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23 अगस्त का पंचांग: पुत्रदा एकादशी पर जानें शुभ-अशुभ समय
धर्म डेस्क
रविवार को श्रावण शुक्ल एकादशी, मूल नक्षत्र और धनु राशि में चंद्रमा; दिल्ली के अनुसार शाम 5:16 से 6:54 बजे तक राहुकाल
23 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे शुरू हो चुकी होगी और 24 अगस्त की सुबह 4:18-4:19 बजे तक रहेगी। इसलिए 23 अगस्त को ही एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस दिन को श्रावण पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
23 अगस्त को मूल नक्षत्र शाम करीब 5:44-5:45 बजे तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा धनु राशि में रहेगा, जबकि सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। दिन रविवार होने से सूर्य देव की पूजा का भी महत्व रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार एकादशी तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी और अगले दिन द्वादशी शुरू होगी। एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित तिथि माना जाता है। पुत्रदा एकादशी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, विष्णु पूजा करते हैं और कई जगहों पर विष्णुसहस्रनाम, भजन-कीर्तन तथा व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
23 अगस्त 2026 का पंचांग
वार: रविवार
तिथि: शुक्ल पक्ष एकादशी
एकादशी समाप्त: 24 अगस्त सुबह करीब 4:19 बजे
नक्षत्र: मूल, शाम करीब 5:45 बजे तक
इसके बाद: पूर्वाषाढ़ा
योग: विष्कम्भ के बाद प्रीति
करण: वणिज के बाद विष्टि
चंद्र राशि: धनु
सूर्य राशि: सिंह
मास: श्रावण
पक्ष: शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
पर्व/व्रत: श्रावण पुत्रदा एकादशी
दिल्ली के हिसाब से 23 अगस्त को सूर्योदय करीब सुबह 5:55 बजे और सूर्यास्त करीब शाम 6:54-6:55 बजे रहेगा। राहुकाल शाम 5:16 बजे से 6:54 बजे तक माना गया है। इस दौरान नए शुभ काम शुरू करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। यमगंड करीब दोपहर 12:30 बजे से 2:04 बजे और गुलिक काल करीब दोपहर 3:40 बजे से 5:16 बजे तक रह सकता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त करीब सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। हालांकि मुहूर्त और राहुकाल शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए किसी खास शहर में पूजा या महत्वपूर्ण काम के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा।
पुत्रदा एकादशी पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। पूजा में पीले फूल, तुलसी दल और फल आदि अर्पित किए जाते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या निर्धारित उपवास करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली से जोड़ा जाता है। कई भक्त इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। हालांकि व्रत की विधि अलग-अलग संप्रदाय और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 अगस्त को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग जानकारी में पारण का समय करीब दोपहर 1:41 बजे से 4:16 बजे के बीच बताया गया है, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए। 23 अगस्त को पूजा या शुभ कार्य के लिए भी स्थानीय समय को प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि पंचांग के समय स्थान बदलने के साथ बदलते हैं।
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