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बरसात की नमी में बढ़ रही मांसपेशियों और जोड़ों की अकड़न? स्ट्रेचिंग, फोम रोलिंग और गर्म सिकाई से मिल सकती है राहत
लाइफ स्टाइल
मानसून में लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधि शरीर में जकड़न बढ़ा सकती है; विशेषज्ञ हल्की एक्सरसाइज और नियमित मूवमेंट पर देते हैं जोर
बारिश और उमस का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इस दौरान कुछ लोगों को जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न, भारीपन या दर्द अधिक महसूस होने लगता है। खासतौर पर सुबह उठने के बाद घुटनों, कमर, गर्दन, कंधों और पैरों में जकड़न की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने या बारिश के कारण बाहर न निकल पाने से यह परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है। हालांकि केवल नमी को जोड़ों के दर्द का सीधा कारण मानना सही नहीं है। मौसम के दौरान बदलने वाली दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि में कमी और पहले से मौजूद जोड़ों या मांसपेशियों की समस्याएं भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
मानसून में क्यों महसूस हो सकती है ज्यादा अकड़न?
बारिश के दिनों में लोगों की रोजाना की गतिविधियां अक्सर कम हो जाती हैं। मॉर्निंग वॉक बंद होना, बाहर व्यायाम न कर पाना और घंटों घर या ऑफिस में बैठे रहना शरीर की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। जब मांसपेशियां लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहतीं, तो उठने या अचानक चलना शुरू करने पर उनमें खिंचाव और जकड़न महसूस हो सकती है।
इसलिए मानसून में भी शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। अगर बाहर निकलना संभव नहीं है तो घर के अंदर कुछ देर टहलना, सीढ़ियां चढ़ना या हल्की एक्सरसाइज की जा सकती है। ऑफिस में काम करने वालों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए। थोड़े-थोड़े अंतराल पर उठकर चलने और शरीर को स्ट्रेच करने से जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।
सुबह हल्की स्ट्रेचिंग से करें शुरुआत
मांसपेशियों की जकड़न महसूस होने पर हल्की स्ट्रेचिंग उपयोगी हो सकती है। सुबह बिस्तर से उठने के बाद शरीर पर अचानक ज्यादा दबाव डालने के बजाय धीरे-धीरे हाथ-पैरों को मूव करना बेहतर रहता है। गर्दन को सावधानी से दाएं-बाएं घुमाना, कंधों को रोल करना और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग की जा सकती है।
स्ट्रेचिंग करते समय शरीर को उसकी सामान्य सीमा से ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। किसी भी स्ट्रेच के दौरान तेज दर्द महसूस हो तो उसे तुरंत रोक देना चाहिए। स्ट्रेचिंग का उद्देश्य शरीर को आराम देना और गतिशीलता बनाए रखना है, न कि दर्द सहते हुए मांसपेशियों को खींचना।
फोम रोलिंग से मांसपेशियों को मिल सकता है आराम
फिटनेस रूटीन में फोम रोलिंग का इस्तेमाल भी मांसपेशियों की जकड़न कम महसूस करने के लिए किया जाता है। फोम रोलर की सहायता से जांघ, पिंडली और शरीर की कुछ अन्य बड़ी मांसपेशियों पर धीरे-धीरे दबाव दिया जाता है। एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों में भारीपन महसूस करने वाले कुछ लोगों के लिए यह तरीका आरामदायक हो सकता है।
फोम रोलिंग करते समय बहुत ज्यादा दबाव देने से बचना जरूरी है। इसे सीधे घुटने जैसे जोड़, हड्डी, चोट वाली जगह या अत्यधिक दर्द वाले हिस्से पर नहीं चलाना चाहिए। किसी पुरानी चोट या गंभीर मस्कुलोस्केलेटल समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
गर्म सिकाई से अकड़ी मांसपेशियों को राहत
बारिश के मौसम में गर्म सिकाई भी जकड़ी हुई मांसपेशियों को आराम देने का एक सामान्य घरेलू तरीका है। गर्म पानी की बोतल, हीटिंग पैड या गर्म तौलिये की सहायता से प्रभावित हिस्से पर सीमित समय के लिए गर्माहट दी जा सकती है। इससे कुछ लोगों को मांसपेशियों के तनाव और अकड़न में अस्थायी राहत महसूस हो सकती है।
गर्म सिकाई करते समय सावधानी भी जरूरी है। हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल को सीधे बहुत गर्म अवस्था में त्वचा पर नहीं रखना चाहिए। सोते समय हीटिंग पैड लगाकर छोड़ देना भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा किसी नई चोट के बाद प्रभावित हिस्सा लाल या काफी सूजा हुआ है तो बिना चिकित्सकीय सलाह के गर्म सिकाई करने से बचना बेहतर है।
लंबे समय तक एक जगह बैठना बढ़ा सकता है परेशानी
वर्क फ्रॉम होम या ऑफिस में लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने वालों में गर्दन, कमर और कंधों की जकड़न आम समस्या बन सकती है। मानसून में बाहर की गतिविधियां कम होने के कारण यह स्थिति और बढ़ सकती है। ऐसे में नियमित अंतराल पर कुर्सी से उठना, कुछ कदम चलना और शरीर की स्थिति बदलना उपयोगी हो सकता है।
काम करते समय बैठने की मुद्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें जिससे लगातार गर्दन नीचे न झुकानी पड़े। पीठ को उचित सहारा देना और पैरों को आरामदायक स्थिति में रखना भी जरूरी है।
एक्सरसाइज पूरी तरह बंद न करें
बारिश होने का मतलब यह नहीं कि नियमित व्यायाम को पूरी तरह रोक दिया जाए। बाहर वॉक या रनिंग संभव नहीं हो तो घर में योग, मोबिलिटी एक्सरसाइज या हल्की बॉडीवेट एक्सरसाइज की जा सकती है। नियमित गतिविधि मांसपेशियों की ताकत और शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद करती है।
हालांकि एक्सरसाइज की तीव्रता व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग होनी चाहिए। लंबे समय बाद व्यायाम शुरू करने वाले व्यक्ति को अचानक कठिन वर्कआउट करने के बजाय धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए।
पानी और नींद को नजरअंदाज न करें
उमस वाले मौसम में पसीना ज्यादा निकल सकता है, लेकिन गर्मी की तुलना में प्यास कम महसूस हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना महत्वपूर्ण है। शरीर के सामान्य कार्यों और मांसपेशियों के प्रदर्शन के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन जरूरी है।
इसके साथ ही नियमित और पर्याप्त नींद भी शरीर की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देर रात तक जागने और अनियमित दिनचर्या के कारण थकान बढ़ सकती है, जिससे शरीर में भारीपन और असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है।
कब डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी?
हर तरह के जोड़ या मांसपेशियों के दर्द को मौसम से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, किसी जोड़ में काफी सूजन या लालिमा दिखाई दे, बुखार के साथ दर्द हो, चोट के बाद चलने-फिरने में परेशानी हो या समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
पहले से गठिया या किसी अन्य जोड़ संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे लोगों को केवल घरेलू उपायों के आधार पर अपनी दवाएं बंद या उनकी मात्रा नहीं बदलनी चाहिए। लगातार रहने वाली समस्या में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सही एक्सरसाइज और उपचार की सलाह दे सकते हैं।
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बरसात की नमी में बढ़ रही मांसपेशियों और जोड़ों की अकड़न? स्ट्रेचिंग, फोम रोलिंग और गर्म सिकाई से मिल सकती है राहत
लाइफ स्टाइल
बारिश और उमस का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इस दौरान कुछ लोगों को जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न, भारीपन या दर्द अधिक महसूस होने लगता है। खासतौर पर सुबह उठने के बाद घुटनों, कमर, गर्दन, कंधों और पैरों में जकड़न की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने या बारिश के कारण बाहर न निकल पाने से यह परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है। हालांकि केवल नमी को जोड़ों के दर्द का सीधा कारण मानना सही नहीं है। मौसम के दौरान बदलने वाली दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि में कमी और पहले से मौजूद जोड़ों या मांसपेशियों की समस्याएं भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
मानसून में क्यों महसूस हो सकती है ज्यादा अकड़न?
बारिश के दिनों में लोगों की रोजाना की गतिविधियां अक्सर कम हो जाती हैं। मॉर्निंग वॉक बंद होना, बाहर व्यायाम न कर पाना और घंटों घर या ऑफिस में बैठे रहना शरीर की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। जब मांसपेशियां लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहतीं, तो उठने या अचानक चलना शुरू करने पर उनमें खिंचाव और जकड़न महसूस हो सकती है।
इसलिए मानसून में भी शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। अगर बाहर निकलना संभव नहीं है तो घर के अंदर कुछ देर टहलना, सीढ़ियां चढ़ना या हल्की एक्सरसाइज की जा सकती है। ऑफिस में काम करने वालों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए। थोड़े-थोड़े अंतराल पर उठकर चलने और शरीर को स्ट्रेच करने से जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।
सुबह हल्की स्ट्रेचिंग से करें शुरुआत
मांसपेशियों की जकड़न महसूस होने पर हल्की स्ट्रेचिंग उपयोगी हो सकती है। सुबह बिस्तर से उठने के बाद शरीर पर अचानक ज्यादा दबाव डालने के बजाय धीरे-धीरे हाथ-पैरों को मूव करना बेहतर रहता है। गर्दन को सावधानी से दाएं-बाएं घुमाना, कंधों को रोल करना और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग की जा सकती है।
स्ट्रेचिंग करते समय शरीर को उसकी सामान्य सीमा से ज्यादा खींचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। किसी भी स्ट्रेच के दौरान तेज दर्द महसूस हो तो उसे तुरंत रोक देना चाहिए। स्ट्रेचिंग का उद्देश्य शरीर को आराम देना और गतिशीलता बनाए रखना है, न कि दर्द सहते हुए मांसपेशियों को खींचना।
फोम रोलिंग से मांसपेशियों को मिल सकता है आराम
फिटनेस रूटीन में फोम रोलिंग का इस्तेमाल भी मांसपेशियों की जकड़न कम महसूस करने के लिए किया जाता है। फोम रोलर की सहायता से जांघ, पिंडली और शरीर की कुछ अन्य बड़ी मांसपेशियों पर धीरे-धीरे दबाव दिया जाता है। एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों में भारीपन महसूस करने वाले कुछ लोगों के लिए यह तरीका आरामदायक हो सकता है।
फोम रोलिंग करते समय बहुत ज्यादा दबाव देने से बचना जरूरी है। इसे सीधे घुटने जैसे जोड़, हड्डी, चोट वाली जगह या अत्यधिक दर्द वाले हिस्से पर नहीं चलाना चाहिए। किसी पुरानी चोट या गंभीर मस्कुलोस्केलेटल समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
गर्म सिकाई से अकड़ी मांसपेशियों को राहत
बारिश के मौसम में गर्म सिकाई भी जकड़ी हुई मांसपेशियों को आराम देने का एक सामान्य घरेलू तरीका है। गर्म पानी की बोतल, हीटिंग पैड या गर्म तौलिये की सहायता से प्रभावित हिस्से पर सीमित समय के लिए गर्माहट दी जा सकती है। इससे कुछ लोगों को मांसपेशियों के तनाव और अकड़न में अस्थायी राहत महसूस हो सकती है।
गर्म सिकाई करते समय सावधानी भी जरूरी है। हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल को सीधे बहुत गर्म अवस्था में त्वचा पर नहीं रखना चाहिए। सोते समय हीटिंग पैड लगाकर छोड़ देना भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा किसी नई चोट के बाद प्रभावित हिस्सा लाल या काफी सूजा हुआ है तो बिना चिकित्सकीय सलाह के गर्म सिकाई करने से बचना बेहतर है।
लंबे समय तक एक जगह बैठना बढ़ा सकता है परेशानी
वर्क फ्रॉम होम या ऑफिस में लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने वालों में गर्दन, कमर और कंधों की जकड़न आम समस्या बन सकती है। मानसून में बाहर की गतिविधियां कम होने के कारण यह स्थिति और बढ़ सकती है। ऐसे में नियमित अंतराल पर कुर्सी से उठना, कुछ कदम चलना और शरीर की स्थिति बदलना उपयोगी हो सकता है।
काम करते समय बैठने की मुद्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें जिससे लगातार गर्दन नीचे न झुकानी पड़े। पीठ को उचित सहारा देना और पैरों को आरामदायक स्थिति में रखना भी जरूरी है।
एक्सरसाइज पूरी तरह बंद न करें
बारिश होने का मतलब यह नहीं कि नियमित व्यायाम को पूरी तरह रोक दिया जाए। बाहर वॉक या रनिंग संभव नहीं हो तो घर में योग, मोबिलिटी एक्सरसाइज या हल्की बॉडीवेट एक्सरसाइज की जा सकती है। नियमित गतिविधि मांसपेशियों की ताकत और शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद करती है।
हालांकि एक्सरसाइज की तीव्रता व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग होनी चाहिए। लंबे समय बाद व्यायाम शुरू करने वाले व्यक्ति को अचानक कठिन वर्कआउट करने के बजाय धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए।
पानी और नींद को नजरअंदाज न करें
उमस वाले मौसम में पसीना ज्यादा निकल सकता है, लेकिन गर्मी की तुलना में प्यास कम महसूस हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना महत्वपूर्ण है। शरीर के सामान्य कार्यों और मांसपेशियों के प्रदर्शन के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन जरूरी है।
इसके साथ ही नियमित और पर्याप्त नींद भी शरीर की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। देर रात तक जागने और अनियमित दिनचर्या के कारण थकान बढ़ सकती है, जिससे शरीर में भारीपन और असहजता ज्यादा महसूस हो सकती है।
कब डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी?
हर तरह के जोड़ या मांसपेशियों के दर्द को मौसम से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, किसी जोड़ में काफी सूजन या लालिमा दिखाई दे, बुखार के साथ दर्द हो, चोट के बाद चलने-फिरने में परेशानी हो या समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
पहले से गठिया या किसी अन्य जोड़ संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे लोगों को केवल घरेलू उपायों के आधार पर अपनी दवाएं बंद या उनकी मात्रा नहीं बदलनी चाहिए। लगातार रहने वाली समस्या में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सही एक्सरसाइज और उपचार की सलाह दे सकते हैं।
