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छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित प्लास्टिक पर डिजिटल निगरानी, अब हर कार्रवाई का ऑनलाइन रिकॉर्ड होगा तैयार
छत्तीसगढ़
सिंगल यूज प्लास्टिक और 120 माइक्रोन से कम कैरी बैग के खिलाफ अभियान तेज, मोबाइल एप से दर्ज होगी जांच और उल्लंघन की जानकारी
छत्तीसगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले कैरी बैग के खिलाफ कार्रवाई को अब डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री, निर्माण या उपयोग से जुड़े मामलों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे कार्रवाई की निगरानी आसान हो सके।
नगरीय प्रशासन विभाग ने इसके लिए डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत यदि किसी दुकान, कारोबारी या निर्माता के यहां प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलता है या कोई शिकायत सामने आती है तो जांच से लेकर कार्रवाई तक की पूरी जानकारी पोर्टल और मोबाइल एप पर अपलोड की जाएगी।
नई व्यवस्था से विभाग के पास नियम तोड़ने वाले लोगों और संस्थानों का रिकॉर्ड तैयार होगा। अगर कोई कारोबारी दोबारा प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करता पाया जाता है तो पहले की कार्रवाई का विवरण भी उपलब्ध रहेगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
अभियान केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रतिबंधित प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्रियों, थोक विक्रेताओं और सप्लायरों की भी जांच की जाएगी। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीमें संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगी।
जरूरत पड़ने पर जांच टीमों के साथ पुलिस की सहायता भी ली जाएगी। कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को ‘एसयूपी बैन कंप्लायंस मॉनिटरिंग पोर्टल’ पर पंजीयन कराना होगा।
मौके पर प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने के बाद अधिकारी ‘एसयूपी फील्ड इंस्पेक्शन मोबाइल एप’ के जरिए जांच और कार्रवाई की जानकारी तुरंत दर्ज करेंगे। इससे विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस शहर में कितनी जांच हुई, कितने मामले सामने आए और कितने लोगों पर कार्रवाई की गई।
इसके अलावा आम लोगों की शिकायतों के लिए ‘एसयूपी पब्लिक ग्रिवांस मोबाइल एप’ का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए नागरिक प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल या बिक्री की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। संबंधित स्थानीय निकायों को इन शिकायतों पर कार्रवाई करनी होगी।
नई व्यवस्था के तहत स्थानीय निकायों को हर तीन महीने में अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी देनी होगी। रिपोर्ट में जब्त की गई प्लास्टिक की मात्रा, लगाए गए जुर्माने, काटे गए चालान और बंद कराई गई इकाइयों जैसी जानकारी शामिल होगी।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त करने के साथ नोटिस जारी किया जा सकता है। अवैध रूप से प्लास्टिक निर्माण करने वाली इकाइयों को बंद कराने और पर्यावरण नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।
नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर ने बताया कि सभी नगरीय निकायों को पर्यावरण संरक्षण मंडल के साथ मिलकर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति, दुकानदार और कारोबारी की जानकारी वेब पोर्टल और मोबाइल एप में दर्ज की जाएगी।
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