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शरद पवार गुट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, NCP-शरदचंद्र पवार नाम और तुरही चिन्ह पर जारी रहेगी व्यवस्था
Digital Desk
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों से शरद पवार गुट को पार्टी के नाम और निर्धारित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल में राहत मिली है। अंतिम फैसला अभी बाकी है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विभाजन के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में शरद पवार गुट को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत के अंतरिम निर्देशों के तहत “Nationalist Congress Party–Sharadchandra Pawar” नाम और “Man Blowing Turha” चुनाव चिह्न का इस्तेमाल जारी रखने की व्यवस्था है। हालांकि, यह राहत अंतिम फैसला नहीं है और विवाद से जुड़ी मुख्य कार्यवाही अभी अदालत के सामने लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2024 के अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया था कि शरद पवार गुट आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए NCP-Sharadchandra Pawar नाम का इस्तेमाल कर सकता है। इसी के साथ तुरही बजाता हुआ आदमी चिह्न उसके लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोगों को भी इन अंतरिम निर्देशों का पालन करने को कहा गया था।
NCP में विभाजन के बाद शुरू हुआ विवाद
NCP में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को मूल NCP का नाम और घड़ी चुनाव चिह्न दिया था। इसके बाद शरद पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अपने लिए अलग नाम व चुनाव चिह्न की अंतरिम व्यवस्था मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शरद पवार गुट को अलग नाम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की अनुमति दी। साथ ही अजित पवार गुट को शरद पवार की तस्वीर और नाम के इस्तेमाल से परहेज करने संबंधी निर्देश भी दिए गए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि घड़ी चुनाव चिह्न से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अजित पवार गुट को अपने चुनावी प्रचार में इस स्थिति का उल्लेख करने वाला डिस्क्लेमर देना होगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
शरद पवार गुट के लिए राहत का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि NCP-Sharadchandra Pawar नाम और तुरही चिह्न उसकी मौजूदा राजनीतिक पहचान बन चुके हैं। 2026 में भी पार्टी इसी नाम से सक्रिय है और उसके नेता महाराष्ट्र की राजनीति में इसी पहचान के साथ चुनावी गतिविधियां कर रहे हैं। हालांकि, इसे पार्टी के नाम या चुनाव चिह्न पर अंतिम न्यायिक फैसला मानना सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश में भी नाम और तुरही चिह्न की व्यवस्था को मुख्य मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रखा गया था।
महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के बीच यह कानूनी विवाद इसलिए अहम है क्योंकि पार्टी की पहचान, मतदाताओं के बीच नाम की पहचान और चुनाव चिह्न—तीनों का सीधा संबंध चुनावी राजनीति से है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला दोनों खेमों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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