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मौसम बदलते ही अपनाएं लो-वेस्ट लाइफस्टाइल: गर्मियों की उपज को ऐसे करें सुरक्षित, शरद ऋतु के लिए तैयार करें गार्डन
लाइफ स्टाइल
कैनिंग, फर्मेंटेशन और फ्रीजिंग से फल-सब्जियों को लंबे समय तक बचाएं; पुराने गार्डन बेड को साफ कर अगली फसल की तैयारी शुरू करें
मौसम के बदलने के साथ घर में मौजूद गर्मियों की ताजी उपज को इस्तेमाल करने और बचाकर रखने का समय भी आता है। टमाटर, फल, हरी सब्जियां और दूसरी मौसमी उपज ज्यादा मात्रा में उपलब्ध हो तो उन्हें खराब होने से पहले कैनिंग, फर्मेंटेशन या फ्रीजिंग जैसे तरीकों से सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे खाद्य सामग्री की बर्बादी कम होती है और आने वाले महीनों में भी मौसमी स्वाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।
फ्रीजिंग उन खाद्य पदार्थों के लिए आसान विकल्प है जिन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो और जिन्हें बाद में खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सके। सब्जियों को साफ करके जरूरत के मुताबिक काटना और एयरटाइट पैकिंग में रखना उन्हें व्यवस्थित तरीके से स्टोर करने में मदद करता है। वहीं कैनिंग के जरिए फल, सब्जियां, सॉस और कुछ अन्य तैयार खाद्य पदार्थों को लंबे समय के लिए संरक्षित किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के तय नियमों का पालन जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से की गई कैनिंग स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
फर्मेंटेशन भी मौसमी उपज को इस्तेमाल करने का एक पारंपरिक तरीका है। सब्जियों और दूसरी उपज को नियंत्रित परिस्थितियों में फर्मेंट करके उनका स्वाद और उपयोग का समय बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सही नमक अनुपात, साफ बर्तन और उपयुक्त तापमान का ध्यान रखना जरूरी होता है। मौसम बदलने के साथ सिर्फ किचन ही नहीं, गार्डन की तैयारी भी जरूरी हो जाती है। गर्मियों में इस्तेमाल किए गए गार्डन बेड से सूखे पौधों और खराब पत्तियों को हटाकर मिट्टी को अगली फसल के लिए तैयार किया जा सकता है।
गार्डन में खाली जगहों को दोबारा व्यवस्थित करने से पहले मिट्टी की स्थिति देखना उपयोगी रहता है। जरूरत के अनुसार जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाकर मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है। इससे अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने में मदद मिलती है। शरद ऋतु में लगाए जाने वाले पौधों का चुनाव स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए। ठंड बढ़ने से पहले बीज या पौधे लगाने की योजना बनाने से गार्डन का उपयोग पूरे साल जारी रखा जा सकता है।
लो-वेस्ट सीजनल लिविंग का मतलब केवल खाना बचाना नहीं है। घर में उपलब्ध सामग्री का अधिकतम इस्तेमाल करना, खराब होने वाली चीजों को समय रहते सुरक्षित करना और गार्डन से निकलने वाले जैविक कचरे को कंपोस्ट में बदलना भी इसी सोच का हिस्सा है। गर्मियों की आखिरी उपज को सही तरीके से स्टोर करने और गार्डन बेड को अगली बुवाई के लिए तैयार करने से मौसम बदलने के दौरान घर की खाद्य व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित रखा जा सकता है।
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