस लगातार रेवंत रेड्डी सरकार के 1,000 दिनों के प्रदर्शन को निशाना बना रही है, जबकि कांग्रेस विपक्षी दल के नेताओं के आचरण और विधानसभा में उनके व्यवहार पर सवाल उठा रही है।
सोमवार को बीआरएस नेताओं की हिरासत के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। कुछ जगहों पर धरना, सड़क अवरोध और मुख्यमंत्री के पुतले जलाने की घटनाएं भी सामने आईं।
विधानसभा सत्र की शुरुआत में ही दोनों दलों के बीच बढ़ा तनाव आने वाले दिनों की कार्यवाही को भी प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या होगा?
बीआरएस ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध तेज करने के संकेत दिए हैं। केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए माफी और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल से भी शिकायत करने की बात कही है।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष की भूमिका, विधायकों के प्रवेश और प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा नियमों को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा परिसर में बीआरएस विधायकों के प्रवेश और विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन किस तरह की व्यवस्था करता है। साथ ही, 1,000 दिनों के शासन को लेकर बीआरएस के अभियान से तेलंगाना की राजनीति में कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल के बीच टकराव और तेज हो सकता है।
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