बिहार में बाढ़ से 14 जिले प्रभावित, 5 हजार से अधिक स्कूल बंद

Digital Desk

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बिहार के 14 जिलों में बाढ़ से 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और 5,000 से ज्यादा स्कूल बंद हैं। उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का पानी फैलने से 40 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की खबर है। कई इलाकों में पानी स्कूल परिसरों तक पहुंचने के बाद 5,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

गंगा, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि से नदी किनारे बसे इलाकों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। बड़ी संख्या में श्मशान घाट भी बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में भी बाढ़ और जलभराव से जनजीवन प्रभावित है।

इसके विपरीत, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में फिलहाल बारिश की गतिविधि में कमी आई है।

बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का असर

बिहार में बाढ़ का पानी 14 जिलों तक फैल गया है। इनमें पटना, मुंगेर और भागलपुर समेत कई जिले शामिल हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कों और संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई है। दैनिक जरूरतों और जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी कई स्थानों पर चुनौती बन गई है।

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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है। पानी स्कूल परिसरों और आसपास के इलाकों में पहुंचने के कारण 5,000 से अधिक शिक्षण संस्थानों पर इसका असर पड़ा है।

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गंगा, कोसी और गंडक का जलस्तर बढ़ा

बिहार में गंगा, कोसी और गंडक नदियों का बढ़ा जलस्तर प्रशासन के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है।

नदी किनारे स्थित 500 से अधिक श्मशान घाटों के जलमग्न होने की भी जानकारी सामने आई है। इससे प्रभावित परिवारों के लिए अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है।

बाढ़ के कारण बड़ी आबादी के सामने सुरक्षित स्थान, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने की चुनौती है। प्रशासन को लगातार जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है।

भागलपुर में डूबने से पांच मौतें

भागलपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से पांच लोगों की मौत की सूचना है।

इस घटना के बाद जलमग्न इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। खासकर तेज बहाव और अधिक गहराई वाले पानी में लोगों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से पानी में न उतरें और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़

उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

राज्य के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं और करीब चार लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। कई गांवों और रिहायशी इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

नदी के आसपास बसे क्षेत्रों में स्थिति अधिक संवेदनशील बनी हुई है। जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती बढ़ सकती है।

बरेली में मंदिर डूबा, बाराबंकी में घर जलमग्न

उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ का असर अब प्रमुख संरचनाओं और रिहायशी क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है।

बरेली में रामगंगा नदी के बढ़े जलस्तर के कारण एक प्राचीन मंदिर के जलमग्न होने की सूचना है। वहीं, बाराबंकी में सरयू नदी का पानी बढ़ने से करीब 12 घरों के प्रभावित होने की खबर है।

यदि नदियों का जलस्तर दोबारा बढ़ता है, तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

मध्य प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर

मध्य प्रदेश में फिलहाल बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अगले तीन दिनों के दौरान राज्य में भारी बारिश की संभावना कम बताई गई है।

बारिश में यह अस्थायी राहत उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जहां पिछले दिनों लगातार मानसूनी गतिविधि के कारण जलभराव और अन्य समस्याएं सामने आई थीं।

हालांकि, मानसून के दौरान स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए राहत के बावजूद प्रशासन और लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।

राजस्थान में भी फिलहाल बारिश में विराम जैसी स्थिति है, लेकिन 11 सितंबर से एक नए बारिश के दौर की संभावना बताई गई है। बुधवार को राज्य के 10 शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

बिहार और उत्तर प्रदेश जहां बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत शुष्क और गर्म मौसम देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर, बारिश और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति में बदलाव हो सकता है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने, जलस्तर की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर लोगों को पहुंचाने की होगी।

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