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शिवसेना सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 2 हफ्ते बाद होगी सुनवाई
Digital Desk
लोकसभा स्पीकर के फैसले को UBT ने दी है चुनौती, कपिल सिब्बल ने मांगी अंतरिम राहत; कोर्ट ने कहा- अभी सभी पक्षों को नोटिस नहीं मिला
नई दिल्ली में शिवसेना (UBT) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सांसदों के विलय को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई फिलहाल आगे बढ़ने से रुक गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने ध्यान दिलाया कि लोकसभा स्पीकर के कार्यालय समेत कुछ संबंधित पक्षों को याचिका पर जारी नोटिस अभी तक नहीं मिला है।
यह याचिका शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत की ओर से दाखिल की गई है। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत UBT के छह सांसदों के शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने को मंजूरी दी गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता की तरफ से अंतरिम राहत की मांग रखी। उनका तर्क था कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं हैं और इस फैसले को न्यायिक जांच के दायरे में देखा जाना चाहिए। फिलहाल अदालत ने मामले को दो सप्ताह बाद सुनने का फैसला किया है।
6 सांसदों के फैसले से बदला लोकसभा का समीकरण
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 18 जुलाई को UBT के छह सांसदों को शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल किए जाने को मंजूरी दी थी। इस फैसले के बाद शिंदे गुट की लोकसभा में संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई, जबकि शिवसेना (UBT) के पास तीन सांसद रह गए। विलय से जुड़े छह सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, नागेश पाटिल आष्टिकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से नोटिस की स्थिति पर ध्यान दिया। अदालत के मुताबिक लोकसभा स्पीकर कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस की तामील अभी बाकी थी। इसी वजह से याचिका पर आगे की सुनवाई फिलहाल दो सप्ताह के लिए टाल दी गई।
शिवसेना सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 2 हफ्ते बाद होगी सुनवाई
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नई दिल्ली में शिवसेना (UBT) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सांसदों के विलय को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई फिलहाल आगे बढ़ने से रुक गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने ध्यान दिलाया कि लोकसभा स्पीकर के कार्यालय समेत कुछ संबंधित पक्षों को याचिका पर जारी नोटिस अभी तक नहीं मिला है।
यह याचिका शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत की ओर से दाखिल की गई है। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत UBT के छह सांसदों के शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने को मंजूरी दी गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता की तरफ से अंतरिम राहत की मांग रखी। उनका तर्क था कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं हैं और इस फैसले को न्यायिक जांच के दायरे में देखा जाना चाहिए। फिलहाल अदालत ने मामले को दो सप्ताह बाद सुनने का फैसला किया है।
6 सांसदों के फैसले से बदला लोकसभा का समीकरण
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 18 जुलाई को UBT के छह सांसदों को शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल किए जाने को मंजूरी दी थी। इस फैसले के बाद शिंदे गुट की लोकसभा में संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई, जबकि शिवसेना (UBT) के पास तीन सांसद रह गए। विलय से जुड़े छह सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, नागेश पाटिल आष्टिकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से नोटिस की स्थिति पर ध्यान दिया। अदालत के मुताबिक लोकसभा स्पीकर कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस की तामील अभी बाकी थी। इसी वजह से याचिका पर आगे की सुनवाई फिलहाल दो सप्ताह के लिए टाल दी गई।
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