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17 अगस्त तक जरूर भरें एन्यूमरेशन फॉर्म, दिल्ली में वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट
नई दिल्ली।
2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर नहीं कटेगा वोट, सत्यापन के लिए परिवार की जानकारी देने का मिलेगा मौका
दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं को लेकर स्थिति साफ कर दी है। आयोग ने बताया है कि सिर्फ 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होने की वजह से किसी व्यक्ति का नाम मौजूदा वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करने वाले मतदाताओं के लिए परेशानी बढ़ सकती है। दिल्ली में इन दिनों घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटाने और रिकॉर्ड का सत्यापन करने का काम चल रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना है, जो अब पात्र नहीं हैं या जिनका स्थान बदल चुका है।
2002 की लिस्ट में नाम नहीं तो घबराने की जरूरत नहीं
दिल्ली के कई मतदाताओं को इस बात की चिंता है कि अगर उनका नाम 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं है तो उनका नाम मौजूदा सूची से हटा दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस आशंका को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होना अपने आप में नाम हटाने का आधार नहीं है। ऐसे मतदाताओं से उनकी पात्रता और पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी का विवरण देकर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
किन लोगों के नाम पर हो सकती है कार्रवाई?
चुनाव आयोग के मुताबिक इस प्रक्रिया में ऐसे लोगों के नाम पर कार्रवाई की जा सकती है, जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया है या जो भारत के पात्र मतदाता नहीं हैं। इसके अलावा मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों के नामों को भी मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकता है। वहीं, अगर किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह की वोटर लिस्ट में दर्ज है, तो सत्यापन के दौरान इसे भी ठीक किया जा सकता है।
17 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने की अपील
मतदाताओं के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर भरना बेहद जरूरी माना जा रहा है। संबंधित मतदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी जानकारी उपलब्ध करानी होगी, ताकि उनका रिकॉर्ड सत्यापित किया जा सके। आयोग की ओर से चल रही इस प्रक्रिया में मतदाताओं से सहयोग करने की अपील की गई है। फॉर्म भरने के बाद संबंधित जानकारी को रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है।
24 अगस्त को आएगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
दिल्ली में मतदाता सत्यापन और एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटलीकरण का काम पूरा होने के बाद 24 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की जाएगी। ड्राफ्ट लिस्ट सामने आने के बाद मतदाता अपना नाम और अन्य विवरण जांच सकेंगे। अगर किसी व्यक्ति को अपने नाम या जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो तय प्रक्रिया के तहत उसे सुधार या दावा दर्ज कराने का अवसर मिल सकता है।
CEO कार्यालय ने भी दी जानकारी
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से बताया गया कि एन्यूमरेशन फॉर्म के वितरण और उन्हें जमा कराने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। 5 अगस्त की रात तक बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन पूरा किया जा चुका था। अधिकारी कार्यालय का कहना है कि पूरी कवायद का उद्देश्य एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है, जो सही, पारदर्शी और अपडेटेड हो।
सोमनाथ भारती ने उठाए थे सवाल
इस प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने बताया था कि दिल्ली में रहने और यहां शिक्षा हासिल करने के बावजूद उन्हें 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला। उन्होंने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद चुनाव अधिकारी कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि 2002 की सूची में नाम नहीं होने वाले लोगों को सत्यापन के लिए वैकल्पिक जानकारी देने का मौका मिलेगा।
मतदाता रखें इन बातों का ध्यान
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के बीच मतदाताओं को अपनी जानकारी सही तरीके से उपलब्ध कराना चाहिए। खासकर जिन लोगों का नाम 2002 की पुरानी सूची में नहीं है, उन्हें घबराने के बजाय सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से किसी का वोटर कार्ड या नाम अपने आप रद्द नहीं होगा। लेकिन एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं भरने और पात्रता से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं करने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है। इसलिए मतदाताओं के लिए समय सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना अहम है।
17 अगस्त तक जरूर भरें एन्यूमरेशन फॉर्म, दिल्ली में वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट
नई दिल्ली।
दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं को लेकर स्थिति साफ कर दी है। आयोग ने बताया है कि सिर्फ 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होने की वजह से किसी व्यक्ति का नाम मौजूदा वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करने वाले मतदाताओं के लिए परेशानी बढ़ सकती है। दिल्ली में इन दिनों घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटाने और रिकॉर्ड का सत्यापन करने का काम चल रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना है, जो अब पात्र नहीं हैं या जिनका स्थान बदल चुका है।
2002 की लिस्ट में नाम नहीं तो घबराने की जरूरत नहीं
दिल्ली के कई मतदाताओं को इस बात की चिंता है कि अगर उनका नाम 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में नहीं है तो उनका नाम मौजूदा सूची से हटा दिया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस आशंका को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होना अपने आप में नाम हटाने का आधार नहीं है। ऐसे मतदाताओं से उनकी पात्रता और पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी का विवरण देकर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
किन लोगों के नाम पर हो सकती है कार्रवाई?
चुनाव आयोग के मुताबिक इस प्रक्रिया में ऐसे लोगों के नाम पर कार्रवाई की जा सकती है, जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया है या जो भारत के पात्र मतदाता नहीं हैं। इसके अलावा मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों के नामों को भी मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकता है। वहीं, अगर किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह की वोटर लिस्ट में दर्ज है, तो सत्यापन के दौरान इसे भी ठीक किया जा सकता है।
17 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने की अपील
मतदाताओं के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर भरना बेहद जरूरी माना जा रहा है। संबंधित मतदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी जानकारी उपलब्ध करानी होगी, ताकि उनका रिकॉर्ड सत्यापित किया जा सके। आयोग की ओर से चल रही इस प्रक्रिया में मतदाताओं से सहयोग करने की अपील की गई है। फॉर्म भरने के बाद संबंधित जानकारी को रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है।
24 अगस्त को आएगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
दिल्ली में मतदाता सत्यापन और एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटलीकरण का काम पूरा होने के बाद 24 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की जाएगी। ड्राफ्ट लिस्ट सामने आने के बाद मतदाता अपना नाम और अन्य विवरण जांच सकेंगे। अगर किसी व्यक्ति को अपने नाम या जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो तय प्रक्रिया के तहत उसे सुधार या दावा दर्ज कराने का अवसर मिल सकता है।
CEO कार्यालय ने भी दी जानकारी
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से बताया गया कि एन्यूमरेशन फॉर्म के वितरण और उन्हें जमा कराने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। 5 अगस्त की रात तक बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन पूरा किया जा चुका था। अधिकारी कार्यालय का कहना है कि पूरी कवायद का उद्देश्य एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है, जो सही, पारदर्शी और अपडेटेड हो।
सोमनाथ भारती ने उठाए थे सवाल
इस प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने बताया था कि दिल्ली में रहने और यहां शिक्षा हासिल करने के बावजूद उन्हें 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला। उन्होंने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद चुनाव अधिकारी कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि 2002 की सूची में नाम नहीं होने वाले लोगों को सत्यापन के लिए वैकल्पिक जानकारी देने का मौका मिलेगा।
मतदाता रखें इन बातों का ध्यान
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के बीच मतदाताओं को अपनी जानकारी सही तरीके से उपलब्ध कराना चाहिए। खासकर जिन लोगों का नाम 2002 की पुरानी सूची में नहीं है, उन्हें घबराने के बजाय सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से किसी का वोटर कार्ड या नाम अपने आप रद्द नहीं होगा। लेकिन एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं भरने और पात्रता से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं करने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है। इसलिए मतदाताओं के लिए समय सीमा के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना अहम है।
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