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डॉ. अवनीश राही को मिला ‘राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मान–2026’, सुदेश बेरी ने किया सम्मानित
Digital Desk
हिंदी साहित्यिक पखवाड़े के दो-सत्रीय आयोजन का प्रथम सत्र संपन्न; ‘मैं भूख हूँ’ की त्रि-आयामी साहित्यिक अवधारणा ने खींचा ध्यान, हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और सिनेमा होंगे आमने-सामने
हिंदी दिवस के साहित्यिक पखवाड़े के अंतर्गत नई दिल्ली में आयोजित विशेष दो-सत्रीय साहित्यिक आयोजन में हिंदी साहित्य और सिनेमा के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद की भूमिका तैयार हुई। आयोजन के प्रथम सत्र में देश के प्रख्यात गीतकार, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. अवनीश राही को उनके विशिष्ट सृजनात्मक योगदान के लिए ‘राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी ने उन्हें अंगवस्त्र, शॉल, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
यह सम्मान डॉ. राही के हिंदी साहित्य में लंबे रचनात्मक अवदान के साथ उनकी चर्चित कृति ‘मैं भूख हूँ—एक युग-काव्य-संहिता (रोटी से राष्ट्र तक की वेदना)’ की अभिनव त्रि-आयामी साहित्यिक अवधारणा के लिए प्रदान किया गया। यह कृति भूख को केवल पेट की आवश्यकता के रूप में नहीं देखती, बल्कि उसे मनुष्य के जीवन, संवेदना, संघर्ष, सम्मान, न्याय, अस्तित्व और राष्ट्रबोध से जोड़ते हुए एक व्यापक काव्यात्मक चेतना के रूप में सामने लाती है।
प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी ने डॉ. राही के साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए कहा कि राही की विशेषता केवल गीत लिखना नहीं, बल्कि उन आवाजों को शब्द देना है जिन्हें समाज अक्सर सुन नहीं पाता। ‘मैं भूख हूँ’ में उन्होंने भूख को केवल पेट की आवश्यकता न मानकर मनुष्य की संवेदना, संघर्ष, सम्मान, न्याय और राष्ट्रबोध से जोड़ दिया है। यह रचना साहित्य को केवल पढ़ने नहीं, बल्कि महसूस करने का अवसर देती है और आने वाली पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण सृजनात्मक प्रयोग है।
धर्मसूत्र प्रोडक्शन के निदेशक ध्रुव सोलंकी ने कहा कि डॉ. राही का साहित्य लंबे समय से आम आदमी के जीवन और उसकी पीड़ा से जुड़ा रहा है। ‘मैं भूख हूँ’ में इसी संवेदना को व्यापक काव्यात्मक फलक मिला है। इसकी विशेषता यह है कि भूख यहां केवल विषय नहीं, बल्कि पूरी रचना की केंद्रीय चेतना बनकर सामने आती है। इस सम्मान के माध्यम से एक रचनाकार के साथ हिंदी की नई सृजनात्मक संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है।

सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. अवनीश राही ने कहा कि यह सम्मान वे अपने साहित्य-गुरु पद्मभूषण डॉ. गोपालदास ‘नीरज’ और अपने पिता, महाकवि अमर सिंह राही को समर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि इनसे मिली साहित्यिक दृष्टि और संस्कारों के साथ यह सम्मान हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य और नई पीढ़ी के रचनाकारों को समर्पित है।
डॉ. राही की साहित्यिक यात्रा में गीत, कविता, महाकाव्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ ‘भूख’ को एक व्यापक मानवीय प्रश्न के रूप में देखने की दृष्टि दिखाई देती है। ‘मैं भूख हूँ’ इसी रचनात्मक यात्रा का एक महत्वपूर्ण विस्तार है, जिसमें 71 काव्यस्वरों के माध्यम से भूख के अलग-अलग रूपों को आवाज दी गई है। रोटी की भूख से लेकर सम्मान, संवेदना, न्याय, मानवता, विद्रोह, आत्मविजय, जीवन-बोध, मृत्यु-बोध, नियति और राष्ट्र की भूख तक यह काव्य-यात्रा मनुष्य और समाज के अनेक प्रश्नों को स्पर्श करती है।
कृति की एक और विशिष्टता इसका त्रि-आयामी स्वरूप है। इसे पढ़ा भी जा सकता है, सुना भी जा सकता है और देखा भी जा सकता है। इसी अभिनव प्रस्तुति के कारण इसे Golden Book of World Records में स्थान मिला है। नुवॉइस प्रेस द्वारा प्रकाशित इस कृति की ‘रोटी से राष्ट्र तक की वेदना’ अब पेंगुइन रैंडम हाउस के वैश्विक वितरण के माध्यम से भारत की सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुँच रही है।
हिंदी दिवस के साहित्यिक पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं है। इसे दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम सत्र में राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मान–2026 प्रदान किया गया, जबकि द्वितीय सत्र हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद के रूप में आयोजित होगा।
द्वितीय सत्र में साहित्य और सिनेमा आमने-सामने होंगे। सिनेमा का प्रतिनिधित्व प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी करेंगे, जबकि साहित्य की ओर से अलीगढ़ के प्रख्यात गीतकार डॉ. अवनीश राही संवाद में उपस्थित होंगे। ‘मैं भूख हूँ’ को केंद्र में रखकर होने वाले इस राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद में सुदेश बेरी डॉ. राही से चयनित सवाल करेंगे। 71 काव्यस्वरों में से चुने गए स्वर इस संवाद में रोटी से राष्ट्र तक की उस साहित्यिक यात्रा को सामने लाएँगे, जिसमें भूख केवल अभाव नहीं, बल्कि मनुष्य की चेतना का एक व्यापक रूप बनकर उभरती है।
इस प्रकार हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित यह दो-सत्रीय आयोजन सम्मान से संवाद और उपलब्धि से विमर्श की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पहले चरण में एक रचनाकार के साहित्यिक अवदान का सम्मान हुआ है, तो अगले चरण में उसी रचनात्मक संसार को साहित्य और सिनेमा के आमने-सामने संवाद के माध्यम से व्यापक पाठक और दर्शक समाज तक ले जाने की तैयारी है।
डॉ. राही को सम्मान मिलने पर अलीगढ़ में खुशी का माहौल है। हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज के स्टाफ, साहित्यकारों, गीतकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है। देश के विभिन्न हिस्सों से भी उन्हें बधाइयाँ मिल रही हैं
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