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सत्य निकेतन इमारत हादसा: महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत
Digital Desk
सत्य निकेतन इमारत हादसे में अदालत ने महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत और हरिराम-उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत हादसे में पटियाला हाउस की ड्यूटी मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार देर रात बड़ा आदेश दिया। अदालत ने पीजी संचालक महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया, जबकि उनके माता-पिता हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पांच मंजिला इमारत 6 सितंबर को ढह गई थी, जिसमें सात लोगों की मौत हुई।
पुलिस ने तीनों को इमारत गिरने के मामले में गिरफ्तार किया है। अदालत ने यह आदेश दिल्ली पुलिस और बचाव पक्ष के वकील की दलीलें सुनने के बाद दिया।
सात लोगों की हुई मौत
सत्य निकेतन में स्थित यह पांच मंजिला इमारत मुख्य रूप से छात्रों के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। 6 सितंबर को इमारत अचानक ढह गई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, हादसे में सात लोगों की मौत हुई और 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। बचाव अभियान के दौरान पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश की।
हादसे के बाद इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा, मरम्मत कार्य और पीजी संचालन से जुड़े नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
तीनों आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने मामले में परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता और 52 वर्षीय महेश गुप्ता शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, हरिराम गुप्ता इमारत से जुड़े कामकाज की देखरेख कर रहे थे, जबकि उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता के नाम पर संपत्ति दर्ज थी। उनका बेटा महेश गुप्ता पीजी के संचालन से जुड़ा था।
हरिराम गुप्ता को पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा था। पुलिस ने उन्हें तलाशने के लिए कई टीमें गठित की थीं।
बेसमेंट में चल रहा था काम
जांच में पुलिस को इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत कार्य चलने की जानकारी मिली है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल के अनुसार, एक घायल मजदूर ने भी बेसमेंट में निर्माण गतिविधियां होने की पुष्टि की।
पुलिस के अनुसार, हरिराम गुप्ता ने पूछताछ के दौरान बेसमेंट में मरम्मत का काम कराए जाने की बात स्वीकार की थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन गतिविधियों का इमारत की संरचनात्मक मजबूती पर कितना असर पड़ा।
मलबे में फंसे लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
महेश से होगी पूछताछ
अदालत ने महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। पुलिस इस दौरान पीजी के संचालन, इमारत में कराए गए काम और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर सकती है।
जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि इमारत में कितने लोग रह रहे थे और पीजी के संचालन से संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
महेश के माता-पिता को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पुलिस को उनसे पूछताछ के लिए अदालत की अनुमति की आवश्यकता होगी।
सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल
हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर व्यापक सवाल उठे हैं। शुरुआती जांच में इमारत की उम्र, अतिरिक्त निर्माण और हाल में किए गए मरम्मत कार्यों सहित कई पहलुओं की जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में बेसमेंट में पानी जमा होने और संरचनात्मक कमजोरी की आशंका भी सामने आई है।
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने शहरभर में पीजी आवासों और कोचिंग केंद्रों की सुरक्षा जांच तेज करने का फैसला किया है। प्रशासन ने ऐसे भवनों की पहचान करने और संभावित सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए समयबद्ध निरीक्षण की बात कही है।
अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। प्रशासन ने मामले में भवन सुरक्षा और नियामकीय निगरानी से जुड़े पहलुओं की भी जांच शुरू की है।
दिल्ली सरकार ने पीजी और कोचिंग केंद्रों के सुरक्षा निरीक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की कमी को दूर करने पर भी चर्चा की है।
आपात स्थिति में बचाव कार्य को तेज करने के लिए दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तैनाती और प्रतिक्रिया समय कम करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया है।
आगे क्या होगा?
अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि इमारत गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या निर्माण या मरम्मत कार्यों ने उसकी संरचनात्मक मजबूती को प्रभावित किया।
पुलिस पीजी संचालन, इमारत के स्वामित्व, निर्माण गतिविधियों और सुरक्षा मानकों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। महेश गुप्ता की दो दिन की पुलिस हिरासत में पूछताछ इस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
वहीं हरिराम और उर्मिला गुप्ता की न्यायिक हिरासत के दौरान मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रशासन की ओर से शहर के अन्य पीजी और कोचिंग भवनों की सुरक्षा जांच का फैसला भी इस हादसे के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
फिलहाल सत्य निकेतन हादसा दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा, अवैध या अनधिकृत निर्माण और भवनों के नियमित संरचनात्मक निरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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