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कर्नाटक में बारिश बुलाने की कवायद शुरू, 28.52 करोड़ की क्लाउड सीडिंग परियोजना को मिली हरी झंडी
भारत
बारिश की कमी और संभावित जल संकट के बीच सरकार ने विशेष विमान से क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू किया; जरूरत के हिसाब से सूखे इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में ऑपरेशन किया जाएगा।
कर्नाटक में बारिश की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने क्लाउड सीडिंग प्रोग्राम शुरू किया है। जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने शुक्रवार को बेंगलुरु के HAL एयरपोर्ट से क्लाउड सीडिंग के लिए तैयार विशेष विमान को हरी झंडी दिखाई। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य संभावित जल संकट को कम करना और किसानों को राहत पहुंचाना है।सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 28.52 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है। कार्यक्रम को कर्नाटक नीरावरी निगम लिमिटेड (KNNL) और कर्नाटक स्टेट नेचुरल डिजास्टर मॉनिटरिंग सेंटर (KSNDMC) मिलकर लागू करेंगे।
कैसे तय होगा विमान कहां जाएगा?
क्लाउड सीडिंग के लिए पहले से किसी एक जिले को तय नहीं किया गया है। तकनीकी टीम मौसम की स्थिति और उपलब्ध बादलों के आधार पर अभियान का स्थान तय करेगी। बारिश की कमी वाले इलाके, बड़े जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्र और कृषि संकट से प्रभावित जिलों को प्राथमिकता दी जा सकती है। मौसम संबंधी जानकारी हर दो घंटे में अपडेट की जाएगी, जिसके आधार पर विमान की तैनाती का फैसला होगा।
बादलों में क्या किया जाएगा?
क्लाउड सीडिंग में ऐसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है जो उपयुक्त बादलों में पानी की बूंदों के जमाव या आकार बढ़ने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं। इस्तेमाल होने वाला पदार्थ बादल के तापमान और प्रकृति पर निर्भर करता है। सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड, ड्राई आइस और सोडियम क्लोराइड जैसे एजेंट क्लाउड सीडिंग में इस्तेमाल किए जाते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए मौसम की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। तकनीकी टीम डॉप्लर रडार के जरिए बादलों की घनत्व, हवा की गति और दूसरी मौसमी परिस्थितियों पर नजर रखेगी। पर्याप्त नमी और बारिश की क्षमता वाले बादल मिलने पर ही विमान से सीडिंग एजेंट छोड़े जाएंगे।
सरकार के सामने कितना बड़ा संकट?
राज्य सरकार ने बारिश की कमी के बीच संभावित गंभीर सूखे की चिंता जताई है। जल संसाधन मंत्री ने कहा है कि अगर मानसून समाप्त होने से पहले पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में जल संकट बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले किए गए क्लाउड सीडिंग प्रयास में करीब 35 प्रतिशत सफलता का दावा किया गया था।
कर्नाटक सरकार ने इस अभियान की निगरानी के लिए दो समितियां भी बनाई हैं। एक समिति परियोजना के क्रियान्वयन और समीक्षा पर नजर रखेगी, जबकि आठ सदस्यीय तकनीकी समिति क्लाउड सीडिंग के प्रभाव और मौसम संबंधी आंकड़ों का आकलन करेगी।
मौसम विशेषज्ञों ने पहले जताई थी आपत्ति
क्लाउड सीडिंग शुरू होने से पहले मौसम विशेषज्ञों ने इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए थे। 2 सितंबर की एक रिपोर्ट में वरिष्ठ IMD अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि उस समय क्लाउड सीडिंग के लिए जरूरी घने क्यूम्यलोनिंबस और क्यूम्यलस बादल पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं थे। विशेषज्ञों ने परिस्थितियां अनुकूल होने तक अभियान टालने की सलाह भी दी थी। अब राज्य सरकार ने मौसम की रियल-टाइम स्थिति के आधार पर अभियान चलाने का फैसला किया है। उपयुक्त बादल मिलने पर ही विमान को संबंधित क्षेत्र में भेजा जाएगा।
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