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भारत में अल्ट्रा-रिच बढ़े, फैमिली ऑफिस कारोबार को मिलेगी रफ्तार
Sandeep Patel
भारत में UHNI आबादी, कारोबारी निकासी और पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण से फैमिली ऑफिस क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और निवेश रणनीतियां बदल रही हैं।
भारत में बेहद अमीर लोगों और परिवारों की संख्या बढ़ने के साथ देश का फैमिली ऑफिस क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। निवेश प्रबंधन, संपत्ति संरक्षण, उत्तराधिकार योजना और पारिवारिक प्रशासन के लिए अमीर परिवार अब पेशेवर संस्थागत ढांचे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
जूलियस बेयर और EY की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फैमिली ऑफिस की संख्या 2018 में करीब 45 से बढ़कर 2024 तक लगभग 300 हो गई। रिपोर्ट में 30 मिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति वाले भारतीय परिवारों की बढ़ती संख्या और अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNI) वर्ग के विस्तार को भी रेखांकित किया गया है।
IPO, निजी इक्विटी से निकासी, विलय-अधिग्रहण और कारोबार में हिस्सेदारी बेचने जैसी घटनाओं ने उद्यमियों को अपनी व्यावसायिक संपत्ति को निवेश योग्य पारिवारिक पूंजी में बदलने का अवसर दिया है।
तेजी से बढ़ रही संपत्ति
भारत में नए अल्ट्रा-रिच परिवारों का आधार तेजी से बढ़ रहा है।
जूलियस बेयर-EY अध्ययन के अनुसार, सफल उद्यमियों और कारोबार से मिलने वाली बड़ी पूंजी इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल है। कई संस्थापक अपने कारोबार को सार्वजनिक या निजी पूंजी बाजार तक पहुंचाने के बाद बड़ी व्यक्तिगत संपत्ति तैयार कर रहे हैं।
इस बदलाव ने फैमिली ऑफिस की भूमिका भी बदल दी है। ये संस्थाएं अब केवल संपत्ति सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश और कारोबारी रणनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
फैमिली ऑफिस की संख्या बढ़ी
भारत में फैमिली ऑफिस का विस्तार इस बदलाव का प्रमुख संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में लगभग 45 फैमिली ऑफिस थे, जो 2024 तक बढ़कर करीब 300 हो गए।
अमीर परिवार निवेश प्रबंधन के साथ कर योजना, उत्तराधिकार, पारिवारिक प्रशासन और परोपकारी गतिविधियों के लिए भी इन संस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई परिवार अब फैमिली संविधान, ट्रस्ट, वसीयत और पेशेवर निवेश टीमों जैसे औपचारिक ढांचे भी अपना रहे हैं।
वैकल्पिक निवेश पर जोर
भारतीय फैमिली ऑफिस पारंपरिक निवेश विकल्पों से आगे बढ़ रहे हैं।
सूचीबद्ध शेयरों, फिक्स्ड इनकम और रियल एस्टेट के साथ निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट क्रेडिट, वैश्विक शेयर बाजार और अन्य वैकल्पिक निवेशों में रुचि बढ़ी है।
हालांकि, यह बदलाव सभी परिवारों में समान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 57 प्रतिशत फैमिली ऑफिस अपने पोर्टफोलियो का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटल में लगाते हैं।
इससे पता चलता है कि उच्च रिटर्न की तलाश के साथ पूंजी संरक्षण अभी भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।
उद्यमी बदल रहे निवेश
पहली पीढ़ी के उद्यमी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विरासत में मिली संपत्ति की तुलना में नए कारोबार से बनी संपत्ति के मालिक उद्यमिता, जोखिम और उभरते क्षेत्रों से अधिक परिचित होते हैं। इसलिए उनके फैमिली ऑफिस स्टार्टअप, तकनीक और तेजी से बढ़ते उद्योगों में निवेश करने में अधिक रुचि दिखा सकते हैं।
EY के अनुसार, पहली पीढ़ी के उद्यमी उभरते क्षेत्रों और उच्च-विकास वाले अवसरों को तलाशने के लिए अपेक्षाकृत अधिक तैयार रहते हैं।
महानगरों से बाहर भी संपत्ति
भारत में संपत्ति का विस्तार अब केवल मुंबई और दिल्ली जैसे पारंपरिक आर्थिक केंद्रों तक सीमित नहीं है।
उद्यमिता के नए केंद्र उभरने के साथ दूसरे शहरों में भी बड़ी संपत्ति बनाने वाले कारोबारी परिवारों की संख्या बढ़ रही है।
इससे महानगरों के बाहर पेशेवर वेल्थ मैनेजर, कर सलाहकार, वकील, फंड मैनेजर और पारिवारिक प्रशासन विशेषज्ञों की मांग बढ़ सकती है।
फैमिली ऑफिस का विस्तार देश के निजी पूंजी बाजार को भी व्यापक आधार दे सकता है।
1.5 ट्रिलियन डॉलर का हस्तांतरण
आने वाले वर्षों में पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण भी फैमिली ऑफिस क्षेत्र को गति दे सकता है।
जूलियस बेयर-EY की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में भारत में करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित हो सकती है।
इतने बड़े हस्तांतरण से उत्तराधिकार योजना, पारिवारिक प्रशासन, ट्रस्ट और पेशेवर निवेश प्रबंधन की मांग बढ़ने की संभावना है।
परिवारों के लिए चुनौती केवल संपत्ति का हस्तांतरण नहीं, बल्कि उसे अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित और उत्पादक बनाए रखना भी होगी।
विदेशी निवेश बढ़ रहा
भारतीय फैमिली ऑफिस का निवेश दृष्टिकोण भी तेजी से वैश्विक हो रहा है।
रिपोर्ट में वैश्विक शेयरों, विदेशी बाजारों और वैकल्पिक परिसंपत्तियों में बढ़ती रुचि का उल्लेख किया गया है। भारत में GIFT City भी अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है।
भारत की बढ़ती UHNI आबादी और आने वाले बड़े पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण के बीच फैमिली ऑफिस का विस्तार देश के निजी पूंजी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले वर्षों में केवल नई संपत्ति का निर्माण ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि उसका पेशेवर प्रबंधन, निवेश, संरक्षण और अगली पीढ़ी तक व्यवस्थित हस्तांतरण भी उतना ही अहम रहेगा।
भारत में अल्ट्रा-रिच बढ़े, फैमिली ऑफिस कारोबार को मिलेगी रफ्तार
Sandeep Patel
भारत में बेहद अमीर लोगों और परिवारों की संख्या बढ़ने के साथ देश का फैमिली ऑफिस क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। निवेश प्रबंधन, संपत्ति संरक्षण, उत्तराधिकार योजना और पारिवारिक प्रशासन के लिए अमीर परिवार अब पेशेवर संस्थागत ढांचे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
जूलियस बेयर और EY की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फैमिली ऑफिस की संख्या 2018 में करीब 45 से बढ़कर 2024 तक लगभग 300 हो गई। रिपोर्ट में 30 मिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति वाले भारतीय परिवारों की बढ़ती संख्या और अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNI) वर्ग के विस्तार को भी रेखांकित किया गया है।
IPO, निजी इक्विटी से निकासी, विलय-अधिग्रहण और कारोबार में हिस्सेदारी बेचने जैसी घटनाओं ने उद्यमियों को अपनी व्यावसायिक संपत्ति को निवेश योग्य पारिवारिक पूंजी में बदलने का अवसर दिया है।
तेजी से बढ़ रही संपत्ति
भारत में नए अल्ट्रा-रिच परिवारों का आधार तेजी से बढ़ रहा है।
जूलियस बेयर-EY अध्ययन के अनुसार, सफल उद्यमियों और कारोबार से मिलने वाली बड़ी पूंजी इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल है। कई संस्थापक अपने कारोबार को सार्वजनिक या निजी पूंजी बाजार तक पहुंचाने के बाद बड़ी व्यक्तिगत संपत्ति तैयार कर रहे हैं।
इस बदलाव ने फैमिली ऑफिस की भूमिका भी बदल दी है। ये संस्थाएं अब केवल संपत्ति सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश और कारोबारी रणनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
फैमिली ऑफिस की संख्या बढ़ी
भारत में फैमिली ऑफिस का विस्तार इस बदलाव का प्रमुख संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में लगभग 45 फैमिली ऑफिस थे, जो 2024 तक बढ़कर करीब 300 हो गए।
अमीर परिवार निवेश प्रबंधन के साथ कर योजना, उत्तराधिकार, पारिवारिक प्रशासन और परोपकारी गतिविधियों के लिए भी इन संस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई परिवार अब फैमिली संविधान, ट्रस्ट, वसीयत और पेशेवर निवेश टीमों जैसे औपचारिक ढांचे भी अपना रहे हैं।
वैकल्पिक निवेश पर जोर
भारतीय फैमिली ऑफिस पारंपरिक निवेश विकल्पों से आगे बढ़ रहे हैं।
सूचीबद्ध शेयरों, फिक्स्ड इनकम और रियल एस्टेट के साथ निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट क्रेडिट, वैश्विक शेयर बाजार और अन्य वैकल्पिक निवेशों में रुचि बढ़ी है।
हालांकि, यह बदलाव सभी परिवारों में समान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 57 प्रतिशत फैमिली ऑफिस अपने पोर्टफोलियो का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटल में लगाते हैं।
इससे पता चलता है कि उच्च रिटर्न की तलाश के साथ पूंजी संरक्षण अभी भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।
उद्यमी बदल रहे निवेश
पहली पीढ़ी के उद्यमी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विरासत में मिली संपत्ति की तुलना में नए कारोबार से बनी संपत्ति के मालिक उद्यमिता, जोखिम और उभरते क्षेत्रों से अधिक परिचित होते हैं। इसलिए उनके फैमिली ऑफिस स्टार्टअप, तकनीक और तेजी से बढ़ते उद्योगों में निवेश करने में अधिक रुचि दिखा सकते हैं।
EY के अनुसार, पहली पीढ़ी के उद्यमी उभरते क्षेत्रों और उच्च-विकास वाले अवसरों को तलाशने के लिए अपेक्षाकृत अधिक तैयार रहते हैं।
महानगरों से बाहर भी संपत्ति
भारत में संपत्ति का विस्तार अब केवल मुंबई और दिल्ली जैसे पारंपरिक आर्थिक केंद्रों तक सीमित नहीं है।
उद्यमिता के नए केंद्र उभरने के साथ दूसरे शहरों में भी बड़ी संपत्ति बनाने वाले कारोबारी परिवारों की संख्या बढ़ रही है।
इससे महानगरों के बाहर पेशेवर वेल्थ मैनेजर, कर सलाहकार, वकील, फंड मैनेजर और पारिवारिक प्रशासन विशेषज्ञों की मांग बढ़ सकती है।
फैमिली ऑफिस का विस्तार देश के निजी पूंजी बाजार को भी व्यापक आधार दे सकता है।
1.5 ट्रिलियन डॉलर का हस्तांतरण
आने वाले वर्षों में पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण भी फैमिली ऑफिस क्षेत्र को गति दे सकता है।
जूलियस बेयर-EY की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में भारत में करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित हो सकती है।
इतने बड़े हस्तांतरण से उत्तराधिकार योजना, पारिवारिक प्रशासन, ट्रस्ट और पेशेवर निवेश प्रबंधन की मांग बढ़ने की संभावना है।
परिवारों के लिए चुनौती केवल संपत्ति का हस्तांतरण नहीं, बल्कि उसे अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित और उत्पादक बनाए रखना भी होगी।
विदेशी निवेश बढ़ रहा
भारतीय फैमिली ऑफिस का निवेश दृष्टिकोण भी तेजी से वैश्विक हो रहा है।
रिपोर्ट में वैश्विक शेयरों, विदेशी बाजारों और वैकल्पिक परिसंपत्तियों में बढ़ती रुचि का उल्लेख किया गया है। भारत में GIFT City भी अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है।
भारत की बढ़ती UHNI आबादी और आने वाले बड़े पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण के बीच फैमिली ऑफिस का विस्तार देश के निजी पूंजी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले वर्षों में केवल नई संपत्ति का निर्माण ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि उसका पेशेवर प्रबंधन, निवेश, संरक्षण और अगली पीढ़ी तक व्यवस्थित हस्तांतरण भी उतना ही अहम रहेगा।
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