तेलंगाना विधानसभा में हंगामा, BRS के 21 विधायक निलंबित; दलित ‘पवित्रीकरण’ विवाद से बढ़ा टकराव

Digital Desk

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सिद्धिपेट के एर्रावेली में कथित ‘पवित्रीकरण’ की घटना और BRS नेताओं के विरोध के बीच विधानसभा में लगातार तीसरे दिन हंगामा हुआ। स्पीकर ने 21 BRS विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया।

तेलंगाना विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। सदन में हंगामा और कार्यवाही बाधित करने के आरोप के बाद BRS के 21 विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित नेताओं में BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव भी शामिल हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एर्रावेली में BRS प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के फार्महाउस के पास हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और BRS के बीच विवाद लगातार गहरा रहा है। विवाद का एक प्रमुख हिस्सा उस कथित ‘पवित्रीकरण’ की घटना है, जिसमें प्रदर्शन के बाद वहां हल्दी वाला पानी छिड़के जाने का आरोप है। कांग्रेस नेताओं ने इसे दलितों का अपमान और जातिगत भेदभाव से जोड़कर निशाना बनाया है। 

सदन में क्यों बढ़ा विवाद?

रिपोर्टों के मुताबिक, BRS विधायक अपनी महिला विधायकों के साथ पुलिस के कथित दुर्व्यवहार और KCR को लेकर कांग्रेस विधायक की कथित टिप्पणी पर विधानसभा में चर्चा की मांग कर रहे थे। BRS सदस्यों ने नारेबाजी की और सदन के वेल में पहुंचकर विरोध किया, जिसके बाद कार्यवाही बाधित हुई। वहीं कांग्रेस सदस्यों ने एर्रावेली में हुए कथित ‘पवित्रीकरण’ के मुद्दे को सदन में उठाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दलित कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद किसी स्थान को ‘शुद्ध’ करने की कोशिश का संदेश भेदभावपूर्ण है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है। 

BRS का कांग्रेस पर पलटवार

BRS ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार वास्तविक जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए दलित मुद्दे को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है। BRS ने पुलिस कार्रवाई और अपने विधायकों के निलंबन पर भी सवाल उठाए हैं। BRS नेताओं ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भी हस्तक्षेप की मांग की है और निलंबन से संबंधित रिपोर्ट मांगी है। पार्टी का कहना है कि कार्रवाई की वैधता और प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए। 

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विवाद की पृष्ठभूमि में कई घटनाएं

विधानसभा में मौजूदा टकराव अचानक नहीं बढ़ा। इससे पहले BRS के दो MLC के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर कार्रवाई हुई थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था और विधानसभा में इस मुद्दे पर प्रस्ताव भी पारित हुआ था। इसके बाद विरोध प्रदर्शन KCR के एर्रावेली स्थित फार्महाउस तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम ने तेलंगाना की राजनीति में कांग्रेस और BRS के बीच पहले से जारी टकराव को और तीखा कर दिया है। निलंबन के बाद विपक्षी दल ने इसे विधानसभा में अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही चलाना मुश्किल हो रहा था।

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