नेपाल में Gen Z आंदोलन के शहीदों को कैंडललाइट विजिल में श्रद्धांजलि

Digital Desk

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नेपाल के काठमांडू में 2025 के Gen Z आंदोलन में मारे गए लोगों की पहली बरसी पर कैंडललाइट विजिल आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गई।

नेपाल ने 2025 के Gen Z आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर काठमांडू में कैंडललाइट विजिल आयोजित कर उन प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 8 और 9 सितंबर को हुए आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई थी।

यह कार्यक्रम न्यू बनश्वर स्थित जले हुए पूर्व संघीय संसद भवन के परिसर में हुआ। पिछले साल के आंदोलन के दौरान यह जगह प्रदर्शन के प्रमुख केंद्रों में शामिल थी। सैकड़ों लोगों ने यहां मोमबत्तियां और तेल के दीये जलाए, एक मिनट का मौन रखा और मृत प्रदर्शनकारियों को ‘शहीद’ बताते हुए उनके सम्मान में नारे लगाए।

दो दिन तक चले इस युवा आंदोलन में सुशासन, जवाबदेही और भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग प्रमुख थी। आंदोलन के दबाव के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा और नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया।

पहली बरसी पर जुटे लोग

कैंडललाइट विजिल में Gen Z कार्यकर्ताओं के साथ मृतकों के परिवार, घायल प्रदर्शनकारी और आम नागरिक भी शामिल हुए।

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पूर्व संसद परिसर में मोमबत्तियों और तेल के दीयों को घेरे में रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर “हार्दिक श्रद्धांजलि” संदेश भी लिखा गया।

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Gen Z कार्यकर्ता बिकेश साह ने कहा कि आंदोलन में जान गंवाने वालों के योगदान ने नेपाल में शासन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक आंदोलन का मूल उद्देश्य जवाबदेह सरकार और बेहतर सुशासन था।

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प्रदर्शन में 77 लोगों की मौत

नेपाल में Gen Z आंदोलन 8 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था। शुरुआती तौर पर इसका तत्काल कारण सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध था।

हालांकि, आंदोलन जल्द ही भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता, भाई-भतीजावाद, बेरोजगारी और खराब शासन व्यवस्था के खिलाफ व्यापक युवा आंदोलन में बदल गया। देश के कई हिस्सों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।

विभिन्न रिपोर्टों में 8 और 9 सितंबर के प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 77 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया है। इनमें पुलिस कार्रवाई के दौरान मारे गए लोग भी शामिल थे। इन मौतों ने आंदोलन को नेपाल के हालिया राजनीतिक इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल कर दिया।

आखिरकार बढ़ते दबाव के बीच केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देश में अंतरिम राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत हुई।

सरकार ने घोषित किया शहीद दिवस

नेपाल की अंतरिम सरकार ने आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को औपचारिक रूप से शहीद का दर्जा दिया।

3 नवंबर 2025 को सरकार ने 45 लोगों को शहीद घोषित किया था। इनमें 42 लोगों को “Gen Z Governance Warriors” और तीन को पुलिसकर्मी बताया गया। सरकार ने नेपाली कैलेंडर की भाद्र 23, यानी 8 सितंबर को हर वर्ष Gen Z Martyrs’ Day के रूप में मनाने का फैसला किया।

पहली आधिकारिक वर्षगांठ के अवसर पर 8 सितंबर 2026 को देशभर में सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि बदलाव, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए जान गंवाने वालों का योगदान बेहतर, न्यायपूर्ण और समृद्ध नेपाल बनाने की दिशा में प्रेरणा देना चाहिए।

मांगों पर जारी बहस

आंदोलन की पहली बरसी ने यह बहस भी तेज कर दी है कि क्या Gen Z प्रदर्शनकारियों की सभी प्रमुख मांगें पूरी हो पाई हैं।

मारे गए लोगों के परिवारों और घायल प्रदर्शनकारियों ने न्याय की प्रक्रिया और आंदोलन के बाद किए गए वादों के क्रियान्वयन की गति पर सवाल उठाए हैं।

भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, सरकार की जवाबदेही, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसे मुद्दे अब भी नेपाल की राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।

गृह मंत्री ने दिया भरोसा

गृह मंत्री सुदन गुरंग ने पूर्व संसद परिसर में आयोजित स्मृति कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन में जान गंवाने वालों की आकांक्षाओं के प्रति प्रतिबद्ध है।

गुरंग ने कहा कि सरकार सुशासन और भ्रष्टाचार के अंत से जुड़ी मांगों को पूरा करने के लिए काम करेगी। उन्होंने आंदोलन के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी।

उनका बयान ऐसे समय आया जब मृतकों के परिवार और Gen Z कार्यकर्ता आंदोलन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और संस्थागत बदलाव की मांग कर रहे हैं।

बदल गया राजनीतिक परिदृश्य

एक साल के भीतर Gen Z आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को काफी हद तक बदल दिया।

ओली के इस्तीफे के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व किया। संसद भंग की गई और इसके बाद 5 मार्च 2026 को चुनाव कराए गए।

चुनाव के बाद नेपाल में बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार बनी। इस राजनीतिक बदलाव ने Gen Z आंदोलन को नेपाल के हालिया इतिहास की सबसे प्रभावशाली घटनाओं में शामिल कर दिया है।

शहीदों की याद से भविष्य की उम्मीद

काठमांडू में आयोजित कैंडललाइट विजिल केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन अपेक्षाओं की याद भी था, जिनके कारण हजारों युवा पिछले साल सड़कों पर उतरे थे।

मृतकों के परिवारों और आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं के लिए यह दिन अपने प्रियजनों को याद करने और उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का अवसर बना। वहीं सरकार के लिए Gen Z Martyrs’ Day आंदोलन में जान गंवाने वालों के योगदान को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने का अवसर है।

अब नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण की मांगों को स्थायी संस्थागत सुधारों में कितना बदला जा सकता है। आंदोलन की पहली बरसी पर हुई श्रद्धांजलि ने साफ कर दिया है कि Gen Z आंदोलन की विरासत आने वाले वर्षों में नेपाल की राजनीति को प्रभावित करती रहेगी।

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