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ऑटिज्म से जूझ रहे 7 वर्षीय बच्चे में उपचार के दौरान संवाद और सामाजिक व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार
Digital Desk
ऑटिज्म से जूझ रहे 7 वर्षीय बच्चे में उपचार के दौरान संवाद और सामाजिक व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार
मध्य प्रदेश की होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र से एक ऐसा क्लिनिकल अनुभव सामने आया है, जिसने ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए आशा की नई किरण दिखाई है। इंदौर के एक 7 वर्षीय बच्चे में लगभग एक वर्ष के होम्योपैथिक उपचार और नियमित फॉलो-अप के दौरान संवाद, आई-कॉन्टैक्ट, सामाजिक व्यवहार तथा भावनात्मक जुड़ाव में क्रमिक सुधार दर्ज किया गया है।
यह बच्चा अगस्त 2025 में इंदौर स्थित एडवांस्ड होम्योपैथी हेल्थ सेंटर में उपचार के लिए लाया गया था। परिवार के अनुसार उस समय बच्चे में अर्थपूर्ण मौखिक संवाद बेहद सीमित था। वह लोगों से आंख मिलाने से बचता था तथा अत्यधिक सक्रियता और व्यवहार संबंधी कठिनाइयों से परेशान था। स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि परिवार को कई बार उसकी सुरक्षा के लिए उसे बांधकर रखने तक की स्थिति का सामना करना पड़ा। उपचार शुरू होने के बाद सुधार अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे दिखाई दिया। चिकित्सक के अनुसार लगभग चार-पांच माह बाद बच्चे में आई-कॉन्टैक्ट में सुधार दिखाई देने लगा। परिवार के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था, क्योंकि प्रारंभ में बच्चा लोगों की ओर देखने और संपर्क बनाने में बहुत कम रुचि दिखाता था। इसके बाद लगभग सात-आठ माह की अवधि में बच्चे ने पहली बार अपनी मां को “मां” कहकर संबोधित किया। माता-पिता के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और यादगार रहा। सितंबर 2026 में चिकित्सक को किया ‘नमस्कार’, सितंबर 2026 में फॉलो-अप के लिए जब बच्चे की मां उसे लेकर इंदौर पहुंचीं तो उन्होंने बच्चे में और अधिक सकारात्मक बदलाव की जानकारी दी। परिवार के अनुसार बच्चा अब पहले की तुलना में अधिक संवाद करने लगा था और पूरे वाक्य बोलने लगा था। उसकी अत्यधिक सक्रियता और व्यवहार संबंधी परेशानियों में भी कमी महसूस की गई। फॉलो-अप के दौरान चिकित्सक ने स्वयं बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखा। बच्चा कमरे में आया, चिकित्सक को ‘नमस्कार’ किया और सामने रखी कुर्सी पर जाकर बैठ गया। प्रारंभिक स्थिति की तुलना में यह परिवर्तन चिकित्सक और परिवार दोनों के लिए विशेष अनुभव रहा। उपचार कर रहे वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार 27 वर्षों के उनके चिकित्सकीय अनुभव में अनेक जटिल मामले सामने आए हैं, लेकिन इस बच्चे में धीरे-धीरे विकसित हुआ संवाद और सामाजिक व्यवहार का परिवर्तन उनके लिए विशेष रूप से भावनात्मक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल बोलना शुरू करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आई-कॉन्टैक्ट, सामाजिक संपर्क, मां के साथ भावनात्मक जुड़ाव तथा व्यवहार में सुधार भी महत्वपूर्ण अवलोकन हैं। डॉ. द्विवेदी के अनुसार बच्चे का उपचार अभी जारी है और इस मामले को “Ongoing Homoeopathic Treatment – Observational Case” के रूप में दस्तावेजीकृत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक व्यक्तिगत क्लिनिकल केस है और केवल एक मामले के आधार पर किसी उपचार की प्रभावशीलता या कारण-परिणाम संबंध का अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बच्चे की प्रगति का नियमित फॉलो-अप किया जा रहा है। आगे भी उसके संवाद, वाक्य निर्माण, आई-कॉन्टैक्ट, सामाजिक व्यवहार, व्यवहार नियंत्रण, स्कूल में प्रदर्शन तथा परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। बच्चे के माता-पिता के लिए यह परिवर्तन केवल चिकित्सकीय आंकड़ा नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अनुभव है। प्रारंभिक अवस्था में बच्चे के व्यवहार और संवाद को लेकर परिवार काफी चिंतित था। अब उसके बोलने, सामाजिक व्यवहार और परिवार के साथ जुड़ाव में आए बदलाव ने माता-पिता के भीतर भविष्य को लेकर नई उम्मीद पैदा की है। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के प्रति परिवार और समाज का व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण है। बच्चों को केवल उनके व्यवहार के आधार पर नियंत्रित करने के बजाय उनकी आवश्यकताओं को समझना, सुरक्षित वातावरण देना और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय, स्पीच एवं डेवलपमेंटल सपोर्ट उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता और विकास की गति अलग होती है। इसलिए परिवारों को धैर्य रखते हुए नियमित फॉलो-अप और विशेषज्ञों की सलाह के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मामला मध्य प्रदेश में होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में सामने आया एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन है। इसका विस्तृत दस्तावेजीकरण भविष्य में ऑटिज्म और विकासात्मक विकारों से संबंधित मामलों में चिकित्सकीय चर्चा एवं शोध के लिए उपयोगी हो सकता है। डॉ. ए.के. द्विवेदी इंदौर स्थित एडवांस्ड होम्योपैथी हेल्थ सेंटर से जुड़े वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। वे Central Council for Research in Homoeopathy (CCRH), Ministry of AYUSH, Government of India की Central Ethical Committee के सदस्य तथा North Eastern Institute of Ayurveda and Homoeopathy (NEIAH), Shillong की Scientific Advisory Committee के सदस्य भी हैं
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