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तेलंगाना में स्पीकर पर टिप्पणी और BRS हिंसा की जांच के आदेश
Digital Desk
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा अध्यक्ष के कथित अपमान, बीआरएस- पुलिस झड़प और एर्रावल्ली शुद्धिकरण विवाद की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
तेलंगाना सरकार ने विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी, BRS विधायकों और पुलिस के बीच हुए टकराव तथा पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के एर्रावेली स्थित फार्महाउस के पास हुए कथित “शुद्धिकरण” कार्यक्रम से जुड़े घटनाक्रम की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुधवार को विधानसभा में जांच की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेतृत्व ने विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने के लिए व्यापक साजिश रची। हालांकि, BRS ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी ने कांग्रेस सरकार और पुलिस पर अपने विधायकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
हैदराबाद के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस एसएम विजय कुमार को जांच की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
घटनाक्रम की जांच के आदेश
रेवंत रेड्डी ने कहा कि जांच 6 सितंबर को KCR के एर्रावेली फार्महाउस में BRS विधायकों और MLCs की बैठक से शुरू होने वाले घटनाक्रम की पड़ताल करेगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच में विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने की कथित योजना, 7 सितंबर को विधानसभा के बाहर BRS विधायकों और पुलिस के बीच हुआ टकराव, स्पीकर के खिलाफ कथित टिप्पणियां और इसके बाद एर्रावेली में हुए घटनाक्रम को शामिल किया जाएगा।
सरकार ने संकेत दिया है कि जांच में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
स्पीकर की टिप्पणी से विवाद
विवाद उस समय बढ़ा जब BRS MLC थाथा मधुसूदन, जिन्हें टाटा मधु के नाम से भी जाना जाता है, पर स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा।
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान स्पीकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि कथित टिप्पणी में उनकी मां को भी लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।
इसके बाद पुलिस ने मधुसूदन और एक अन्य BRS MLC एन. नवीन कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, स्थानीय अदालत ने उनकी रिमांड खारिज कर दी और व्यक्तिगत जमानत पर उन्हें रिहा कर दिया गया।
BRS नेताओं का कहना है कि मधुसूदन ने कथित टिप्पणी वापस लेते हुए खेद भी जताया था।
BRS ने पुलिस पर लगाए आरोप
राजनीतिक विवाद का दूसरा प्रमुख केंद्र विधानसभा के बाहर BRS विधायकों और पुलिस के बीच हुआ टकराव है।
BRS नेताओं केटी रामा राव, टी. हरीश राव और पी. सबिता इंद्रा रेड्डी ने आरोप लगाया कि विधानसभा परिसर में प्रवेश रोकने के दौरान पुलिसकर्मियों ने विधायकों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।
BRS की महिला विधायकों ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और कथित तौर पर बदसलूकी की। पार्टी ने मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इन आरोपों की जांच के लिए हैदराबाद पुलिस ने भी ज्वाइंट कमिश्नर एसएम विजय कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की है।
22 BRS विधायक निलंबित
लगातार विरोध और हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही कई दिनों तक प्रभावित हुई।
9 सितंबर को 22 BRS विधायकों, जिनमें केटी रामा राव और टी. हरीश राव भी शामिल हैं, को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया।
BRS विधायक अपनी महिला सदस्यों के साथ कथित पुलिस व्यवहार और राज्य सरकार से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे।
निलंबन के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BRS के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
एर्रावेली में शुद्धिकरण विवाद
विवाद का एक और बड़ा केंद्र सिद्दीपेट जिले के एर्रावेली में KCR के फार्महाउस के पास कथित “शुद्धिकरण” कार्यक्रम बना।
बताया गया कि स्पीकर के खिलाफ कथित टिप्पणी के विरोध में कांग्रेस के दलित कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने वहां प्रदर्शन किया था। इसके बाद BRS समर्थकों द्वारा कथित रूप से शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने इसे भेदभावपूर्ण और दलित समुदाय का अपमान बताया। वहीं, BRS ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
SC/ST एक्ट पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि जांच से यह तय होगा कि कथित टिप्पणियों और संबंधित घटनाओं में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धाराएं लागू होती हैं या नहीं।
उन्होंने अनुसूचित जाति के सदस्यों को जानबूझकर अपमानित या धमकाने तथा दलितों के खिलाफ वैमनस्य बढ़ाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों का भी उल्लेख किया।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं पर भी विचार किया जाएगा।
मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच के निष्कर्ष और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
कांग्रेस-BRS टकराव बढ़ा
पूरे विवाद ने अब कांग्रेस सरकार और BRS के बीच व्यापक राजनीतिक संघर्ष का रूप ले लिया है।
रेवंत रेड्डी ने KCR और उनकी पार्टी पर विधानसभा में जानबूझकर व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि BRS ऐसे मुद्दे उठा रही है ताकि पिछली सरकार से जुड़े राजनीतिक रूप से असहज सवालों पर चर्चा से बचा जा सके।
BRS ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भी संपर्क किया है। पार्टी ने पुलिस कार्रवाई और अपने विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से कथित रूप से रोकने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
अब अलग-अलग शिकायतों और जांच के बीच मुख्य नजर पुलिस जांच के निष्कर्षों पर रहेगी। जांच यह तय करने में अहम होगी कि विधायकों या अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है या नहीं। साथ ही, BRS की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी जांच होगी।
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