घाटकोपर में भव्य उत्सव के साथ मनाई गई डॉ. बी.आर. आंबेडकर की १३५वीं जयंती, देखने को मिली समाज की विशाल सहभागिता

Digital Desk

भक्ति, एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अद्भुत संगम के रूप में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की १३५वीं जयंती घाटकोपर के पुलिस ग्राउंड में भव्य और ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाई गई। भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और महान राष्ट्रनिर्माता डॉ. आंबेडकर की स्मृति को समर्पित इस आयोजन में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए १०,००० से अधिक लोगों की उत्साही उपस्थिति ने इस शाम को बाबासाहेब की समानता, न्याय और सशक्तिकरण की स्थाई विरासत का एक शक्तिशाली प्रमाण बना दिया। 

डॉ. विजय कदम, मंगलताई जगताप और प्रदीप अडांगले के नेतृत्ववाली राष्ट्रनिर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विचार समिति तथा सोनाली रामटेके तमदाडगे के नेतृत्ववाली मेट्टा फाउंडेशन, घाटकोपर स्मारक समिति और शहीद स्मारक समिति के सहयोग से इस भव्य आंबेडकर जयंती पूर्व समारोह का आयोजन किया गया। वर्ली में लगातार चार आंबेडकर जयंती उत्सवों की अभूतपूर्व सफलता को आधार बनाते हुए—जिन्होंने स्थानीय निवासियों के दिलों को गहराई से छुआ था—आयोजकों ने बाबासाहेब के कालजयी संदेश को बड़ी कुशलता से और अधिक व्यापक बनाया, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका संदेश पूरे घाटकोपर और उससे भी कहीं आगे तक शक्तिशाली रूप से गूंजे।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक आदर्श शिंदे ने अपनी जोशीली भीमगीत प्रस्तुति से विशाल जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे उल्हासित होकर दर्शक खुद नृत्य और सामूहिक गायन में शामिल हो गए। लेझीम नृत्य दल की शानदार प्रस्तुति, नाट्य कार्यक्रम तथा शतरंज से लेकर क्रिकेट तक लगभग 20 प्रतियोगिताओं ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रोमांचक क्रिकेट प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान समारोह रहा, जिसमें सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव डॉक्टर हर्षदीप कांबले ने भी पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। खिलाड़ियों के साथ सोनाली रामटेके तमदाडगे और गिरीश वानखेड़े भी इस समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक का अनूठा स्पर्श देते हुए दो एआई निर्मित फिल्में प्रदर्शित की गईं; जिनमें से एक ने ऐतिहासिक 'महाड़ सत्याग्रह' को जीवंत रूप से चित्रित किया, जबकि दूसरी ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रेरणादायक जीवन यात्रा को दर्शाया। मंत्रमुग्ध भीड़ ने इन दोनों फिल्मों को दशकों से ज़ोरदार तालियाँ और दिल से निकली दाद मिली। 

कार्यक्रम का भावनात्मक चरम उस समय आया जब १३५वीं जयंती के प्रतीक स्वरूप १३५ किलो का विशाल केक डॉ. हर्षदीप कांबले और भीमराव वाय. आंबेडकर द्वारा संयुक्त रूप से काटा गया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें विजय वाघमारे (आईएएस) — सचिव, आदिवासी विकास विभाग; कृष्णा (आईआरएस) — पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त; राजेश गावंडे (आईएफएस) — मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी; डॉ. पल्लवी दराडे (आईआरएस) — महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त; कैलाश पगारे (आईएएस) — आयुक्त, एकीकृत बाल विकास सेवा; प्रेरणा देशभरतार (आईएएस) — प्रबंध निदेशक लिडकॉम; पांडुरंग राउत (आईआरएस); मंत्री संजय शिरसाट के निजी सचिव भरत कदम; पंडित मुकेश जाधव; शिक्षाविद संदीप और अर्चना डोंगरे; गायक संदेश उमप; सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स राजा नायडू और ऋषभ मोरे; साहित्यकार जे. वी. पवार तथा फिल्म व्यापार विश्लेषक गिरीश वानखेड़े शामिल थे।

डॉ. विजय कदम और फराह खान द्वारा बेहतरीन ढंग से होस्ट किया गया यह पूरा कार्यक्रम, बेमिसाल अनुशासन, सहज तालमेल और ज़बरदस्त उत्साह के साथ आगे बढ़ा, जिसने सभी के लिए एक यादगार अनुभव रच दिया। इस कार्यक्रम के साथ-साथ महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी और ऐतिहासिक महाड सत्याग्रह के आने वाले शताब्दी वर्ष का जश्न भी मनाया गया। प्रसिद्ध चवदार झील (महाड़) का पवित्र जल विशेष रूप से लाया गया और आगंतुकों के लिए बनाई गई एक भव्य महाड चवदार झील की प्रतिकृति की स्थापना में इस्तेमाल किया गया। जिन देशों में डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती मनाई जाती है, उन देशों के झंडे पूरे मैदान को शान से घेरे हुए थे।

डॉ. हर्षदीप कांबले ने अपनी गहरी सराहना व्यक्त करते हुए कहा, “यह हाल के समय के सबसे भव्य समारोहों में से एक है, जिसे स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से जोशीले युवाओं और बच्चों की ज़बरदस्त भागीदारी से बल मिला। वे डॉ. बी.आर. आंबेडकर को सम्मान देने के लिए बेजोड़ उत्साह के साथ उमड़ पड़े।” साफ़ तौर पर बेहद खुश नज़र आ रहे भीमराव वाई. आंबेडकर ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा, “मैं सचमुच हमारे समुदाय के भीतर चमक रही असाधारण प्रतिभा को देखकर हैरान हूँ। हमारे गायक कलाकारों की दमदार आवाज़ें, उनकी बेहिसाब ऊर्जा और यहाँ का जोश भरा माहौल—ये सब वाकई अद्भुत और बेहद प्रेरणादायक हैं।”

पूरा परिसर सांस्कृतिक और उद्यमशीलता महोत्सव में परिवर्तित हो गया था, जहाँ स्वादिष्ट खाद्य स्टॉल, महाड़ चवदार तालाब की कलात्मक प्रतिकृति, डॉ. आंबेडकर की विशाल प्रतिमा, उद्यमियों के स्टॉल तथा ज्ञान-प्रेम को दर्शाते पुस्तक प्रदर्शनों ने आकर्षण बढ़ाया।

14 अप्रैल को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों से पहले, जब परिवार और कॉलोनियॉं अलग-अलग जश्न मनाती हैं, इस जयंती से पहले के बड़े इवेंट ने मिलकर गर्व, एकजुटता और एक जैसे मकसद की गहरी भावना को मजबूत बनाया।

इस ऐतिहासिक आयोजन ने न सिर्फ़ डॉ. आंबेडकर के बदलाव लाने वाले विज़न को दिल से श्रद्धांजलि दी, बल्कि हज़ारों लोगों के बीच मज़बूती, सांस्कृतिक बदलाव और सामुदायिक सद्भाव के मज़बूत रिश्ते भी बनाए। इसने बेशक मुंबई और उसके बाहर सामाजिक न्याय के जनक को समर्पित, जोशीले और सबको साथ लेकर चलने वाले जश्न के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है।

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14 Apr 2026 By दैनिक जागरण

घाटकोपर में भव्य उत्सव के साथ मनाई गई डॉ. बी.आर. आंबेडकर की १३५वीं जयंती, देखने को मिली समाज की विशाल सहभागिता

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भक्ति, एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अद्भुत संगम के रूप में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की १३५वीं जयंती घाटकोपर के पुलिस ग्राउंड में भव्य और ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाई गई। भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और महान राष्ट्रनिर्माता डॉ. आंबेडकर की स्मृति को समर्पित इस आयोजन में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए १०,००० से अधिक लोगों की उत्साही उपस्थिति ने इस शाम को बाबासाहेब की समानता, न्याय और सशक्तिकरण की स्थाई विरासत का एक शक्तिशाली प्रमाण बना दिया। 

डॉ. विजय कदम, मंगलताई जगताप और प्रदीप अडांगले के नेतृत्ववाली राष्ट्रनिर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विचार समिति तथा सोनाली रामटेके तमदाडगे के नेतृत्ववाली मेट्टा फाउंडेशन, घाटकोपर स्मारक समिति और शहीद स्मारक समिति के सहयोग से इस भव्य आंबेडकर जयंती पूर्व समारोह का आयोजन किया गया। वर्ली में लगातार चार आंबेडकर जयंती उत्सवों की अभूतपूर्व सफलता को आधार बनाते हुए—जिन्होंने स्थानीय निवासियों के दिलों को गहराई से छुआ था—आयोजकों ने बाबासाहेब के कालजयी संदेश को बड़ी कुशलता से और अधिक व्यापक बनाया, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका संदेश पूरे घाटकोपर और उससे भी कहीं आगे तक शक्तिशाली रूप से गूंजे।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक आदर्श शिंदे ने अपनी जोशीली भीमगीत प्रस्तुति से विशाल जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे उल्हासित होकर दर्शक खुद नृत्य और सामूहिक गायन में शामिल हो गए। लेझीम नृत्य दल की शानदार प्रस्तुति, नाट्य कार्यक्रम तथा शतरंज से लेकर क्रिकेट तक लगभग 20 प्रतियोगिताओं ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रोमांचक क्रिकेट प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान समारोह रहा, जिसमें सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव डॉक्टर हर्षदीप कांबले ने भी पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। खिलाड़ियों के साथ सोनाली रामटेके तमदाडगे और गिरीश वानखेड़े भी इस समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक का अनूठा स्पर्श देते हुए दो एआई निर्मित फिल्में प्रदर्शित की गईं; जिनमें से एक ने ऐतिहासिक 'महाड़ सत्याग्रह' को जीवंत रूप से चित्रित किया, जबकि दूसरी ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रेरणादायक जीवन यात्रा को दर्शाया। मंत्रमुग्ध भीड़ ने इन दोनों फिल्मों को दशकों से ज़ोरदार तालियाँ और दिल से निकली दाद मिली। 

कार्यक्रम का भावनात्मक चरम उस समय आया जब १३५वीं जयंती के प्रतीक स्वरूप १३५ किलो का विशाल केक डॉ. हर्षदीप कांबले और भीमराव वाय. आंबेडकर द्वारा संयुक्त रूप से काटा गया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें विजय वाघमारे (आईएएस) — सचिव, आदिवासी विकास विभाग; कृष्णा (आईआरएस) — पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त; राजेश गावंडे (आईएफएस) — मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी; डॉ. पल्लवी दराडे (आईआरएस) — महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त; कैलाश पगारे (आईएएस) — आयुक्त, एकीकृत बाल विकास सेवा; प्रेरणा देशभरतार (आईएएस) — प्रबंध निदेशक लिडकॉम; पांडुरंग राउत (आईआरएस); मंत्री संजय शिरसाट के निजी सचिव भरत कदम; पंडित मुकेश जाधव; शिक्षाविद संदीप और अर्चना डोंगरे; गायक संदेश उमप; सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स राजा नायडू और ऋषभ मोरे; साहित्यकार जे. वी. पवार तथा फिल्म व्यापार विश्लेषक गिरीश वानखेड़े शामिल थे।

डॉ. विजय कदम और फराह खान द्वारा बेहतरीन ढंग से होस्ट किया गया यह पूरा कार्यक्रम, बेमिसाल अनुशासन, सहज तालमेल और ज़बरदस्त उत्साह के साथ आगे बढ़ा, जिसने सभी के लिए एक यादगार अनुभव रच दिया। इस कार्यक्रम के साथ-साथ महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी और ऐतिहासिक महाड सत्याग्रह के आने वाले शताब्दी वर्ष का जश्न भी मनाया गया। प्रसिद्ध चवदार झील (महाड़) का पवित्र जल विशेष रूप से लाया गया और आगंतुकों के लिए बनाई गई एक भव्य महाड चवदार झील की प्रतिकृति की स्थापना में इस्तेमाल किया गया। जिन देशों में डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती मनाई जाती है, उन देशों के झंडे पूरे मैदान को शान से घेरे हुए थे।

डॉ. हर्षदीप कांबले ने अपनी गहरी सराहना व्यक्त करते हुए कहा, “यह हाल के समय के सबसे भव्य समारोहों में से एक है, जिसे स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से जोशीले युवाओं और बच्चों की ज़बरदस्त भागीदारी से बल मिला। वे डॉ. बी.आर. आंबेडकर को सम्मान देने के लिए बेजोड़ उत्साह के साथ उमड़ पड़े।” साफ़ तौर पर बेहद खुश नज़र आ रहे भीमराव वाई. आंबेडकर ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा, “मैं सचमुच हमारे समुदाय के भीतर चमक रही असाधारण प्रतिभा को देखकर हैरान हूँ। हमारे गायक कलाकारों की दमदार आवाज़ें, उनकी बेहिसाब ऊर्जा और यहाँ का जोश भरा माहौल—ये सब वाकई अद्भुत और बेहद प्रेरणादायक हैं।”

पूरा परिसर सांस्कृतिक और उद्यमशीलता महोत्सव में परिवर्तित हो गया था, जहाँ स्वादिष्ट खाद्य स्टॉल, महाड़ चवदार तालाब की कलात्मक प्रतिकृति, डॉ. आंबेडकर की विशाल प्रतिमा, उद्यमियों के स्टॉल तथा ज्ञान-प्रेम को दर्शाते पुस्तक प्रदर्शनों ने आकर्षण बढ़ाया।

14 अप्रैल को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों से पहले, जब परिवार और कॉलोनियॉं अलग-अलग जश्न मनाती हैं, इस जयंती से पहले के बड़े इवेंट ने मिलकर गर्व, एकजुटता और एक जैसे मकसद की गहरी भावना को मजबूत बनाया।

इस ऐतिहासिक आयोजन ने न सिर्फ़ डॉ. आंबेडकर के बदलाव लाने वाले विज़न को दिल से श्रद्धांजलि दी, बल्कि हज़ारों लोगों के बीच मज़बूती, सांस्कृतिक बदलाव और सामुदायिक सद्भाव के मज़बूत रिश्ते भी बनाए। इसने बेशक मुंबई और उसके बाहर सामाजिक न्याय के जनक को समर्पित, जोशीले और सबको साथ लेकर चलने वाले जश्न के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है।

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