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अमेरिका के हवाई हमलों के बाद ईरान का पलटवार, पूरे क्षेत्र में मिसाइल-ड्रोन हमले: ट्रंप ने दी कड़े परिणामों की चेतावनी
Digital Desk
ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। तेहरान ने अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब दिया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आगे की कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति के बाद संघर्ष फिर से तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वायु रक्षा ठिकानों, रडार प्रणालियों, समुद्री परिसंपत्तियों, संचार सुविधाओं और कथित माइन बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाकर नए हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ IRGC की कथित गतिविधियों का जवाब देना था। कमांड के अनुसार, हमलों का ताजा दौर पूरा हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानी रडार को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है।
ईरान ने जॉर्डन और अन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसके वायु रक्षा तंत्र ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली 13 में से 10 मिसाइलों को रोक दिया, जबकि तीन मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जॉर्डन में हमले के बाद अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान की ओर से बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर ड्रोन हमले का भी दावा किया गया है। कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन खतरे के खिलाफ वायु रक्षा कार्रवाई की जानकारी दी। इराक के एरबिल में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा भी IRGC ने किया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद कड़े रुख का संकेत दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों या वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिशों का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है। ईरान ने भी अमेरिकी हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरानी अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि तेहरान अमेरिकी हमलों को बिना जवाब छोड़े जाने के पक्ष में नहीं है। इस तरह दोनों पक्षों की कठोर बयानबाजी के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक गुंजाइश फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ा दबाव
इस संघर्ष का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
नए हमलों के बाद Brent crude करीब 5 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत समेत तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगाई और आयात बिल बढ़ने का जोखिम पैदा करती है।
संयुक्त राष्ट्र ने संयम बरतने को कहा
संघर्ष के फिर से तेज होने के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत के जरिए न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पहले से ज्यादा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह जवाबी कार्रवाई सीमित सैन्य टकराव तक रहती है या फिर व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेती है। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रतिक्रिया, ईरान के अगले कदम और होर्मुज में समुद्री आवाजाही इस संकट की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
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