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एनीमिया जागरूकता पर लिखी पुस्तक ‘एनीमिया के लिए होम्योपैथी’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन
Digital desk
एनीमिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, इसकी रोकथाम, पोषण और समग्र स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक एवं लेखक प्रो. डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी (डॉ. ए.के. द्विवेदी) द्वारा लिखित पुस्तक ‘एनीमिया के लिए होम्योपैथी’ के द्वितीय संस्करण का नई दिल्ली में विमोचन किया गया।
पुस्तक के प्रथम संस्करण का विमोचन करीब दो वर्ष पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। प्रथम संस्करण को पाठकों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसकी सभी प्रतियां समाप्त हो गईं। पुस्तक की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए अब इसे आवश्यक संशोधनों, नई जानकारियों और अतिरिक्त सामग्री के साथ दूसरे संस्करण के रूप में प्रकाशित किया गया है।
द्वितीय संस्करण का विमोचन नई दिल्ली में भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने की। इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई, कार्यपरिषद सदस्य प्रो. डॉ. सखाराम मुजाल्दा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
एनीमिया के विभिन्न प्रकारों पर जानकारी
डॉ. द्विवेदी के अनुसार, पुस्तक में एनीमिया के विभिन्न प्रकारों से जुड़ी जानकारी को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसमें अप्लास्टिक एनीमिया, सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया और विटामिन डेफिशिएंसी एनीमिया सहित प्रमुख प्रकारों के कारण, लक्षण, बचाव और पोषण संबंधी जानकारी शामिल है।
पुस्तक में भारतीय खानपान और पोषण से जुड़े उपयोगी पहलुओं के साथ होम्योपैथिक प्रबंधन के दृष्टिकोण पर भी विस्तृत सामग्री दी गई है।
स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख
पुस्तक को केवल चिकित्सा संबंधी जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें एनीमिया जागरूकता अभियानों, निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविरों और सामाजिक सेवा गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी शामिल की गई है। इसके अलावा मरीजों के अनुभवों को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है।

डॉ. द्विवेदी लंबे समय से एनीमिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियानों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि एनीमिया को केवल एक चिकित्सकीय समस्या के रूप में देखने के बजाय इसे पोषण, जागरूकता और जनस्वास्थ्य से जुड़े व्यापक विषय के रूप में समझने की जरूरत है।
‘एनीमिया मुक्त भारत’ पर जोर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में जनजागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुस्तक के माध्यम से एनीमिया से संबंधित प्रमाणिक और उपयोगी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
नई दिल्ली में पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन एनीमिया के प्रति जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
एनीमिया जागरूकता पर लिखी पुस्तक ‘एनीमिया के लिए होम्योपैथी’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन
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पुस्तक के प्रथम संस्करण का विमोचन करीब दो वर्ष पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। प्रथम संस्करण को पाठकों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसकी सभी प्रतियां समाप्त हो गईं। पुस्तक की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए अब इसे आवश्यक संशोधनों, नई जानकारियों और अतिरिक्त सामग्री के साथ दूसरे संस्करण के रूप में प्रकाशित किया गया है।
द्वितीय संस्करण का विमोचन नई दिल्ली में भारत सरकार के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने की। इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई, कार्यपरिषद सदस्य प्रो. डॉ. सखाराम मुजाल्दा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
एनीमिया के विभिन्न प्रकारों पर जानकारी
डॉ. द्विवेदी के अनुसार, पुस्तक में एनीमिया के विभिन्न प्रकारों से जुड़ी जानकारी को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसमें अप्लास्टिक एनीमिया, सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया और विटामिन डेफिशिएंसी एनीमिया सहित प्रमुख प्रकारों के कारण, लक्षण, बचाव और पोषण संबंधी जानकारी शामिल है।
पुस्तक में भारतीय खानपान और पोषण से जुड़े उपयोगी पहलुओं के साथ होम्योपैथिक प्रबंधन के दृष्टिकोण पर भी विस्तृत सामग्री दी गई है।
स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख
पुस्तक को केवल चिकित्सा संबंधी जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें एनीमिया जागरूकता अभियानों, निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविरों और सामाजिक सेवा गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी शामिल की गई है। इसके अलावा मरीजों के अनुभवों को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है।

डॉ. द्विवेदी लंबे समय से एनीमिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियानों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि एनीमिया को केवल एक चिकित्सकीय समस्या के रूप में देखने के बजाय इसे पोषण, जागरूकता और जनस्वास्थ्य से जुड़े व्यापक विषय के रूप में समझने की जरूरत है।
‘एनीमिया मुक्त भारत’ पर जोर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में जनजागरूकता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुस्तक के माध्यम से एनीमिया से संबंधित प्रमाणिक और उपयोगी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
नई दिल्ली में पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन एनीमिया के प्रति जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
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