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जंतर-मंतर मारपीट मामले में CJP का थाने तक मार्च, निउशु आजाद के पिता के लिए कार्रवाई की मांग
भारत
संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में CJP नेताओं ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की; वायरल पॉडकास्ट वीडियो के बाद विवाद फिर गरमाया।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जून में हुई झड़प का मामला एक बार फिर चर्चा में है। Cockroach Janta Party (CJP) के नेताओं और समर्थकों ने शुक्रवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन तक मार्च किया और निउशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में पुलिस से आगे कार्रवाई की मांग की। CJP के प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत संगठन के कई सदस्य थाने पहुंचे। संगठन का कहना है कि मामले में कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर अभी और कदम उठाए जाने चाहिए।
वायरल पॉडकास्ट वीडियो के बाद उठे सवाल
CJP के मार्च की पृष्ठभूमि में स्वातंत्र्य भारद्वाज से जुड़ा एक पॉडकास्ट वीडियो भी है, जो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। CJP नेताओं ने दावा किया कि वीडियो में भारद्वाज ने जून में हुई घटना में अपनी भूमिका का जिक्र किया है। संगठन ने इसी आधार पर पुलिस से मामले की दोबारा समीक्षा और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। CJP का आरोप है कि वीडियो सामने आने के बाद भी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, भारद्वाज ने बाद में घटना को आत्मरक्षा बताते हुए अपना पक्ष रखा। उनका दावा है कि उन्हें करीब 10 से 15 लोगों ने घेर लिया था और गंभीर नुकसान की आशंका के चलते उन्होंने बचाव में कार्रवाई की।
23 जून को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प से जुड़ा है। इस घटना में गाजियाबाद निवासी संजय कुमार के सिर पर चोट लगी थी। वह CJP कार्यकर्ता निउशु आजाद के पिता हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, कुमार को झड़प में शामिल एक व्यक्ति के हाथ में पहने धातु के कड़े से चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे सिर की हड्डी टूटने या ‘स्कल क्रैक’ होने के दावों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल-लीगल रिपोर्ट में चोट को साधारण प्रकृति की बताया गया था।
पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, संजय कुमार की शिकायत के आधार पर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन स्थल से स्वातंत्र्य भारद्वाज, 21, और सूरज कुमार, 24, को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। जांच के दौरान नोटिस भी जारी किए गए और पुलिस का कहना है कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस ने मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से भी इनकार किया है। उसका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
CJP ने किन बातों पर आपत्ति जताई?
CJP नेताओं का कहना है कि मामले में ज्यादा कड़ी धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं। संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्वातंत्र्य भारद्वाज को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। सौरव दास ने पुलिस पर मामले में आगे कार्रवाई को लेकर अनिच्छा का आरोप लगाया। संगठन ने घटना की नए सिरे से जांच और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली पुलिस ने CJP के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि मामले की जांच कानून के अनुसार की गई।
राहुल गांधी ने भी किया था समर्थन
जंतर-मंतर विवाद को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निउशु आजाद के समर्थन में बात रखी थी। गांधी ने कहा था कि वह निउशु के साथ खड़े हैं और आरोप लगाया था कि समुदाय और छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। CJP ने अपने ताजा प्रदर्शन को दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के साथ कथित व्यवहार के खिलाफ चलाए जा रहे अपने व्यापक अभियान से भी जोड़ा है।
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