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18वां BRICS Summit: युद्ध और वैश्विक संकट एजेंडे में सबसे ऊपर
Digital Desk
नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit पश्चिम एशिया और यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला संकट पर केंद्रित रहेगा।
18वां BRICS Summit इस सप्ताहांत नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। बैठक में युद्ध, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा तथा कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं में आ रही बाधाओं पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
पुतिन-मोदी मुलाकात पर नजर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शुक्रवार, 11 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। उनके भारत पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग सहित कई रणनीतिक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
BRICS के प्रमुख नेताओं में पुतिन की भागीदारी पर दुनिया की नजर रहेगी। उनकी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।
पश्चिम एशिया संकट पर होगी अहम चर्चा
शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया का संकट प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की प्रस्तावित भागीदारी इस चर्चा को और महत्वपूर्ण बनाती है।
फरवरी में इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद शुरू हुए युद्ध ने क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है। संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और प्रमुख समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं।
पेजेशकियन के भारत दौरे को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2024 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मृत्यु के बाद पद संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
ईरान-UAE तनाव भी महत्वपूर्ण
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच संबंध भी सम्मेलन में एक संवेदनशील मुद्दा बन सकते हैं।
क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव के बीच दोनों देशों की ओर से हाल के दिनों में तीखे बयान सामने आए हैं। UAE की ओर से शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद है।
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की ओर से बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी भी बैठक में शामिल होंगे।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा अहम
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में हैं। उनकी मौजूदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के प्रयासों में जुटे हैं।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
इंडोनेशिया की भागीदारी खास तौर पर उल्लेखनीय है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
BRICS में बढ़ रहा वैश्विक प्रतिनिधित्व
शिखर सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के नेता और प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा करेंगे, जबकि ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री माउरो विएरा करेंगे। पुतिन BRICS के संस्थापक सदस्यों में सबसे लंबे समय से सत्ता में रहने वाले नेताओं में शामिल हैं।
BRICS साझेदार देशों में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग भी प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल हैं।
आसियान के अध्यक्ष के रूप में फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर भी हिस्सा लेंगे। वहीं कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के अध्यक्ष के रूप में सम्मेलन में शामिल होंगे।
UN, WHO और WTO प्रमुख भी होंगे शामिल
सम्मेलन में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के शीर्ष अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस और विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष और पूर्व ब्राजीलियाई राष्ट्रपति दिल्मा रूसेफ भी सम्मेलन में भाग ले सकती हैं।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर के अनुसार, देश शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधित्व नहीं करेगा।
आगे क्या रहेगा फोकस?
नई दिल्ली में प्रमुख वैश्विक शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच सम्मेलन में संघर्ष समाधान, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य एवं कृषि आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार और भू-राजनीतिक अस्थिरता के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
पुतिन, शी जिनपिंग, पेजेशकियन और गुटेरेस जैसे नेताओं की भागीदारी भारत को वैश्विक संकटों पर कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। साथ ही, यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मामलों में BRICS के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करने का अवसर भी होगा।
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