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India-US Trade Deal: नई टैरिफ पॉलिसी तक भारत ने रोकी डील, पुरानी शर्तों पर समझौते से साफ इनकार
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली स्थिति; भारत ने कहा—नई टैरिफ संरचना स्पष्ट होने के बाद ही होगा व्यापार समझौता, ताकि निर्यातकों को नुकसान न हो।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर फिलहाल हस्ताक्षर टल गए हैं। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नई वैश्विक टैरिफ नीति को अंतिम रूप नहीं दे देता, तब तक व्यापार समझौते पर साइन नहीं किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि वर्तमान अनिश्चित स्थिति में समझौता करने से भारतीय निर्यातकों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार दोनों देशों की टीमें तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। हालांकि भारत चाहता है कि पहले अमेरिका अपनी नई टैरिफ संरचना घोषित करे, उसके बाद ही समझौते को अंतिम रूप दिया जाए। यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर स्थिति अस्थिर हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली स्थिति
जानकारी के मुताबिक अमेरिका में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कई पुराने टैरिफ को अवैध करार दिया है। इस फैसले के बाद पहले से लागू व्यापारिक शुल्क प्रभावहीन हो गए हैं। फिलहाल अमेरिका अस्थायी तौर पर लगभग 15 प्रतिशत टैरिफ वसूल रहा है।
इस फैसले का असर कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका नई नीति घोषित नहीं करता, तब तक व्यापारिक समझौतों की शर्तें स्पष्ट नहीं होंगी।
पहले मार्च 2026 में होने थे समझौते पर हस्ताक्षर
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में प्रारंभिक व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि मार्च 2026 तक इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे। प्रस्तावित समझौते के तहत भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाने पर सहमति बनी थी।
इसके अलावा रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी शामिल था। कई उत्पादों पर शुल्क कम करने और कुछ गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी।
अन्य देशों की रणनीति भी बदली
अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता का असर अन्य देशों पर भी पड़ा है। मलेशिया ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई अपनी व्यापारिक डील से बाहर निकलने का फैसला किया है। मलेशिया सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहले से तय शर्तें अब लागू नहीं रह गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कुछ और देश भी अपने व्यापार समझौतों की समीक्षा कर सकते हैं।
ट्रंप ने नए टैरिफ लगाने के संकेत दिए
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे किसी न किसी रूप में फिर से टैरिफ लागू करेंगे। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही पुराने मॉडल को रोका हो, लेकिन सरकार के पास अन्य कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
ट्रंप प्रशासन अब ट्रेड एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत नए शुल्क लगाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक टैरिफ नीति तैयार की जा रही है।
भारत की रणनीति फिलहाल स्पष्ट है—नई टैरिफ नीति के बिना कोई जल्दबाजी नहीं। सरकार का कहना है कि अंतिम समझौता तभी होगा जब व्यापारिक नियम स्पष्ट होंगे और भारतीय उद्योगों तथा निर्यातकों के हित सुरक्षित रहेंगे। वैश्विक व्यापार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक यह मामला आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
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