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भोपाल-विदिशा फोरलेन को कैबिनेट से मिल सकती है मंजूरी, लागत 1757 करोड़
भोपाल (म.प्र.)
44.83 किमी सड़क होगी चौड़ी, तीन बायपास भी बनेंगे; भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर से कनेक्टिविटी होगी आसान
भोपाल-विदिशा के बीच सफर करने वालों के लिए सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ा बड़ा प्रस्ताव जल्द सामने आ सकता है। मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक में भोपाल-विदिशा मार्ग को फोरलेन करने के प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,757 करोड़ 55 लाख रुपए रखी गई है। मौजूदा करीब 44.83 किलोमीटर लंबे दो लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर के साथ चार लेन में विकसित करने की योजना है। सड़क चौड़ी होने से भोपाल से विदिशा के बीच आने-जाने वाले वाहनों को ज्यादा जगह मिलेगी और मौजूदा ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। खास बात यह है कि इस सड़क को सिर्फ भोपाल और विदिशा के बीच की कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं माना जा रहा।
इसे भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर के लिए फीडर कॉरिडोर के तौर पर भी विकसित करने की योजना है। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। भोपाल की तरफ यह मार्ग अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होता है। यहां से सड़क सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए आगे बढ़ती है और एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन से जुड़ती है। इस पूरे रास्ते का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन करते हैं। भोपाल, रायसेन और विदिशा जिले इस मार्ग से सीधे जुड़े हुए हैं। अभी सड़क दो लेन की है और कई हिस्सों में ट्रैफिक बढ़ने के साथ वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विभागीय आकलन में मार्ग पर यातायात करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट प्रतिदिन बताया गया है। यह आंकड़ा चार लेन सड़क के लिए निर्धारित 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट के मानक से ऊपर है। यानी सड़क पर वाहनों का दबाव पहले ही उस स्तर को पार कर चुका है, जहां चौड़ी सड़क की जरूरत महसूस होती है। आने वाले वर्षों में भोपाल महानगरीय क्षेत्र के विस्तार और आसपास के इलाकों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए ट्रैफिक और बढ़ने का अनुमान है। इसी आधार पर फोरलेन परियोजना को जरूरी माना जा रहा है।
प्रस्तावित सड़क परियोजना में सिर्फ मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने की योजना नहीं है। रास्ते में तीन बायपास भी बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिनकी कुल लंबाई करीब 8.25 किलोमीटर होगी। इन बायपास का उद्देश्य आबादी वाले हिस्सों से गुजरने वाले भारी और तेज यातायात को बाहर निकालना है। अभी जिन स्थानों पर स्थानीय वाहनों, पैदल लोगों और लंबी दूरी के ट्रैफिक का दबाव एक साथ रहता है, वहां बायपास बनने के बाद स्थिति बदल सकती है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है। खासकर गांव और कस्बों के बीच से गुजरने वाले मार्ग पर स्थानीय आवाजाही और हाईवे ट्रैफिक अलग होने से दुर्घटनाओं का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। परियोजना का असर केवल रोजाना के यात्रियों तक नहीं रहेगा।
भोपाल-विदिशा रोड के आसपास कई ऐसे स्थान हैं, जहां सालभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। सांची का विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप, संग्रहालय और अशोक स्तंभ इसी क्षेत्र में आते हैं। विदिशा के पास उदयगिरि की गुफाएं भी ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सड़क के बेहतर होने से भोपाल से सांची और विदिशा की तरफ जाने वाले पर्यटकों को ज्यादा सुगम रास्ता मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर होटल, ढाबे, टैक्सी, गाइड, हस्तशिल्प और दूसरे छोटे कारोबार को भी बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिलने की उम्मीद है। इस मार्ग की एक और खासियत इसका भौगोलिक महत्व है। सड़क करीब 24.550 किलोमीटर के हिस्से में कर्क रेखा से होकर गुजरती है।
यही वजह है कि यह इलाका सामान्य सड़क मार्ग से अलग एक भौगोलिक पहचान भी रखता है। सड़क चौड़ी होने के बाद पर्यटन से जुड़ी आवाजाही बढ़ने की संभावना पर भी ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना को मध्यप्रदेश के बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए नए फोरलेन मार्ग का काम भी अलग स्तर पर चल रहा है। भोपाल-विदिशा मार्ग के प्रस्तावित फोरलेन से इन कनेक्टिविटी परियोजनाओं को जोड़ने पर भोपाल से आगे सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना की दिशा में आने-जाने वाले वाहनों के लिए नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।
खासकर भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ने के बाद इस सड़क की भूमिका और बढ़ जाएगी। अभी इस रूट पर बढ़ता ट्रैफिक, आबादी वाले हिस्सों में वाहनों की आवाजाही और दो लेन की सीमित क्षमता प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। प्रस्तावित फोरलेन में पेव्ड शोल्डर और बायपास जैसी सुविधाएं शामिल होने से इन हिस्सों में सुधार की उम्मीद है। कैबिनेट में प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद जमीन, निर्माण एजेंसी, टेंडर और काम शुरू करने की प्रक्रिया से जुड़े अगले कदम तय किए जाएंगे।
भोपाल-विदिशा फोरलेन को कैबिनेट से मिल सकती है मंजूरी, लागत 1757 करोड़
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल-विदिशा के बीच सफर करने वालों के लिए सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ा बड़ा प्रस्ताव जल्द सामने आ सकता है। मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक में भोपाल-विदिशा मार्ग को फोरलेन करने के प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना है। परियोजना की अनुमानित लागत 1,757 करोड़ 55 लाख रुपए रखी गई है। मौजूदा करीब 44.83 किलोमीटर लंबे दो लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर के साथ चार लेन में विकसित करने की योजना है। सड़क चौड़ी होने से भोपाल से विदिशा के बीच आने-जाने वाले वाहनों को ज्यादा जगह मिलेगी और मौजूदा ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। खास बात यह है कि इस सड़क को सिर्फ भोपाल और विदिशा के बीच की कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं माना जा रहा।
इसे भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर के लिए फीडर कॉरिडोर के तौर पर भी विकसित करने की योजना है। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। भोपाल की तरफ यह मार्ग अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होता है। यहां से सड़क सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए आगे बढ़ती है और एनएच-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन से जुड़ती है। इस पूरे रास्ते का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन करते हैं। भोपाल, रायसेन और विदिशा जिले इस मार्ग से सीधे जुड़े हुए हैं। अभी सड़क दो लेन की है और कई हिस्सों में ट्रैफिक बढ़ने के साथ वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विभागीय आकलन में मार्ग पर यातायात करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट प्रतिदिन बताया गया है। यह आंकड़ा चार लेन सड़क के लिए निर्धारित 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट के मानक से ऊपर है। यानी सड़क पर वाहनों का दबाव पहले ही उस स्तर को पार कर चुका है, जहां चौड़ी सड़क की जरूरत महसूस होती है। आने वाले वर्षों में भोपाल महानगरीय क्षेत्र के विस्तार और आसपास के इलाकों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए ट्रैफिक और बढ़ने का अनुमान है। इसी आधार पर फोरलेन परियोजना को जरूरी माना जा रहा है।
प्रस्तावित सड़क परियोजना में सिर्फ मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने की योजना नहीं है। रास्ते में तीन बायपास भी बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिनकी कुल लंबाई करीब 8.25 किलोमीटर होगी। इन बायपास का उद्देश्य आबादी वाले हिस्सों से गुजरने वाले भारी और तेज यातायात को बाहर निकालना है। अभी जिन स्थानों पर स्थानीय वाहनों, पैदल लोगों और लंबी दूरी के ट्रैफिक का दबाव एक साथ रहता है, वहां बायपास बनने के बाद स्थिति बदल सकती है। सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है। खासकर गांव और कस्बों के बीच से गुजरने वाले मार्ग पर स्थानीय आवाजाही और हाईवे ट्रैफिक अलग होने से दुर्घटनाओं का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। परियोजना का असर केवल रोजाना के यात्रियों तक नहीं रहेगा।
भोपाल-विदिशा रोड के आसपास कई ऐसे स्थान हैं, जहां सालभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। सांची का विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप, संग्रहालय और अशोक स्तंभ इसी क्षेत्र में आते हैं। विदिशा के पास उदयगिरि की गुफाएं भी ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सड़क के बेहतर होने से भोपाल से सांची और विदिशा की तरफ जाने वाले पर्यटकों को ज्यादा सुगम रास्ता मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर होटल, ढाबे, टैक्सी, गाइड, हस्तशिल्प और दूसरे छोटे कारोबार को भी बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिलने की उम्मीद है। इस मार्ग की एक और खासियत इसका भौगोलिक महत्व है। सड़क करीब 24.550 किलोमीटर के हिस्से में कर्क रेखा से होकर गुजरती है।
यही वजह है कि यह इलाका सामान्य सड़क मार्ग से अलग एक भौगोलिक पहचान भी रखता है। सड़क चौड़ी होने के बाद पर्यटन से जुड़ी आवाजाही बढ़ने की संभावना पर भी ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना को मध्यप्रदेश के बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से रायसेन, सांची और विदिशा को बायपास करते हुए नए फोरलेन मार्ग का काम भी अलग स्तर पर चल रहा है। भोपाल-विदिशा मार्ग के प्रस्तावित फोरलेन से इन कनेक्टिविटी परियोजनाओं को जोड़ने पर भोपाल से आगे सागर, दमोह, छतरपुर और पन्ना की दिशा में आने-जाने वाले वाहनों के लिए नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।
खासकर भोपाल-कानपुर हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ने के बाद इस सड़क की भूमिका और बढ़ जाएगी। अभी इस रूट पर बढ़ता ट्रैफिक, आबादी वाले हिस्सों में वाहनों की आवाजाही और दो लेन की सीमित क्षमता प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। प्रस्तावित फोरलेन में पेव्ड शोल्डर और बायपास जैसी सुविधाएं शामिल होने से इन हिस्सों में सुधार की उम्मीद है। कैबिनेट में प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद जमीन, निर्माण एजेंसी, टेंडर और काम शुरू करने की प्रक्रिया से जुड़े अगले कदम तय किए जाएंगे।
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