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खेती के लिए चाहिए पैसा तो ऐसे मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज, जानें कौन कर सकता है आवेदन
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किसान क्रेडिट कार्ड से खेती के खर्च के लिए मिलती है आसान क्रेडिट सुविधा, समय पर भुगतान करने पर ब्याज में अतिरिक्त राहत का प्रावधान
खेती में किसान को बुआई से लेकर फसल की कटाई तक कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों के लिए समय पर पैसों की जरूरत होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की सुविधा उपलब्ध है। इसके जरिए पात्र किसानों को खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक से कर्ज मिल सकता है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत 1998 में हुई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य किसानों को फसल उत्पादन से जुड़े खर्चों के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना था। बाद में योजना का दायरा बढ़ाया गया और डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया गया।
KCC पर ब्याज कितना लगता है?
KCC की अहम विशेषताओं में रियायती ब्याज दर शामिल है। पात्र KCC फसल ऋण पर निर्धारित नियमों के तहत 7 प्रतिशत सालाना की ब्याज दर लागू हो सकती है। समय पर कर्ज चुकाने वाले पात्र किसानों को अतिरिक्त ब्याज छूट मिल सकती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत सालाना तक आ सकती है।
हालांकि ब्याज दर और सब्सिडी का लाभ किसान की पात्रता तथा मौजूदा सरकारी नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए KCC लेने से पहले संबंधित बैंक से वर्तमान ब्याज दर और छूट की जानकारी लेना जरूरी है।
किन किसानों को मिल सकता है KCC?
KCC केवल अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। पात्रता के नियमों के तहत इनमें शामिल हो सकते हैं—
-
अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसान
-
पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान
-
बटाईदार किसान
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किसान समूह
-
स्वयं सहायता समूह (SHG)
-
संयुक्त देयता समूह (JLG)
इसके अलावा डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़े पात्र लोग भी KCC सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
KCC से कितनी रकम मिल सकती है?
KCC की क्रेडिट सीमा हर किसान के लिए समान नहीं होती। बैंक किसान की जमीन, फसल, खेती का क्षेत्रफल, अनुमानित लागत और जरूरत के आधार पर सीमा तय करता है।
फसल उत्पादन और उससे जुड़े खर्चों के लिए 3 लाख रुपये तक की क्रेडिट सीमा का प्रावधान हो सकता है। पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों के लिए अलग सीमा निर्धारित की जा सकती है।
कुछ छोटे और सीमांत किसानों के लिए फ्लेक्सी KCC जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं। इनकी वास्तविक सीमा बैंक और लागू नियमों के अनुसार तय होती है।
KCC की लिमिट कैसे तय होती है?
KCC को एक तरह की रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी स्वीकृत सीमा के भीतर किसान जरूरत के अनुसार रकम निकाल सकता है और वापस जमा कर सकता है।
क्रेडिट लिमिट तय करते समय फसल की अनुमानित लागत, खेती का क्षेत्रफल, कटाई के बाद के खर्च, कृषि संबंधी जरूरतों और अन्य पात्र खर्चों को ध्यान में रखा जाता है। आगे के वर्षों में लागत बढ़ने की संभावना को देखते हुए लिमिट में निर्धारित नियमों के अनुसार बदलाव किया जा सकता है। जरूरत के मुताबिक जमीन सुधार, सिंचाई व्यवस्था या कृषि उपकरणों जैसे कामों के लिए टर्म लोन को भी KCC से जोड़ा जा सकता है।
KCC का पैसा किन कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं?
KCC की राशि का इस्तेमाल खेती से जुड़े कई जरूरी खर्चों में किया जा सकता है। इसमें—
-
बीज और खाद खरीदना
-
कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री
-
सिंचाई का खर्च
-
मजदूरी का भुगतान
-
फसल उत्पादन से जुड़े खर्च
-
कटाई के बाद के खर्च
-
कृषि उपकरणों से जुड़े पात्र खर्च
शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा सब्जी, फल, फूल, मसाले और अन्य फसलों की खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए भी पात्र किसान इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में e-NWR यानी इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद के आधार पर भी कर्ज की सुविधा मिल सकती है। इससे किसान को फसल कटते ही कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से बचने में मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक आपदा में भी मिल सकती है राहत
अगर प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल प्रभावित होती है, तो लागू नियमों के तहत फसल ऋण के पुनर्गठन जैसी सुविधा मिल सकती है। ऐसे मामलों में ब्याज सब्सिडी या अन्य राहत का लाभ पात्रता और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार दिया जा सकता है।
KCC कहां से बनवा सकते हैं?
किसान KCC के लिए अपने नजदीकी पात्र बैंक या वित्तीय संस्था से संपर्क कर सकते हैं। इनमें—
-
सरकारी बैंक
-
पात्र निजी बैंक
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
-
ग्रामीण सहकारी बैंक
-
स्मॉल फाइनेंस बैंक
-
पात्र प्राथमिक कृषि ऋण समितियां
शामिल हो सकती हैं।
कई बैंक KCC के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं।
KCC के लिए आवेदन कैसे करें?
किसान को सबसे पहले अपने नजदीकी बैंक से KCC के लिए आवेदन करना होगा। बैंक में आवेदन के दौरान पहचान और खेती से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, जमीन के कागजात या पट्टेदारी से जुड़े दस्तावेज सहित अन्य जरूरी कागजात शामिल हो सकते हैं। बैंक किसान की पात्रता, जमीन और दस्तावेजों की जांच करने के बाद क्रेडिट लिमिट तय करता है। जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने पर पात्र किसान को KCC सुविधा दी जा सकती है।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
KCC के लिए आवेदन करने से पहले किसान को अपने बैंक से मौजूदा ब्याज दर, ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट लिमिट, जरूरी दस्तावेज, भुगतान की अवधि और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि योजना की दरें, सीमाएं और पात्रता संबंधी नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।
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खेती के लिए चाहिए पैसा तो ऐसे मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज, जानें कौन कर सकता है आवेदन
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खेती में किसान को बुआई से लेकर फसल की कटाई तक कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों के लिए समय पर पैसों की जरूरत होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की सुविधा उपलब्ध है। इसके जरिए पात्र किसानों को खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक से कर्ज मिल सकता है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत 1998 में हुई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य किसानों को फसल उत्पादन से जुड़े खर्चों के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना था। बाद में योजना का दायरा बढ़ाया गया और डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया गया।
KCC पर ब्याज कितना लगता है?
KCC की अहम विशेषताओं में रियायती ब्याज दर शामिल है। पात्र KCC फसल ऋण पर निर्धारित नियमों के तहत 7 प्रतिशत सालाना की ब्याज दर लागू हो सकती है। समय पर कर्ज चुकाने वाले पात्र किसानों को अतिरिक्त ब्याज छूट मिल सकती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत सालाना तक आ सकती है।
हालांकि ब्याज दर और सब्सिडी का लाभ किसान की पात्रता तथा मौजूदा सरकारी नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए KCC लेने से पहले संबंधित बैंक से वर्तमान ब्याज दर और छूट की जानकारी लेना जरूरी है।
किन किसानों को मिल सकता है KCC?
KCC केवल अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। पात्रता के नियमों के तहत इनमें शामिल हो सकते हैं—
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अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसान
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पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान
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बटाईदार किसान
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किसान समूह
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स्वयं सहायता समूह (SHG)
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संयुक्त देयता समूह (JLG)
इसके अलावा डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़े पात्र लोग भी KCC सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
KCC से कितनी रकम मिल सकती है?
KCC की क्रेडिट सीमा हर किसान के लिए समान नहीं होती। बैंक किसान की जमीन, फसल, खेती का क्षेत्रफल, अनुमानित लागत और जरूरत के आधार पर सीमा तय करता है।
फसल उत्पादन और उससे जुड़े खर्चों के लिए 3 लाख रुपये तक की क्रेडिट सीमा का प्रावधान हो सकता है। पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों के लिए अलग सीमा निर्धारित की जा सकती है।
कुछ छोटे और सीमांत किसानों के लिए फ्लेक्सी KCC जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं। इनकी वास्तविक सीमा बैंक और लागू नियमों के अनुसार तय होती है।
KCC की लिमिट कैसे तय होती है?
KCC को एक तरह की रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी स्वीकृत सीमा के भीतर किसान जरूरत के अनुसार रकम निकाल सकता है और वापस जमा कर सकता है।
क्रेडिट लिमिट तय करते समय फसल की अनुमानित लागत, खेती का क्षेत्रफल, कटाई के बाद के खर्च, कृषि संबंधी जरूरतों और अन्य पात्र खर्चों को ध्यान में रखा जाता है। आगे के वर्षों में लागत बढ़ने की संभावना को देखते हुए लिमिट में निर्धारित नियमों के अनुसार बदलाव किया जा सकता है। जरूरत के मुताबिक जमीन सुधार, सिंचाई व्यवस्था या कृषि उपकरणों जैसे कामों के लिए टर्म लोन को भी KCC से जोड़ा जा सकता है।
KCC का पैसा किन कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं?
KCC की राशि का इस्तेमाल खेती से जुड़े कई जरूरी खर्चों में किया जा सकता है। इसमें—
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बीज और खाद खरीदना
-
कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री
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सिंचाई का खर्च
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मजदूरी का भुगतान
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फसल उत्पादन से जुड़े खर्च
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कटाई के बाद के खर्च
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कृषि उपकरणों से जुड़े पात्र खर्च
शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा सब्जी, फल, फूल, मसाले और अन्य फसलों की खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए भी पात्र किसान इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में e-NWR यानी इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद के आधार पर भी कर्ज की सुविधा मिल सकती है। इससे किसान को फसल कटते ही कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से बचने में मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक आपदा में भी मिल सकती है राहत
अगर प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल प्रभावित होती है, तो लागू नियमों के तहत फसल ऋण के पुनर्गठन जैसी सुविधा मिल सकती है। ऐसे मामलों में ब्याज सब्सिडी या अन्य राहत का लाभ पात्रता और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार दिया जा सकता है।
KCC कहां से बनवा सकते हैं?
किसान KCC के लिए अपने नजदीकी पात्र बैंक या वित्तीय संस्था से संपर्क कर सकते हैं। इनमें—
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सरकारी बैंक
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पात्र निजी बैंक
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
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ग्रामीण सहकारी बैंक
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स्मॉल फाइनेंस बैंक
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पात्र प्राथमिक कृषि ऋण समितियां
शामिल हो सकती हैं।
कई बैंक KCC के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं।
KCC के लिए आवेदन कैसे करें?
किसान को सबसे पहले अपने नजदीकी बैंक से KCC के लिए आवेदन करना होगा। बैंक में आवेदन के दौरान पहचान और खेती से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, जमीन के कागजात या पट्टेदारी से जुड़े दस्तावेज सहित अन्य जरूरी कागजात शामिल हो सकते हैं। बैंक किसान की पात्रता, जमीन और दस्तावेजों की जांच करने के बाद क्रेडिट लिमिट तय करता है। जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने पर पात्र किसान को KCC सुविधा दी जा सकती है।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
KCC के लिए आवेदन करने से पहले किसान को अपने बैंक से मौजूदा ब्याज दर, ब्याज सब्सिडी, क्रेडिट लिमिट, जरूरी दस्तावेज, भुगतान की अवधि और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि योजना की दरें, सीमाएं और पात्रता संबंधी नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।
