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कर्नाटक में सूखे का दायरा बढ़ सकता है: CM शिवकुमार बोले- हर वास्तविक प्रभावित इलाके की होगी समीक्षा
भारत
सरकार ने पहले चरण में 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, 32 अन्य तालुकों की जांच जारी; 1 जून से 26 अगस्त तक सामान्य से 30% कम बारिश
कर्नाटक में इस साल मानसून की कमजोर स्थिति का असर अब सूखे की सरकारी समीक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि जिन तालुकों में वास्तविक सूखे की स्थिति है, उनका दोबारा आकलन किया जाएगा और पात्र पाए जाने वाले क्षेत्रों को सूची में शामिल किया जा सकता है। राज्य सरकार ने पहले चरण में 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इनमें 89 तालुक गंभीर और 12 मध्यम स्तर के सूखे से प्रभावित बताए गए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री के ताजा बयान में 102 तालुकों का भी उल्लेख किया गया है, जबकि 32 अन्य तालुक अभी समीक्षा के दायरे में हैं।
32 तालुकों पर चल रही जांच
सरकार के मुताबिक कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां शुरुआती आकलन के बाद भी सूखे की स्थिति को लेकर और जानकारी जुटाई जा रही है। इनमें बेंगलुरु ग्रामीण, दावणगेरे, मांड्या, रायचूर, चिक्कमगलुरु, कोडागु और उत्तर कन्नड़ के कुछ तालुक शामिल हैं।
सूखा घोषित करने के लिए केवल बारिश की कमी को आधार नहीं बनाया जाता। अधिकारियों को फसल नुकसान, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और लंबे समय तक चले शुष्क दौर जैसे कई मानकों का आकलन करना होता है। राज्य सरकार ने कहा है कि इन आकलनों के आधार पर अतिरिक्त तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है।
26 अगस्त तक 30% बारिश की कमी
कर्नाटक में इस मानसून सीजन में बारिश की कमी सूखे की चिंता की मुख्य वजह बनी हुई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 26 अगस्त के बीच 465 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य आंकड़ा 666 मिमी है। यानी राज्य में करीब 30% बारिश की कमी रही। क्षेत्रवार स्थिति भी अलग-अलग रही। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश की कमी 41%, मलनाड क्षेत्र में 35%, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 31% और तटीय क्षेत्र में 24% बताई गई है।
सूखे की पहचान के लिए फील्ड जांच
राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन केवल मौसम संबंधी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान और जमीन की स्थिति की जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार, 134 तालुकों में लगातार तीन सप्ताह से अधिक समय तक शुष्क दौर की स्थिति सामने आई थी, जिसके बाद विस्तृत आकलन किया गया। ग्राउंड-लेवल जांच के बाद पहले चरण में 101 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए गए, जबकि 32 अन्य को समीक्षा के लिए रखा गया।
खेती और पानी की चिंता
कम बारिश का असर कृषि के साथ-साथ मिट्टी की नमी और भूजल पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने बताया है कि कई तालुकों में मिट्टी की नमी में कमी और वनस्पति तनाव दर्ज किया गया है। सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रभावित गांवों में जरूरत के अनुसार टैंकर और निजी बोरवेल के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसरों पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि पानी और आजीविका के संकट के कारण लोगों को दूसरे क्षेत्रों में पलायन न करना पड़े।
सरकार ने 15 दिन में समीक्षा का संकेत दिया
राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति की लगातार समीक्षा करने की बात कही है। पहले घोषित तालुकों में भी परिस्थितियों के अनुसार स्थिति का दोबारा आकलन किया जाएगा और नए आंकड़ों के आधार पर सूची में बदलाव संभव है। कर्नाटक सरकार ने सूखे से निपटने के लिए ₹635 करोड़ का प्रावधान किए जाने की जानकारी भी दी है। राज्य केंद्र सरकार से राहत सहायता मांगने के लिए ज्ञापन तैयार करने की प्रक्रिया में है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी अधिकारियों को वास्तविक स्थिति की जांच करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी ऐसे तालुक को, जहां निर्धारित मानकों के अनुसार सूखे की स्थिति साबित होती है, समीक्षा से बाहर नहीं रखा जाएगा।
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