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अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 3500 सैनिक भेजे, ईरान में जमीनी कार्रवाई की तैयारी
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 3500 अतिरिक्त सैनिक USS त्रिपोली के जरिए तैनात किए हैं। 31वीं मरीन यूनिट के ये सैनिक भारी हथियारों और लड़ाकू विमानों के साथ आए हैं।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार USS त्रिपोली जहाज के जरिए 3500 अतिरिक्त सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात किए गए हैं। ये सैनिक 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं। इनके साथ भारी संख्या में लड़ाकू विमान और आधुनिक हथियार भी भेजे गए हैं। यह बढ़ी हुई तैनाती अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई है।
ईरान में संभावित जमीनी कार्रवाई
वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान में कुछ हफ्तों तक चलने वाले जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन बड़े पैमाने पर नहीं होगा, बल्कि इसमें स्पेशल फोर्स के छापे और पैदल सैनिकों की कार्रवाई शामिल हो सकती है। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने इस कदम को लेकर चेतावनी दी है और लिखा है कि अमेरिकी सैनिक "ईरान की जमीन से ताबूत में लौटेंगे।"
पाकिस्तान में तीन देशों की बैठक
इस बीच, पाकिस्तान में अगले दिन तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इन मंत्रियों की मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी होगी। इस बैठक में मिडिल ईस्ट की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और राजनीतिक हल निकालने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
पाकिस्तान क्यों बना बैठक का केंद्र
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को यह बैठक आयोजित करने के लिए चुना गया क्योंकि देश ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अच्छे संबंध रखता है। पाकिस्तान किसी एक पक्ष के साथ सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है और इसलिए इसे एक न्यूट्रल ज़ोन माना जा रहा है। इससे तीनों देशों के बीच बातचीत आसान और संतुलित बनी रहेगी।
क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव पर असर
अमेरिकी सैनिकों की बढ़ी हुई तैनाती और पाकिस्तान में होने वाली बैठक मिडिल ईस्ट की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। अमेरिका की रणनीति और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका इस समय क्षेत्रीय तनाव को कम करने या संतुलित करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
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अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 3500 सैनिक भेजे, ईरान में जमीनी कार्रवाई की तैयारी
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार USS त्रिपोली जहाज के जरिए 3500 अतिरिक्त सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात किए गए हैं। ये सैनिक 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं। इनके साथ भारी संख्या में लड़ाकू विमान और आधुनिक हथियार भी भेजे गए हैं। यह बढ़ी हुई तैनाती अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई है।
ईरान में संभावित जमीनी कार्रवाई
वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान में कुछ हफ्तों तक चलने वाले जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन बड़े पैमाने पर नहीं होगा, बल्कि इसमें स्पेशल फोर्स के छापे और पैदल सैनिकों की कार्रवाई शामिल हो सकती है। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने इस कदम को लेकर चेतावनी दी है और लिखा है कि अमेरिकी सैनिक "ईरान की जमीन से ताबूत में लौटेंगे।"
पाकिस्तान में तीन देशों की बैठक
इस बीच, पाकिस्तान में अगले दिन तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इन मंत्रियों की मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी होगी। इस बैठक में मिडिल ईस्ट की सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और राजनीतिक हल निकालने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
पाकिस्तान क्यों बना बैठक का केंद्र
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को यह बैठक आयोजित करने के लिए चुना गया क्योंकि देश ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अच्छे संबंध रखता है। पाकिस्तान किसी एक पक्ष के साथ सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है और इसलिए इसे एक न्यूट्रल ज़ोन माना जा रहा है। इससे तीनों देशों के बीच बातचीत आसान और संतुलित बनी रहेगी।
क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव पर असर
अमेरिकी सैनिकों की बढ़ी हुई तैनाती और पाकिस्तान में होने वाली बैठक मिडिल ईस्ट की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। अमेरिका की रणनीति और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका इस समय क्षेत्रीय तनाव को कम करने या संतुलित करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
