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यूपी चुनाव 2027: 115 सीटों पर योगी का फोकस, ₹38 हजार करोड़ की परियोजनाओं से सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश
Digital Desk
मई से अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 44 से ज्यादा जिलों का दौरा कर चुके हैं। 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी ₹38,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अपना जनसंपर्क और विकास परियोजनाओं का अभियान तेज कर दिया है। मई 2026 से अब तक मुख्यमंत्री 75 में से 44 से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी ₹38,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया है।
इन परियोजनाओं में सड़क, स्कूल, अस्पताल, बिजली और पानी की सुविधाओं के साथ पंचायत भवन, पर्यटन और कौशल विकास से जुड़े काम शामिल हैं। कार्यक्रमों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता वितरित करने के साथ संबंधित जिलों में पिछले साढ़े नौ वर्षों के विकास कार्यों को भी प्रचारित किया जा रहा है।
115 सीटों का चुनावी महत्व
इन 115 विधानसभा क्षेत्रों का चयन राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इनमें से 67 सीटों पर SP-कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था, जबकि बीजेपी 47 और उसकी सहयोगी RLD एक विधानसभा क्षेत्र में आगे रही थी। यानी करीब 58 प्रतिशत लक्षित सीटों पर विपक्षी गठबंधन को बढ़त मिली थी। यह तस्वीर 2022 के विधानसभा चुनाव से अलग थी। उस चुनाव में बीजेपी ने इन 115 क्षेत्रों में 71 सीटें जीती थीं। SP को 33 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी ने क्रमशः तीन और दो सीटें जीती थीं।
पूरे उत्तर प्रदेश की बात करें तो 2022 में बीजेपी ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 255 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को 111 सीटें मिली थीं। 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की लोकसभा सीटों की संख्या 62 से घटकर 33 रह गई, जबकि SP ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं।
रायबरेली, मैनपुरी और अयोध्या पर खास जोर
मुख्यमंत्री के हालिया दौरों में विपक्ष के प्रभाव वाले इलाके भी प्रमुख रहे हैं। 24 अगस्त को रायबरेली में 879 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। ये काम बछरावां, हरचंदपुर और रायबरेली विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े थे। 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इन तीनों क्षेत्रों में आगे रही थी। इसी तरह 26 जुलाई को मैनपुरी में 682 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की घोषणा की गई। मैनपुरी और करहल विधानसभा क्षेत्रों में SP का मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। करहल से अखिलेश यादव 2022 में विधायक चुने गए थे। अयोध्या क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री ने बिकापुर, रुदौली और दरियाबाद विधानसभा क्षेत्रों के लिए विकास परियोजनाएं शुरू कीं। 2024 लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में SP उम्मीदवार अवधेश प्रसाद को बढ़त मिली थी।
विकास और चुनावी रणनीति का मेल
सरकार इन कार्यक्रमों को विकास कार्यों के रूप में पेश कर रही है, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में इनका महत्व भी साफ है। बीजेपी को 2024 लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान के बाद 2027 विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करनी है। ऐसे में विपक्षी प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों में सीधे विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाना सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा दिखाई देता है। हालांकि, इन परियोजनाओं की घोषणा या शिलान्यास को अपने आप चुनावी सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता। 2027 के चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार, संगठन, विपक्षी गठबंधन और मतदाताओं का रुख भी निर्णायक होंगे।
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