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दिन छोटे होते ही क्यों बदलती है ऊर्जा और नींद? सुबह की रोशनी से शाम की दिनचर्या तक, ऐसे रखें शरीर की लय
लाइफ स्टाइल
कम होती धूप का असर मूड और नींद पर पड़ सकता है; सुबह प्राकृतिक रोशनी, नियमित दिनचर्या और जरूरत पड़ने पर लाइट थेरेपी मददगार हो सकती है
दिन छोटे होने के साथ सुबह और शाम के समय प्राकृतिक रोशनी की मात्रा कम होने लगती है। इसका असर शरीर की सर्केडियन रिदम यानी जैविक घड़ी पर पड़ सकता है। कुछ लोगों को इस दौरान सुबह उठने में परेशानी, दिन में सुस्ती, ऊर्जा में कमी या रात में सोने के समय में बदलाव महसूस हो सकता है। शरीर की जैविक घड़ी रोशनी और अंधेरे के संकेतों से काफी हद तक प्रभावित होती है। इसलिए मौसम बदलने के साथ रोजाना की दिनचर्या में छोटे बदलाव करके सुबह पर्याप्त रोशनी लेना और रात में शरीर को आराम के लिए तैयार करना उपयोगी हो सकता है।
सुबह की रोशनी को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
सुबह उठने के बाद प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताना शरीर की आंतरिक घड़ी को दिन और रात के समय के साथ तालमेल बैठाने में मदद कर सकता है। संभव हो तो खिड़की के पास बैठने के बजाय बाहर थोड़ी देर समय बिताना बेहतर विकल्प हो सकता है। सुबह की रोशनी खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनकी दिनचर्या में देर तक घर या ऑफिस के अंदर रहना शामिल है। हालांकि रोशनी लेने का तरीका व्यक्ति की जरूरत और मौसम की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
लाइट थेरेपी कब उपयोगी हो सकती है?
सर्दियों में कुछ लोगों को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, जिसमें मौसम के साथ मूड और ऊर्जा में बदलाव दिखाई दे सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से लाइट थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। लाइट थेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष लाइट बॉक्स सामान्य कमरे की रोशनी से अलग होते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने का समय और तरीका व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। आंखों से जुड़ी समस्या, कुछ दवाओं के इस्तेमाल या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
शाम को शरीर को दें आराम का संकेत
दिन में रोशनी बढ़ाने के साथ शाम की आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है। सोने से पहले कमरे की रोशनी कम करना, देर रात तक तेज स्क्रीन लाइट से बचना और रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने-जागने की कोशिश करना नींद की नियमितता बनाए रखने में मदद कर सकता है। शाम के समय बहुत अधिक कैफीन लेने से भी नींद प्रभावित हो सकती है। इसलिए सोने के करीब आने पर कैफीन वाले पेय सीमित करना और रात की दिनचर्या को शांत रखना उपयोगी हो सकता है।
नींद का समय अचानक न बदलें
दिन छोटे होने पर कुछ लोगों को सुबह देर तक सोने या शाम को जल्दी थकने का मन हो सकता है। इसके बजाय सोने और जागने का समय धीरे-धीरे नियमित रखना बेहतर रहता है। सप्ताहांत में भी सोने-जागने के समय में बहुत बड़ा अंतर रखने से शरीर की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। नियमित समय पर उठना और सुबह रोशनी लेना दिन की शुरुआत को व्यवस्थित रखने में मदद कर सकता है।
दिन में सक्रिय रहना भी जरूरी
कम धूप वाले मौसम में घर के अंदर ज्यादा समय बिताने से शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है। दिन के समय टहलना, हल्की एक्सरसाइज करना या बाहर कुछ समय बिताना ऊर्जा और सामान्य दिनचर्या बनाए रखने में मदद कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति में लगातार उदासी, अत्यधिक थकान, नींद में बड़ा बदलाव या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे केवल मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
सुबह की रोशनी और शाम की कम रोशनी का संतुलन
छोटे दिनों के दौरान शरीर की दिनचर्या को स्थिर रखने का आसान तरीका है कि दिन की शुरुआत रोशनी से और रात की शुरुआत आराम से की जाए। सुबह प्राकृतिक प्रकाश को प्राथमिकता देना और शाम को रोशनी व स्क्रीन एक्सपोजर कम करना नींद-जागने के चक्र के लिए मददगार हो सकता है। लाइट थेरेपी या किसी विशेष उपचार को स्वयं शुरू करने के बजाय व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
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