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राज्यसभा चुनाव में NDA को बढ़त, 37 में से 22 सीटें जीतीं; हरियाणा में वोटिंग को लेकर देर रात तक हंगामा
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ओडिशा और हरियाणा में क्रॉस वोटिंग से बदला समीकरण, बिहार में चार विपक्षी विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे
देश के 10 राज्यों में हुई राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। चुनाव परिणामों के अनुसार NDA ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी दलों को 15 सीटें मिलीं। इस चुनाव में NDA को कुल 10 सीटों का फायदा हुआ है। पहले इन सीटों में NDA के पास 12 और विपक्ष के पास 25 सीटें थीं।
सोमवार को हुए मतदान और मतगणना के दौरान हरियाणा में सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल देखने को मिली। यहां राज्यसभा की दो सीटों के लिए वोटिंग शाम 4 बजे समाप्त हो गई थी, लेकिन दो कांग्रेस विधायकों के वोटों को लेकर विवाद के कारण मतगणना देर रात 10:25 बजे शुरू हो सकी। पूरी चुनाव प्रक्रिया करीब 16 घंटे तक चली और अंतिम परिणाम रात लगभग 1:30 बजे घोषित किया गया।
हरियाणा में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध विजयी हुए, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में 90 विधायकों को मतदान करना था, लेकिन इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दो विधायकों ने वोट नहीं डाला। इसके अलावा कांग्रेस के चार और भाजपा का एक वोट अमान्य घोषित किया गया, जिसके बाद कुल 83 वोट वैध माने गए।
मतदान के दौरान वोट की गोपनीयता को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए। भाजपा ने कांग्रेस विधायकों पर वोट दिखाने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने भी भाजपा नेताओं पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। इस विवाद के बाद चुनाव आयोग ने एक विधायक का वोट रद्द कर दिया, जिसके कारण परिणाम घोषित होने में लंबा समय लगा।
बिहार में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक समीकरण बदले। यहां पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में विपक्षी महागठबंधन को नुकसान हुआ, क्योंकि कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे। इसका फायदा NDA को मिला और उसके सभी पांच उम्मीदवार जीत गए। इनमें जनता दल (यू) के नेता नीतीश कुमार, भाजपा के नितिन नवीन, उपेन्द्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश राम शामिल हैं।
ओडिशा में चार सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने तीन सीटें जीत लीं, जबकि एक सीट बीजू जनता दल (BJD) के खाते में गई। मतदान के दौरान वहां भी राजनीतिक तनाव देखने को मिला और कुछ स्थानों पर विधायकों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं।
इन चुनावों में 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थित विधायकों के कारण कई राज्यों में परिणाम अप्रत्याशित रहे।
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